आमलकी एकादशी पर ऐसे करें भगवान विष्णु की पूजा, जानिए शुभ मुहूर्त
- Written By: नवभारत डेस्क
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-सीमा कुमारी
हर साल फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन ‘आमलकी एकादशी’ व्रत (Amalaki Ekadashi Vrat) रखा जाता है। इस बार आमलकी एकादशी का व्रत 14 मार्च, सोमवार के दिन हैं, इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु (Lord Vishnu) के साथ-साथ आंवला के पेड़ की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि, ऐसा करने से एक हजार गौ दान के समान पुण्य मिलता है। आइए जानें ‘आमलकी एकादशी’की महिमा के बारे में –
शुभ मुहूर्त
एकादशी तिथि 13 मार्च को सुबह 10 बजकर 21 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 14 मार्च को दोपहर 12 बजकर 5 मिनट तक रहेगी। हालांकि उदया तिथि के अनुसार से ये व्रत 14 मार्च को रखा जाएगा। मान्यता के अनुसार इस बार आमलकी एकादशी पर सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है, जो इसे और भी शुभ और फलदायी बनाएगा।
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पूजा विधि
भगवान की पूजा के पश्चात पूजन सामग्री लेकर आंवले के वृक्ष की पूजा करें। सबसे पहले वृक्ष के चारों की भूमि को साफ करें और उसे गाय के गोबर से पवित्र करें।
पेड़ की जड़ में एक वेदी बनाकर उस पर कलश स्थापित करें। इस कलश में देवताओं, तीर्थों एवं सागर को आमंत्रित करें।
कलश में सुगंधी और पंच रत्न रखें। इसके ऊपर पंच पल्लव रखें फिर दीप जलाकर रखें। कलश पर श्रीखंड चंदन का लेप करें और वस्त्र पहनाएं।
अंत में कलश के ऊपर श्री विष्णु के छठे अवतार परशुराम की स्वर्ण मूर्ति स्थापित करें और विधिवत रूप से परशुरामजी की पूजा करें।
रात्रि में भगवत कथा व भजन-कीर्तन करते हुए प्रभु का स्मरण करें।
द्वादशी के दिन सुबह ब्राह्मण को भोजन करवा कर दक्षिणा दें साथ ही परशुराम की मूर्तिसहित कलश ब्राह्मण को भेंट करें। इन क्रियाओं के पश्चात परायण करके अन्न जल ग्रहण करें।
महिमा
पौराणिक कथाओं के अनुसार आंवले के पेड़ को भगवान विष्णु ने ही जन्म दिया था। मान्यता है कि इस पेड़ के हर एक भाग में ईश्वर का वास है। कहा जाता है कि ‘आमलकी एकादशी’ के दिन आवंले के पेड़ के नीचे बैठकर पूजन करने से जगत के पालनहार भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। और भक्तों की मनवांछित फल प्रदान करते है। साथ ही ये भी कहा जाता है कि आवंले के वृक्ष में श्री हरि और माता लक्ष्मी का वास होता है।
मान्यता के अनुसार आमलकी एकादशी के दिन आंवले का उबटन लगाना चाहिए और आवंले के जल से ही स्नान करना चाहिए। साथ ही इस दिन आवंले को पूजने, दान करने और खाने की भी सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर नारायण की पूजा करने से एक हजार गौ दान के समान पुण्य की प्राप्ति होती है।
