वेटलैंड क्षेत्र में प्रवासी पक्षी और प्राकृतिक जलस्रोत (सौ. एआई)
World Wetlands Day History: आज 2 फरवरी है। जब दुनिया कंक्रीट के जंगलों में तब्दील हो रही है तब वर्ल्ड वेटलैंड्स डे हमें उन झीलों, तालाबों और दलदली इलाकों की याद दिलाता है जो खामोशी से हमारी धरती को जिंदा रखे हुए हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दिन की शुरुआत ईरान के एक छोटे से शहर रामसर से हुई थी। आइए इस वैश्विक आंदोलन के दिलचस्प इतिहास और इसके गहरे महत्व को समझते हैं।
बात 2 फरवरी 1971 की है। ईरान के कैस्पियन सागर के तट पर बसे एक खूबसूरत शहर रामसर में दुनिया के कई देशों के प्रतिनिधि जुटे थे। मकसद था लगातार खत्म हो रहे तालाबों, झीलों और नमी वाले इलाकों (Wetlands) को बचाना। इसी दिन रामसर कन्वेंशन पर हस्ताक्षर हुए जिसने वेटलैंड्स के संरक्षण को एक अंतरराष्ट्रीय कानूनी पहचान दी। हालांकि आधिकारिक तौर पर पहला विश्व आर्द्रभूमि दिवस 1997 में मनाया गया और तब से यह सिलसिला जारी है।
जिस तरह हमारे शरीर में किडनियां खून को साफ करने का काम करती हैं ठीक उसी तरह वेटलैंड्स पानी को फिल्टर करते हैं। ये प्रदूषकों को सोख लेते हैं और भूजल को रिचार्ज करते हैं। अगर आज हमारे शहरों को पीने का पानी मिल रहा है तो उसमें इन वेटलैंड्स का बहुत बड़ा योगदान है। इसके अलावा ये बाढ़ के पानी को सोखकर शहरों को डूबने से भी बचाते हैं।
यह भी पढ़ें:- Coast Guard Day History: महज 49 साल में कैसे भारत का सुरक्षा कवच बनी यह फोर्स? जानें शौर्य का पूरा सफरनामा
प्रतीकात्मक तस्वीर (सौ. फ्रीपिक)
एक नया संकल्प हर साल यह दिन एक खास थीम के साथ मनाया जाता है। साल 2026 की थीम आर्द्रभूमि और मानव कल्याण (Wetlands and Human Wellbeing) के इर्द-गिर्द केंद्रित है। यह थीम हमें याद दिलाती है कि प्रकृति का यह हिस्सा केवल पक्षियों या मछलियों के लिए नहीं बल्कि इंसानों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अनिवार्य है।
भारत के लिए यह दिन बेहद खास है। वर्तमान में भारत में 80 से ज्यादा रामसर साइट्स हैं जिनमें ओडिशा की चिलिका झील से लेकर लद्दाख की सो-कर (Tso Kar) झील तक शामिल हैं। सरकार की अमृत धरोहर जैसी योजनाएं इन स्थलों को न केवल संरक्षित कर रही हैं बल्कि इन्हें ईको-टूरिज्म के बड़े केंद्र के रूप में भी विकसित कर रही हैं।
इतिहास गवाह है कि जहां सभ्यताएं पानी के पास फली-फूलीं वहीं पानी के खत्म होने पर उजड़ गईं। आज शहरीकरण के नाम पर तालाबों को पाटकर बिल्डिंगें बनाई जा रही हैं। वर्ल्ड वेटलैंड्स डे हमें चेतावनी देता है कि अगर ये दलदली जमीनें सूख गई तो शहरों का जलस्तर गिर जाएगा और जैव-विविधता खत्म हो जाएगी।
ईरान के रामसर से शुरू हुई यह छोटी सी चिंगारी आज एक वैश्विक मशाल बन चुकी है। विश्व आर्द्रभूमि दिवस केवल सरकारी आयोजनों का दिन नहीं है बल्कि यह हर नागरिक के लिए अपने आसपास के जल स्रोतों को बचाने का एक आह्वान है।