

World Population Day 2026: जनसंख्या नियंत्रण के लिए लोगों में जागरूकता फैलाई गई, शिक्षा का प्रचार प्रसार तेजी से किया गया, आज शिक्षित और जागरूक लोगों की संख्या अधिक है लेकिन फिर भी दुनिया की आबादी तेजी से बढ़ रही है।
जनसंख्या के महत्व को समझने और इस पर नियंत्रण के लिए ही संयुक्त राष्ट्र संघ ने विश्व जनसंख्या दिवस मनाने की शुरुआत की, लेकिन क्या सिर्फ जनसंख्या नियंत्रण ही जरूरी है या फिर जेंडर इक्वालिटी भी आवश्यक है। मॉर्डन लाइफ स्टाइल में यह और भी अधिक जरूरी हो जाता है।
वर्ल्ड पापुलेशन डे हर साल 11 जुलाई को मनाया जाता है। 1987 में जब विश्व की जनसंख्या लगभग पांच अरब थी, तब इसे पहली बार मनाया गया। इस आयोजन की शुरुआत 1989 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की गवर्निंग काउंसिल द्वारा की गई। इसका उद्देश्य वैश्विक जनसंख्या मुद्दों के बारे में लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाना है। आज बात जनसंख्या और लैंगिक समानता की करेंगे, क्यों कि किसी भी विकसित राष्ट्र के लिए सबसे जरूरी है लैंगिक समानता।
Realizing the hopes and aspirations of young people-today and for the future यानी युवाओं की उम्मीदों और आकांक्षाओं को साकार करना- आज और भविष्य के लिए।
WHO के आंकड़ों के अनुसार, 16% महिलाओं ने शारीरिक रूप घरेलू हिंसा का अनुभव किया। 25% ने यौन रूप से और 53% ने मनोवैज्ञानिक रूप से और 56% ने घरेलू हिंसा को किसी न किसी रूप में अनुभव किया। जेंडर इक्वलिटी या लैंगिक समानता महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ होने वाले घरेलू हिंसा को रोकने में मदद करती है। यह महिलाओं की कम्युनिटी को सुरक्षित और स्वस्थ बनाती है। यह आधारभूत मानवाधिकार है और यह अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा है।
महिलाओं के खिलाफ हिंसा को नजरअंदाज करना जेंडर इक्वालिटी में सबसे बड़ी बाधा है। किसी भी विषय पर निर्णय लेने में पुरुषों का नियंत्रण अधिक है। सड़ी-गली प्रथाएं और परम्पराएं, रूढियां महिलाओं की स्वतंत्रता को बाधित करते हैं। पुरुष प्रधान समाज महिलाओं के प्रति आक्रामकता और अनादर दिखाते हैं। लैंगिक समानता को बढ़ावा देने से महिलाओं के खिलाफ हिंसा रुकेगी और उन्हें उनका स्वतंत्रता का अधिकार मिलेगा।
यूनिसेफ के अनुसार, 4 में से 1 लड़की को जॉब नहीं है, क्योंकि उनके पास जरूरी शिक्षा नहीं है, जबकि 10 में से 1 लड़के को जॉब नहीं है। इसकी वजह भेदभाव नहीं बल्कि जेंडर इक्वालिटी है, जिसकी कीमत महिलाओं की शिक्षा के तौर पर चुकानी पड़ती है। लैंगिक समानता को बढ़ावा देकर इस खाई को पाटा जा सकता है।
हिंसा हर स्तर पर समाज को बाधित करती है। लैंगिक असमानता के कारण महिलाओं के प्रति दुर्व्यवहार अधिक होता है। लड़कियों और महिलाओं के लिए समानता में सुधार से हिंसा की घटना कम हो सकती है। वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन के अनुसार, लैंगिक समानता किसी भी देश की जीडीपी के लिए बेहतर स्थिति लाता है। लैंगिक समानता में सुधार होने से महिलाओं का मेंटल हेल्थ मजबूत होता है।
लैंगिक समानता से बच्चों, महिलाओं और पुरुषों सभी को सीधे तौर पर लाभ मिलता है। इससे स्त्री-पुरुष के बीच भेदभाव खत्म होता है। हालांकि दुनिया भर में लैंगिक समानता को वास्तविक रूप से लागू होने में अभी कुछ समय लगेगा। विश्व जनसंख्या दिवस का लक्ष्य भेदभाव और पुरानी मानसिकता को खत्म करना और लैंगिक समानता को बढ़ावा देना है।