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World Poetry Day 2026: दिनकर से बच्चन तक! क्या आपने पढ़ी हैं हिंदी की ये 5 सबसे बेहतरीन कविताएं?

Hindi Poetry: विश्व कविता दिवस के अवसर पर हिंदी साहित्य की उन कालजयी कविताओं को याद करना खास बन जाता है जिन्होंने पीढ़ियों तक लोगों के दिलों को छुआ है।

  • Written By: प्रीति शर्मा
Updated On: Mar 21, 2026 | 06:56 AM

किताब पढ़ते हुए कविताओं में खोई महिला (सौ. फ्रीपिक)

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World Poetry Day 2026: साहित्य समाज का दर्पण माना जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए हर साल 21 मार्च को विश्व कविता दिवस मनाया जाता है। ये दिन कविताओं को सम्मानित करने का है। इस दिन की शुरुआत साल 1999 में पेरिस में यूनेस्को के 30वें अधिवेशन से हुई थी।

कविता महज छंद और लय का मेल नहीं है यह वह दर्पण है जिसमें समाज अपनी तस्वीर देखता है। हिंदी साहित्य का आकाश ऐसे कई सितारों से भरा है जिनकी चमक सदियों बाद भी फीकी नहीं पड़ी। आज वर्ल्ड पोएट्री डे पर आइए याद करते हैं उन 5 महान रचनाओं को जिन्होंने इतिहास रच दिया।

रश्मिरथी (प्रथम सर्ग: भाग 1) — रामधारी सिंह ‘दिनकर’

‘जय हो’ जग में जले जहाँ भी, नमन पुनीत अनल को,
जिस नर में भी बसे, हमारा नमन तेज को, बल को।
किसी वृन्त पर खिले विपिन में, पर, नमस्य है फूल,
सुधी खोजते नहीं, गुणों का आदि, शक्ति का मूल।

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ऊँच-नीच का भेद न माने, वही श्रेष्ठ ज्ञानी है,
दया-धर्म जिसमें हो, सबसे वही पूज्य प्राणी है।
क्षत्रिय वही, भरी हो जिसमें निर्भयता की आग,
सबसे श्रेष्ठ वही ब्राह्मण है, हो जिसमें तप-त्याग।

तेजस्वी सम्मान खोजते नहीं गोत्र बतला के,
पाते हैं जग में प्रशस्ति अपना करतब दिखला के।
हीन मूल की ओर देख जग गलत कहे या ठीक,
वीर खींच कर ही रहते हैं इतिहासों में लीक।

जिसके पिता सूर्य थे, माता कुन्ती सती कुमारी,
उसका पलना हुआ धार पर बहती हुई पिटारी।
सूत-वंश में पला, चखा भी नहीं जननि का क्षीर,
निकला कर्ण सभी युवकों में तब भी अद्‌भुत वीर।

तन से समरशूर, मन से भावुक, स्वभाव से दानी,
जाति-गोत्र का नहीं, शील का, पौरुष का अभिमानी।
ज्ञान-ध्यान, शस्त्रास्त्र, शास्त्र का कर सम्यक् अभ्यास,
अपने गुण का किया कर्ण ने आप स्वयं सुविकास।

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मधुशाला — हरिवंश राय बच्चन

प्रियतम, तू मेरी हाला है, मैं तेरा प्यासा प्याला,
अपने को मुझमें भरकर तू बनता है पीनेवाला,
मैं तुझको छक छलका करता, मस्त मुझे पी तू होता,
एक दूसरे की हम दोनों आज परस्पर मधुशाला।।

भावुकता अंगूर लता से खींच कल्पना की हाला,
कवि साकी बनकर आया है भरकर कविता का प्याला,
कभी न कण-भर खाली होगा लाख पिएँ, दो लाख पिएँ!
पाठकगण हैं पीनेवाले, पुस्तक मेरी मधुशाला।।

मधुर भावनाओं की सुमधुर नित्य बनाता हूँ हाला,
भरता हूँ इस मधु से अपने अंतर का प्यासा प्याला,
उठा कल्पना के हाथों से स्वयं उसे पी जाता हूँ,
अपने ही में हूँ मैं साकी, पीनेवाला, मधुशाला।

राम की शक्ति पूजा (अंतिम पंक्तियाँ) — सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

“होगी जय, होगी जय, हे पुरुषोत्तम नवीन!

कह महाशक्ति राम के वदन में हुई लीन।

अन्याय जिधर, है उधर शक्ति!

कहते छलछल हो गये नयन, कुछ बूंद गिरे,

रुक गया कंठ, चमका न तेज, मन रहा मौन,

फिर खिंचा धनुष, पर टिकी दृष्टि, कर रहा कौन?”

अंधेरे में (अंश) — गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’

यह कविता आत्म-खोज और व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष की एक लंबी दास्तान है।

सूनी है राह, अजीब है फैलाव,
सर्द अँधेरा।

ढीली आँखों से देखते हैं विश्व
उदास तारे।

हर बार सोच और हर बार अफ़सोस
हर बार फ़िक्र

के कारण बढ़े हुए दर्द का मानो कि दूर वहाँ, दूर वहाँ
अँधियारा पीपल देता है पहरा।

हवाओं की निःसंग लहरों में काँपती
कुत्तों की दूर-दूर अलग-अलग आवाज़,

टकराती रहती सियारों की ध्वनि से।
काँपती हैं दूरियाँ, गूँजते हैं फ़ासले

5. असाध्य वीणा (अंश) — अज्ञेय

“आ गया प्रियंवद—केशकम्बली—गुफा-गेह।

आ गए प्रियंवद! केशकंबली! गुफा-गेह!
राजा ने आसन दिया। कहा :

‘कृतकृत्य हुआ मैं तात! पधारे आप।
भरोसा है अब मुझको

साध आज मेरे जीवन की पूरी होगी!’
लघु संकेत समझ राजा का

गण दौड़। लाए असाध्य वीणा,
साधक के आगे रख उसको, हट गए।

सभी की उत्सुक आँखें
एक बार वीणा को लख, टिक गईं

प्रियंवद के चेहरे पर।

World poetry day 2026 read these 5 best hindi poems from famous poets

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Published On: Mar 21, 2026 | 06:56 AM

Topics:  

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  • Lifestyle News
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