किसने आरंभ की थी नवरात्रि की पूजा, जानिए भगवान ब्रह्मा ने किसे कहा था चंडी देवी की पूजा करने के लिए
चैत्र नवरात्र का दौर चल रहा है क्या आपको पता है नवरात्रि की कैसे शुरुआत हुई, पुराणों के अनुसार सबसे पहले रावण के वध से पूर्व भगवान श्रीराम ने ऋष्यमूक पर्वत पर अश्विन प्रतिपदा से नवमी तक परम शक्ति मां दुर्गा की उपासना की थी।
- Written By: दीपिका पाल
कैसे हुई नवरात्रि की शुरुआत (डिजाइन फोटो)
सीमा कुमारी
नवभारत लाइफस्टाइल डेस्क: मां भगवती (Durga Maa) को समर्पित ‘चैत्र नवरात्रि’ (Chaitra Navratri 2024) का महापर्व चल रहा है। नवरात्र हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है। आपको बता दें, नवरात्रि के दौरान माता दुर्गा (Durga Maa) के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि में माता की पूजा-अर्चना करने का विधान सदियों से चला आ रहा है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि नवरात्रि की शुरुआत कब और कैसे हुई? सबसे पहले नवरात्रि में 9 दिनों तक व्रत किसने रखा। अगर नहीं तो, आइए जानें, नवरात्रि मनाने की शुरुआत कैसे हुई थी और सबसे पहले किसने नवरात्रि का व्रत किया था। आइए जान लीजिए इस बारे में-
श्री राम ने की थी भक्ति
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वाल्मीकि पुराण के अनुसार, रावण के वध से पूर्व भगवान श्रीराम ने ऋष्यमूक पर्वत पर अश्विन प्रतिपदा से नवमी तक परम शक्ति मां दुर्गा की उपासना की थी। इसके बाद दशमी के दिन उन्होंने किष्किंधा से लंका जाकर रावण का वध किया था। आध्यात्मिक बल की प्राप्ति, शत्रु पराजय व कामना पूर्ति के भगवान श्रीराम ने मां दुर्गा से आर्शीवाद लिया था।
ब्रह्मा जी के कहने पर किया था व्रत
शारदीय नवरात्रि की शुरुआत भगवान राम ने की थी। भगवान राम ने शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा की आराधना नौ दिनों तक बिना कुछ खाए-पीए की थी। यह व्रत करने की सलाह भगवान राम को ब्रह्मा जी ने दी थी। ब्रह्मा जी ने भगवान श्री राम से चंडी देवी का पूजन और व्रत कर प्रसन्न करने के लिए कहा और बताया कि चंडी पूजन और हवन के लिए दुर्लभ 108 नील कमल का होना जरूरी है।
रावण को जब पता चला कि भगवान श्रीराम चंडी पांठ कर रहे तो वह उसने श्री राम के हवन सामग्री में और पूजा स्थल में से एक नील कमल अपनी मायावी शक्ति से गायब कर दिया। भगवान श्रीराम तब इस बात से चिंतित हो गए की अब यह दुर्लभ नील कमल कहां से आएगा, लेकिन अचानक से ही उन्हें याद आया कि उन्हें कमल नयन नवकंज लोचन कहा जाता है। तो उन्होंने अपने नयन ही मां चंडी को चढ़ाने का संकल्प लिया।
मां चंडी ने दिया था रावण विजय का आशीर्वाद
प्रभु श्री राम तीर से अपने नयन को निकालने ही जा रहे थे कि माता चंडी उनके समक्ष प्रकट हुई और उन्हें ऐसा करने से रोक दिया और कहा कि वह उनकी पूजा से बेहद प्रसन्न हैं। उन्होंने भगवान राम को विजयश्री का आर्शीवाद देया।
हनुमान जी ने मंत्र बदलवा दिया था
दूसरी और रावण भी माता चंडी की यज्ञ कर रहा था। चंडी पाठ में यज्ञ कर रहे ब्राह्मणों में ब्राह्मण बालक के रूप में हनुमान जी भी मौजूद थे। निस्वार्थ भाव से सेवा कर रह रहे थे यह देख कर ब्राह्मण प्रसन्न हुए और उनसे वर मांगने के लिए कहा। हनुमान जी ने विनम्रतापूर्वक कहा कि आप मंत्र में एक मंत्र बदल दें। ब्राह्मण इस रहस्य को समझे और तथास्तु कह दिया। हनुमान जी ने कहा जया देवी भूर्ति हरणी में ‘क’ शब्द का प्रयोग करें। भूर्ति हरणी यानी की प्राणों की पीड़ा हरने वाली और भूर्ति करणी का अर्थ हो जाता है प्राणों पर पीड़ा करने वाली। ब्राह्मणों ने क शब्द का प्रयोग कर दिया और रावण का सर्वनाश हो गया।
