पिता की संपत्ति पर बेटी का क्या हक़ है, क्या प्रॉपर्टी पर दावा ठोक सकती हैं बेटियां, जानिए क्या बोलता है देश का कानून
भारतीय संविधान के हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम 2005 के मुताबिक, एक पिता की प्रॉपर्टी पर बेटियों का भी उतना ही हक और अधिकार होता है, जितना बेटों का होता है। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि बेटी कुंवारी है या शादीशुदा।
- Written By: सीमा कुमारी
बेटी के संपत्ति अधिकार क्या हैं..
Property rights of a woman as daughter:भले ही हम 21वीं सदी में रह रहे हैं, लेकिन सोच अभी भी पूरी तरह बदल नहीं पाई है। लोगों की आज भी सोच है कि पिता की जायदाद पर पहला हक बेटों का होता है। जबकि आपको बता दें, भारत में बेटियों के हक में कई कानून बने है। उसके बाद भी समाज में कई पुरानी परंपरा आज भी मौजूद है।
जानकारी के लिए बता दें, समाज का एक वर्ग आज भी भारत को पुरुष प्रधान देश ही मानता है। देश का एक आम परिवार भी सदियों पहले से चलती आ रही इस परंपरा को फॉलो कर रहा है। आमतौर पर एक सामान्य परिवार में देखने को मिलता है कि पिता की प्रॉपर्टी पर बेटों का ही हक होता है।
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सदियों से ऐसा ही देखने को मिल रहा है कि पिता की प्रॉपर्टी को बेटों के बीच ही बांटा जाता है जबकि बेटियों को पिता की प्रॉपर्टी में हिस्सा नहीं मिलता है। लेकिन देश का कानून इस परंपरा पर जरा-भी विश्वास नहीं करता है। आज हम यहां जानेंगे कि क्या शादीशुदा बेटियां अपने पिता की संपत्ति पर दावा ठोक सकती हैं।
पिता की प्रॉपर्टी पर बेटियों के हक को लेकर क्या है कानून
भारतीय संविधान के हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम 2005 के मुताबिक, एक पिता की प्रॉपर्टी पर बेटियों का भी उतना ही हक और अधिकार होता है, जितना बेटों का होता है। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि बेटी कुंवारी है या शादीशुदा।
इसका सीधा मतलब ये हुआ कि शादीशुदा बेटियां भी अपने पिता की प्रॉपर्टी पर बराबरी की हिस्सेदारी के लिए दावा ठोक सकती हैं। अगर किसी व्यक्ति का एक बेटा और एक बेटी है तो ऐसे में बेटी अपने पापा की आधी प्रॉपर्टी यानी प्रॉपर्टी में अपने भाई के बराबर की हिस्सेदारी के लिए दावा कर सकती है।
ऐसे मामले पिता की प्रॉपर्टी पर दावा नहीं कर सकती बेटियां
बता दें, कुछ मामले में जहां बेटी अपने पापा की प्रॉपर्टी पर दावा नहीं कर सकती है। कानून के हिसाब से अगर कोई व्यक्ति अपनी मृत्यु से पहले वसीयत में बेटी का नाम शामिल नहीं करता है तो ऐसी स्थिति में बेटी अपने पापा की प्रॉपर्टी पर दावा नहीं कर सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के मुताबिक हिंदू धर्म में पैदा होने वाली लड़की अपने जन्म के साथ ही अपने पापा की प्रॉपर्टी में बराबरी की हिस्सेदारी होती है। ये नियम हिंदू धर्म के साथ-साथ बौद्ध, सिख, जैन समाज के लिए भी लागू होता है।
