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सीमा कुमारी
नई दिल्ली: 19 सितंबर 2023, मंगलवार से ‘गणेश चतुर्थी’ (Ganesh Chaturthi 2023) का पावन पर्व शुरू हो रही है। इस तिथि से 10 दिनों तक गणेशोत्सव शुरु हो जाती है। जो ‘अनंत चतुर्दशी’, यानी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्षचतुर्दशी तिथि को गणेश विसर्जन तक चलता है। क्योंकि, मान्यता है कि इसी दिन गौरी पुत्र गणेश का जन्म हुआ था। यही कारण है कि, बप्पा के भक्तों को इस पावन दिन का पूरे साल इंतजार बना रहता है।
भगवान गणेश के नाम से ही शुभ कार्यों की शुरूआत होती है। इस मौके पर लोग अपने घरों में गणपति बप्पा की मूर्ति स्थापित करते हैं और पूरे 10 दिनों तक उनकी पूजा- अर्चना करते हैं। दसवें दिन अनंत चतुर्दशी पर गणपति की मूर्तियों का विसर्जन किया जाता है। अगर आप भी इस बार मूर्ति स्थापना की सोच रहे हैं, तो जान लें इसके कुछ जरूरी नियम। आइए जानें इस बारे में-
ज्योतिष-शास्त्र के अनुसार, भगवान गणेश जी की मूर्ति बिना मुकूट के अधूरी है, तो अगर आप इस बार मूर्ति स्थापना की सोच रहे हैं, तो वही मूर्ति घर ले आएं जिसमें गणपति बप्पा का सिर मुकूट से सजा हो। भगवान की ऐसी मूर्ति घर आगमन के साथ ही अच्छा भाग्य भी लेकर आती है।
गणपति भगवान को लाल रंग बहुत प्रिय है, तो गणेश चतुर्थी की पूजा लाल रंग के वस्त्र के पहनकर ही करें और गणपति बप्पा को भी पूजा में लाल रंग के फल, फूल चढ़ाएं।
कहते हैं, गणपति की पूजा में उनका प्रिय भोग मोदक और मोतीचूर का लड्डू जरूर चढ़ाएं। इससे मनचाहा फल मिलता है।
अगर आप ‘गणेश चतुर्थी’ पर घर में गणपति बिठा रहे हैं, तो रोजाना समय पर उनकी पूजा व आरती करें। दिन में 3 बार भगवान को भोग लगाएं।
गणपति बप्पा को लाल चुनरी या कोई लाल कपड़ा ओढ़ाकर घर में लेकर आएं।
गणपति बप्पा की मूर्ति बाजार से खरीद रहे हैं या घर में बना रहे हैं, ध्यान रखें कि भगवान गद्दी पर बैठे हुए हों। इसके साथ ही मूर्ति में उनका वाहन मूषक यानि चूहा भी होना चाहिए और कुछ मोदक भी। ये सारी चीज़ें घर में पॉजिटिव एनर्जी लेकर आती हैं।
गणपति बप्पा की मूर्ति की पूर्व दिशा में कलश रखें और दक्षिण पूर्व में दीया जलाएं।