सीमा कुमारी
नई दिल्ली: सावन ‘अधिक मास की पूर्णिमा’ (Adhik Maas Purnima 2023) इस साल 1 अगस्त 2023, मंगलवार को लग रही है। सावन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर अधिक पूर्णिमा व्रत रखने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान और दान का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु इस दिन जप तप और दान करते हैं उन्हें अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
इस बार अधिक पूर्णिमा व्रत के दिन मंगला गौरी व्रत का भी अद्भुत संयोग बन रहा है। जिस वजह से साधकों को भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना का सौभाग्य प्राप्त होगा। इस दिन किए गए कुछ विशेष उपायों से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाएंगी। आइए जानें श्रावण अधिक पूर्णिमा व्रत तिथि और कुछ विशेष उपाय।
पंचांग के अनुसार, श्रावण अधिक शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 1 अगस्त को सुबह 03:51 बजे से शुरू होगी और 2 अगस्त को मध्य रात्रि 12:00 बजे शाम तक समाप्त हो जाएगी। ऐसे में श्रावण अधिक पूर्णिमा व्रत 1 अगस्त 2023, मंगलवार के दिन रखा जाएगा। इस विशेष दिन पर मंगला गौरी व्रत भी रखा जाएगा।
ज्योतिष-शास्त्र के अनुसार, यदि आप चाहते हैं कि, आपके जीवन में सुख समृद्धि और खुशियां बनी रहे, तो उसके लिए श्रावण अधिक मास की पूर्णिमा तिथि पर व्रत करें और पीपल के वृक्ष में जल चढ़ा कर घी का दीपक जरूर जलाएं।
अधिक पूर्णिमा के दिन मंगला गौरी व्रत भी रखा जाएगा। इसलिए इस विशेष दिन पर माता गौरी और भगवान शिव की विधिवत उपासना करें और किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को लाल मसूर की दाल, लाल कपड़ा, लाल फल, धन इत्यादि का दान करें।
ज्योतिषियों के अनुसार, विवाह में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए पूर्णिमा तिथि के दिन माता गौरी को 16 श्रृंगार अर्पित करें और उनकी विधिवत उपासना करें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूर्णिमा व्रत में भगवान विष्णु और देवी तुलसी की आराधना का महत्व माना गया है। इस दिन विष्णुसहस्रनाम स्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए।
जिन लोगों के दांपत्य जीवन में समस्या आ रही है उन्हें पूर्णिमा के दिन चंद्रमा को दूध से अर्घ्य देना चाहिए। इस उपाय से दांपत्य जीवन में मिठास घुल जाती है और पति पत्नी के बीच मधुरता बढ़ जाती है।