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आज है संत रविदास जयंती, जानिए उनके अनमोल विचार

संत रविदास जी के द्वारा कहा गया कथन 'मन चंगा तो कठौती में गंगा' सबसे ज्यादा प्रचलित है। जिसका अर्थ है कि अगर मन पवित्र है और जो अपना कार्य करते हुए, ईश्वर की भक्ति में तल्लीन रहते हैं उनके लिए उससे बढ़कर कोई तीर्थ नहीं..

  • Written By: नवभारत स्टाफ
Updated On: Feb 12, 2025 | 09:00 AM
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सीमा कुमारी

नई दिल्ली: हर वर्ष माघ महीने की पूर्णिमा तिथि पर ‘संत रविदास’ (Sant Guru Ravidas Jayanti) की जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष यह जयंती आज यानी 5 फरवरी, रविवार के दिन मनाई जा रही। यह जयंती खासकर ‘गुरु संत रविदास’ के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। गुरु रविदास 15वीं सदी के महान संत, दार्शनिक, कवि, समाज सुधारक और ईश्वर के अनुयायी थे।

संत रविदास को रैदासजी के नाम से भी जाना जाता है। इनके माता-पिता एक चर्मकार थे। संत रविदास जी बहुत ही धार्मिक स्वभाव के व्यक्ति थे। इन्होंने आजीविका के लिए अपने पैतृक कार्य को अपनाते हुए हमेशा भगवान की भक्ति में हमेशा ही लीन रहा करते थे। संत रविदास जी, जिन्होंने भगवान की भक्ति में समर्पित होने के साथ अपने सामाजिक और पारिवारिक कर्तव्यों का भी बखूबी निर्वहन किया। इन्होंने आपस में प्रेम करने की शिक्षा दी और इसी तरह से वे भक्ति के मार्ग पर चलकर संत रविदास कहलाए। उनकी शिक्षाएं आज भी प्रेरणादायक हैं। आइए जानें संत रविदास जयंती के अवसर उनके अनमोल विचार

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संत रविदास के अनमोल विचार

संत रविदास जी के द्वारा कहा गया कथन ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ सबसे ज्यादा प्रचलित है। जिसका अर्थ है कि अगर मन पवित्र है और जो अपना कार्य करते हुए, ईश्वर की भक्ति में तल्लीन रहते हैं उनके लिए उससे बढ़कर कोई तीर्थ नहीं है।

संत रविदास जी के अनुसार किसी भी व्यक्ति के ऊंच-नीच का आकलन जाति से नहीं किया जाना चाहिए। व्यक्ति के कर्म ही ऊंच-नीच के विषय में बताते हैं।

रविदास जी ने बताया है कि ईश्वर की भक्ति करने का मौका बड़े ही भाग्य से मिलता है। व्यक्ति के मन में यदि कोई अभिमान नहीं हो तो उसका जीवन सदैव सफल रहता है।

गुरु रविदास जी कहते हैं कि ज्यादा धन का संचय, अनैतिकता पूर्वक व्यवहार करना और दुराचार करना गलत बताया है। इसके अलावा अंधविश्वास, भेदभाद और छोटी मानसिकता के घोर विरोधी थे।  और कभी भी अपने अंदर अभिमान को जन्म न लेने दें। इस छोटी सी चींटी शक्कर के दानों को उठा सकती है परंतु एक हाथी इतना विशालकाय और ताकतवर होने के बाद भी ऐसा नहीं कर सकता।

रविदास जन्म के कारनै, होत न कोउ नीच।

नकर कूं नीच करि डारी है, ओछे करम की कीच।।

इसका अर्थ है कि ‘कोई भी व्यक्ति छोटा या बड़ा अपने जन्म के कारण नहीं बल्कि अपने कर्म के कारण होता है। व्यक्ति के कर्म ही उसे ऊंचा या नीचा बनाते हैं। संत रविदास जी सभी को एक समान भाव से रहने की शिक्षा देते थे।

Today is sant ravidas jayanti know his priceless thoughts

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Published On: Feb 05, 2023 | 06:00 AM

Topics:  

  • Ravidas Jayanti

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