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-सीमा कुमारी
हिन्दू धर्म में ‘पूर्णिमा’ (Purnima) तिथि का विशेष महत्व होता है। इस साल माघ महीने की पूर्णिमा’ यानी ‘माघ पूर्णिमा’ (Magh Purnima) 16 फरवरी, अगले बुधवार को है। धार्मिक मान्यता है कि, ‘माघ पूर्णिमा’ के दिन पूजा, जप, तप और दान करने से जातक के जीवन में सुख और समृद्धि का आगमन होता है। साथ ही जातक को मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति है। आइए, ‘माघी पूर्णिमा’ की तिथि और पूजा-विधि के बारे जानें –
पंचांग के अनुसार, ‘माघ पूर्णिमा’ तिथि 16 फरवरी को सुबह 9 बजकर 42 मिनट से शुरू होकर 16 फरवरी को रात में 10 बजकर 55 मिनट पर समाप्त होगी। साधक प्रातःकाल गंगा समेत पवित्र नदियों और सरोवरों में आस्था की डुबकी लगाकर तिलांजलि कर सकते हैं।
ज्योतिष -शास्त्र के अनुसार, ‘माघी पूर्णिमा’ (Magh Purnima) का पावन दिन पितरों के निमित्त तर्पण और श्राद्ध करना शुभ एवं मनवांछित फल प्रदान करने माना गया हैं। इसके अलावा, इस दिन पितरों के निमित्त जल दान, अन्न दान, भूमि दान और वस्त्र दान करने से पितर प्रसन्न होते हैं और कष्टों से मुक्ति भी मिलती है। साथ ही, इस दिन जरूरतमंद के बीच कंबल, कपास, घी, गुड़, तिल, वस्त्र, भोजन सामग्री और जूते-चप्पल आदि का दान करना बेहद शुभ माना जाता है।
‘माघी पूर्णिमा’ के दिन पवित्र नदियों में स्नान के बाद दान करने से मनोकामना पूरी होती है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु गंगाजल में निवास करते हैं। इसलिए इस दिन गंगाजल से स्नान करना पुण्य-फलदायी होता है।