आज है पौष महीने की ‘कालाष्टमी’? जानें सही डेट और इसकी महिमा
- Written By: मृणाल पाठक
-सीमा कुमारी
भगवान भैरव को समर्पित’कालाष्टमी’का पावन पर्व इस साल 27 दिसंबर, दिन सोमवार को है। हर महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को ‘कालाष्टमी’ का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान भैरव शंकर भगवान के अवतार हैं। कालाष्टमी को भैरवाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन विधि- विधान से भैरव भगवान की पूजा- अर्चना की जाती है। भगवान भैरव की पूजा करने से भय से मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं कालाष्टमी की तिथि, मुहूर्त और पूजन विधि
शुभ- मुहूर्त
कालाष्टमी या भैरवाष्टमी का पूजन पौष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को किया जाएगा। पंचांग गणना के अनुसार अष्टमी की तिथि 26 दिसंबर को रात्रि 08 बजकर 08 मिनट पर शुरू होगी। जो कि 27 दिसंबर को शाम 07 बजकर 28 मिनट पर समाप्त हो रही है। उदया तिथि और प्रदोष काल 27 दिसंबर को पड़ने के कारण अष्टमी तिथि इसी दिन मान्य होगी। कालाष्टमी का पूजन भी 27 दिसंबर, दिन सोमवार को किया जाएगा। कालभैरव का पूजन प्रदोष काल में करना सबसे लाभदायक माना जाता है।
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पूजा- विधि
- इस पावन दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं।
- अगर संभव हो तो इस दिन व्रत रखें।
- घर के मंदिर में दीपक प्रज्वलित करें।
- इस समय कोरोना वायरस की वजह से बाहर जाना सुरक्षित नहीं है, इसलिए घर में रहकर ही भगवान भैरव की पूजा- अर्चना करें।
- इस दिन भगवान शंकर की भी विधि- विधान से पूजा- अर्चना करें।
- भगवान शंकर के साथ माता पार्वती और गणेश भगवान की पूजा- अर्चना भी करें।
- आरती करें और भगवान को भोग भी लगाएं। इस बात का ध्यान रखें भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है।
महत्व
इस पावन दिन भगवान भैरव की पूजा करने से सभी तरह के भय से मुक्ति मिल जाती है। कालाष्टमी के दिन व्रत करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। भैरव बाबा की कृपा से शत्रुओं से छुटकारा मिल जाता है।
