आज है ‘गुरु रविदास जयंती’, जानिए माघ पूर्णिमा से क्या है संबंध
रैदास जी के ने अपनी रचना में प्रभु का गुणगान किया है। साथ ही भाषा को सरल और सहज रखा है। आम जनमानस के मुख पर रैदास जी की रचना रहती है। संत रविदास जी ने कविता के जरिए अपने जीवन की घटनाओं को लोगों के सामने प्रस्तुत किया है।
- Written By: नवभारत डेस्क
संत रविदास जयंती (सौ.सोशल मीडिया)
-सीमा कुमारी
‘संत रविदास जयंती’ (Sant Ravidas Jayanti) हर साल माघ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। इस वर्ष यह जयंती 16 फरवरी, बुधवार को है।
इतिहासकारों के अनुसार, भारत देश में कई महान संत और कवि हुए हैं। लेकिन, संत रविदास उन महापुरुषों में से ही एक हैं, जिन्होंने अपने आध्यात्मिक वचनों से सारे संसार को आत्मज्ञान, एकता और भाईचारे का सन्देश दिया। संत रविदास से प्रभावित होकर ही कई लोग भक्ति के मार्ग से जुड़े। रविदास के अनुयायी आज भी उनके द्वारा बताए गए उपदेशों का आचरण करते हैं और उनकी जयंती बड़ी धूम-धाम से मनाते हैं। आइए जानें इस साल ‘संत रविदास जयंती’ कब है और कौन थे संत रविदास-
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Ravidas Jayanti: ‘रविदास जयंती’ के दिन क्या करें क्या नहीं, और जानिए इस विशेष दिन का महत्व
इस साल ‘संत रविदास जयंती’ 16 फरवरी 2022, बुधवार को मनाई जायेगी। पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 15 फरवरी 2022 को रात 09 बजकर 40 मिनट पर होगी। पूर्णिमा तिथि की समाप्ति इसके अगले दिन 16 फरवरी 2022 को रात 10 बजकर 30 मिनट पर होगी।
कौन थे संत रविदास?
कई इतिहासकारों का कहना है कि, संत रविदास का जन्म सन 1398 में हुआ। वहीं, कुछ जानकारों का कहना है कि, उनका जन्म सन 1482 में हुआ था। संत रविदास का जन्म एक चर्मकार परिवार में हुआ था। इनके पिताजी का नाम रघु और माताजी का नाम घुरविनिया था।
बाल्यकाल से संत रविदास हर एक कार्य को लगन और ध्यान से करते थे। पिताजी के कार्यों में हमेशा हाथ बंटाते थे। उनकी मधुर वाणी और व्यवहार पर हर कोई प्रसन्न रहते थे। संत रविदास जी ने समाज में व्याप्त भेदभाव से उठकर कार्य करने का प्रयत्न किया। इन्होंने भक्ति और साधना कर प्रभु की पूजा की।
वे संत, कवि और भगवान भक्त थे। इनकी रचना में भक्ति की भावना और आत्म निवेदन पाई जाती है। संत रविदास जी ने लोगों को ईश्वर को प्राप्त करने के लिए भक्ति मार्ग का चयन करने की सलाह दी। स्वंय भक्ति के मार्ग पर चलकर संत रविदास जी ने ईश्वर और दिव्य ज्ञान की प्राप्ति की। इनकी रचना बेहद प्रमुख हैं। आज भी भजन-कीर्तन के समय रैदास जी की रचना गाई जाती है।
” प्रभुजी तुम चंदन हम पानी
जाकी अंग अंग वास समानी”
रैदास जी के ने अपनी रचना में प्रभु का गुणगान किया है। साथ ही भाषा को सरल और सहज रखा है। आम जनमानस के मुख पर रैदास जी की रचना रहती है। संत रविदास जी ने कविता के जरिए अपने जीवन की घटनाओं को लोगों के सामने प्रस्तुत किया है।
