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आज है ‘गुरू नानक जयंती’, जानिए गुरू पूरब का इतिहास

  • Written By: नवभारत डेस्क
Updated On: Nov 08, 2022 | 06:45 AM

PIC: Twitter

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-सीमा कुमारी

हर साल कार्तिक महीने की पूर्णिमा तिथि को ‘गुरु नानक जयंती’ (Guru Nanak Jayanti) मनाई जाती है। इस साल ये जयंती 8 नवंबर को मनाया जाएगा। सिख धर्म के अनुयायियों के लिए यह जयंती बेहद खास होती है। इसी कारण इसे गुरु पूरब या प्रकाश पर्व के नाम से भी जाना जाता है। क्योंकि, इस दिन  गुरु नानक देव का जन्म हुआ था। साल 1469 में कार्तिक पूर्णिमा के दिन उनका जन्म हुआ था। इसी कारण इस दिन देश-विदेश के कोने-कोने में विभिन्न कार्यक्रम के साथ-साथ कीर्तन का आयोजन किया जाता है। आइए जानिए गुरु नानक जयंती का इतिहास और तिथि।

तिथि

  • इस साल गुरु नानक जयंती 8 नवंबर 2022 को मनाई जा रही है। बता दें कि इस साल गुरु नानक का 553वां जन्मोत्सव मनाया जा रहा है।
  • कार्तिक पूर्णिमा 2022 शुभ मुहूर्त
  • कार्तिक पूर्णिमा आरंभ- 07 नवंबर सोमवार को शाम 04 बजकर 15 मिनट से शुरू
  • कार्तिक पूर्णिमा तिथि समाप्त- 8 नवंबर मंगलवार को शाम 4 बजकर 31 मिनट तक

इतिहास

जानकारों का मानना है कि, गुरू नानक सिख धर्म के पहले गुरू हैं। 15 अप्रैल 1469 को गुरु नानक देव का जन्म तलवंडी ननकाना साहिब में हुआ था। इसी के कारण इन्हें नानक नाम से संबोधित किया जाता है। माना जाता है कि गुरु नानक देव ने ही सिख समाज की नींव रखी थी। इसी कारण उन्हें संस्थापक कहा जाता है।

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16 साल की उम्र में गुरु नानक देव का विवाह लाखौकी नामक स्थान में रहने वाली सुलखनी नामक कन्या से हुआ था। इनके दो पुत्र श्रीचंद और लख्मीचंद थे। माना जाता है कि पुत्रों के जन्म के बाद गुरु नानक देव अपने साथियों के साथ तीर्थ में निकल गए और भारत, अफगानिस्तान, फारस, अरब सहित कई देशों में भ्रमण करते हुए उपदेश देते थे। इन यात्राओं को पंजाबी में ‘उदासियां’ कहा जाता है।

ऐसे मनाते हैं ‘गुरुनानक जयंती’

  • गुरुनानक जयंती पर अनेक उत्सव आयोजित होते हैं, इसे एक पर्व के रूप में मनाया जाता है।
  • इस पावन अवसर पर तीन दिन का अखण्ड पाठ चलता है।
  • सिक्खों की धर्म पुस्तक ‘गुरु ग्रंथ साहिब’ का पूरा पाठ बिना रुके किया जाता है।  
  • मुख्य कार्यक्रम के दिन गुरु ग्रंथ साहिब को फूलों से सजाया जाता है।
  • एक पालकी पर गुरु ग्रंथ साहिब को रखकर जुलूस के रूप में पूरे गांव या नगर में घुमाया जाता है। इस शोभायात्रा का ‘पंज प्यारे’ प्रतिनिधित्व करते हैं।  
  • निशान साहब, अथवा उनके तत्व को प्रस्तुत करने वाला सिक्ख ध्वज भी साथ में चलता है। 
  • पूरी शोभायात्रा के दौरान गुरुवाणी का पाठ किया जाता है।

Today is guru nanak jayanti know the history of guru purab

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Published On: Nov 08, 2022 | 06:45 AM

Topics:  

  • Guru Purab

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