

Sustainable Second-Hand Fashion: फैशन की दुनिया में हर दिन कुछ नया देखने को मिलता है, लेकिन आज के युवा सस्टेनेबल फैशन को तवज्जो दे रहे हैं। पर्यावरण का ख्याल रखते हुए फैशन चॉइस बनाना आजकल भारत में पॉपुलर हो रहा है। लोगों का ध्यान पुराने और इस्तेमाल किए जा चुके कपड़ों की ओर भी बढ़ रहा है। इसे थ्रिफ्टिंग कहा जाता है।
भारत में इस ट्रेंड को लेकर लोगों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ी है और अब लोग कम कीमत में अलग और स्टाइलिश कपड़े तलाश रहे हैं। इसी विषय पर अक्षय कुमार का एक रियलिटी शो भी इन दिनों चर्चा में है।
थ्रिफ्टिंग का मतलब पहले इस्तेमाल किए जा चुके कपड़े, जूते, बैग या दूसरी चीजें खरीदना है। जरूरी नहीं कि ये चीजें बहुत पुरानी या खराब हों। कई बार लगभग नए और बहुत कम इस्तेमाल किए गए कपड़े भी थ्रिफ्ट स्टोर पर मिलते हैं। इसका उद्देश्य सस्टेनेबल फैशन को बढ़ावा देना है।
थ्रिफ्टिंग में सिर्फ डेली यूज के कपड़े ही नहीं मिलते। पुरानी डिजाइन की साड़ियां, जैकेट, जींस, टॉप, जूते और बैग भी लोगों को पसंद आ रहे हैं। खासतौर पर विंटेज कलेक्शन की साड़ियां और पुराने दौर के डिजाइन वाले कपड़े उन लोगों के लिए अट्रैक्शन है, जो अपने पहनावे में पुराने दौर की चीजों को शामिल करना चाहते हैं।
थ्रिफ्टिंग के लोकप्रिय होने की एक बड़ी वजह है- अलग तरह का फैशन। यहां ऐसे कपड़े मिल सकते हैं जो आम दुकानों पर आसानी से नहीं दिखते। इसके अलावा कम कीमत और पुराने कपड़ों को दोबारा इस्तेमाल करने की सोच भी लोगों को इस ओर खींच रही है। आज के युवाओं के बीच पर्यावरण को लेकर बढ़ती जागरूकता भी इस चलन की एक वजह है। पुराने कपड़ों को दोबारा इस्तेमाल करने से नए कपड़े खरीदने की जरूरत कम हो जाती है, इससे पर्यावरण को सपोर्ट मिलता है।
थ्रिफ्ट कपड़े खरीदते समय सिर्फ उनका डिजाइन देखकर फैसला न करें। कपड़े की सिलाई, कपड़े की गुणवत्ता, दाग, फटे हिस्से, जिप और बटन अच्छी तरह जांच लें।
यदि आप ऑनलाइन थ्रिफ्ट शॉपिंग कर रहे हैं, तो बेचने वाले की रेटिंग, तस्वीरें और रिटर्न पॉलिसी जरूर चेक कर लें।
कपड़े लाने के बाद उन्हें पहनने से पहले अच्छी तरह वॉश जरूर करें।