– सीमा कुमारी
‘बोहाग बिहू’ (Bohag Bihu) असम का एक लोकप्रिय त्योहार है। यह त्योहार साल में तीन बार मनाया जाता है। जनवरी महीने के मध्य में ‘भोगाली बिहू’ मनाया जाता है। इसे ‘माघ बिहू’ भी कहते है। अप्रैल के मध्य में ‘बोहाग बिहू’ (Bohag Bihu) मनाया जाता है, जो ‘रोंगाली बिहू’ या ‘हत बिहू’ के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा, तीसरी बार अक्टूबर के मध्य में मनाया जाता है। लेकिन ‘बोहाग बिहू’ से असम में नए साल की शुरुआत होती है। ये पर्व मुख्य रूप से किसान भाइयों को समर्पित है। इस साल भी यह ख़ास पर्व 14 अप्रैल से शुरू हो चुका है। यह त्योहार एक हफ्ते तक मनाया जाता है। आइए जानें असम के महापर्व के बारे में –
‘बोहाग बिहू’ त्यौहार के साथ ही असम के लोग नए साल की शुरुआत मानते हैं। यही वजह है कि इस दिन लोग पारंपरिक परिधान में पूरे जोश खरोश के साथ असम का पारंपरिक नृत्य ‘बिहू’ करते हैं। माघ बिहू अमूमन किसानों का त्यौहार माना जाता हैं। इस दिन किसान खेतों से फसलों की कटाई करते हैं और प्रकृति और ईश्वर से भविष्य में भी अच्छी पैदावार की कामना करते हुए धन्यवाद अदा करते हैं।
बिहू का दूसरा महत्व है कि इसी समय धरती पर वर्षा की पहली बूंदें पड़ती हैं जिससे पृथ्वी नए रूप से सजती है। इस दौरान नई फसल आने की तैयारी होती है। बिहू के अवसर पर युवक एवं युवतियां साथ-साथ ढोल, बांसुरी, पेपा, गगना, ताल इत्यादि के साथ अपने पारंपरिक परिधान में एक साथ बिहू करते हैं। कहा जाता है कि ढोल की आवाज से आसमान में बादल आ जाते हैं जिससे बारिश शुरू हो जाती है जिससे खेती अच्छी होती है। बिहू के समय में गांव में खेल-तमाशों का आयोजन किया जाता है।