भगवान राम के इन चार गुणों को अपनाने वाले के कदम चूमेगी सफलता, बस चाहिए दृढ़ संकल्प
- Written By: नवभारत डेस्क
सीमा कुमारी
नई दिल्ली: सनातन धर्म में हर साल चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी के दिन भगवान श्री राम (Lord Ram) का जन्मोत्सव मनाया जाता है। श्री राम के जन्मोत्सव की खुशी में मनाई जाने वाली रामनवमी हिंदू समाज में अपना विशेष महत्व रखती है। भगवान विष्णु के अवतार श्री राम की पूजा हिंदू संस्कृति में बड़ी धूमधाम से करने का विधान है। इस दिन भारत के घर घर में भगवान राम की पूजा और श्री राम की महिमा का वर्णन किया जाता है। साथ ही घर के हर सदस्य से आशा की जाती है कि उनका आचरण श्री राम की तरह पवित्र हो। ज्योतिष शास्त्र में भी इस बात का उल्लेख मिलता है कि जिस मनुष्य का आचरण भगवान श्री राम की तरह होता है। उसे जीवन के हर पथ पर सफलता मिलती है।
आइए जानें रामनवमी (Ram Navami) के पावन पर्व पर भगवान श्री राम के जीवनकाल से जुड़े उन तमाम प्रसंग और गुणों के बारे में जिनके कारण उन्हें हम मर्यादा पुरुषोत्तम राम कहकर बुलाते है।
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- पिता दशरथ और माता कैकेयी के द्वारा 14 वर्ष का वनवास दिए जाने पर श्री राम ने माता-पिता की आज्ञा का पालन किया। साथ ही भगवान राम को पता था कि मेरे पिता वचन के आगे मजबूर हैं इसलिए उन्हें उनकी आज्ञा का पालन करना ही होगा इसलिए राम ने वनवास का रास्ता चुन लिया।
- किसी भी मुश्किल परिस्थिति में भगवान राम ने अपना धैर्य नहीं खोया है। उन्होंने हर परेशानी में धैर्य से काम लिया है इसलिए हमें भगवान राम जी तरह जीवन की हर तकलीफ में शांति से कार्य करना चाहिए।
- गुरु का स्थान किसी भी व्यक्ति के जीवन में सबसे बड़ा होता है। गुरु के ज्ञान से ही हम जीवन में सफलता प्राप्त कर पाते हैं परन्तु आज का युवा गुरु की आज्ञा का पालन नहीं करता है और बिना मार्गदर्शन के गलत राह पर चलने लगता है। भगवान श्री राम जी ने हमेशा अपने गुरु वशिष्ट की आज्ञा का पालन किया है। हमें उनके चरित्र से गुरु भक्ति सीखनी चाहिए।
- भगवान श्री राम जी ने कभी भी नियति को बदलने की कोशिश नही की,जो नियति में लिखा हुआ है हमें वह स्वीकार करना चाहिए क्योंकि नियति से कोई भी नही लड़ सकता है।
- रामायण में भगवान श्रीराम को भगवान विष्णु का अवतार बताया गया है जो स्वयं भगवान के गुणों से ओतप्रोत है। आज समाज के लोगों के आचरण में जो मिलावट आई है ऐसे में भगवान राम के आचरण से हमें पवित्रता की सीख लेनी चाहिए।
