क्या होता है सोशल मीडिया डिटॉक्स, क्या आपको भी है इसकी जरूरत?
डिजिटल डिटॉक्स की चर्चा आजकल बड़ी तेजी से हो रही है। इसका मतलब क्या होता है, इसकी जरूरत क्यों पड़ती है, इसके क्या फायदे हैं, कितने दिन का डिजिटल डिटॉक्स किया जाना चाहिए, इन सब की जानकारी इस लेख में है।
- Written By: अनिल सिंह
कॉन्सेप्ट फोटो
मुंबई: डिजिटल डिटॉक्स की बात आजकल हर कोई कर रहा है। क्योंकि सोशल मीडिया पर लोग अधिक से अधिक वक्त बिताने लगे हैं, जिसकी वजह से उनके दिमाग पर असर पड़ रहा है, स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। ऐसे में लोगों ने सोशल मीडिया से दूरी बनाने की शुरुआत की और इसी को आसान भाषा में डिजिटल डिटॉक्स कहा जाता है। आप अगर सोशल मीडिया पर दिन भर में 5 घंटे से ज्यादा बिता रहे हैं। मतलब आपको भी डिजिटल डिटॉक्स की जरूरत है।
ऐसे तो पूरे महीने भर में एक हफ्ता डिजिटल डिटॉक्स किया जाना चाहिए, लेकिन लोग ऐसा कर नहीं पाते, इसके लिए लोग 2-4-6 महीने में एक बार या दो बार कुछ दिनों के लिए सोशल मीडिया पर अपनी एक्टिविटी बंद कर देते हैं। जिससे उनके बर्ताव में और उनके स्वास्थ्य में सुधार भी देखने को मिलता है। यह डिजिटल डिटॉक्स का एक लोकप्रिय रूप है। सोशल मीडिया डिटॉक्स से मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है और आपका समय आपको वापस मिलता है। आइए जानते हैं डिजिटल डिटॉक्स के क्या फायदे हैं।
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सोशल मीडिया डिटॉक्स के कुछ फायदे
इससे तनाव, चिंता, और अवसाद कम होता है।
इससे नींद बेहतर होती है।
इससे फ़ोकस करने में मदद मिलती है।
इससे दूसरों से ज़्यादा समय बिताने और रिश्तों को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
इससे आत्म-सम्मान बढ़ता है।
इससे उत्पादकता और रचनात्मकता बढ़ती है।
इससे शारीरिक स्वास्थ्य भी बेहतर होता है।
सोशल मीडिया डिटॉक्स के लिए ये तरीके अपनाए जा सकते हैं
सोशल मीडिया ऐप्स के नोटिफ़िकेशन बंद कर दें।
अपने फ़ोन को चेक करने के लिए समय अंतराल तय करें।
भोजन के समय फ़ोन को दूर रखें।
फ़ोन को किसी दूसरे कमरे में रखें।
ऐसा समय तय करें जब फ़ोन का इस्तेमाल न करें।
अपनी लॉक स्क्रीन बदलें।
सोशल मीडिया ऑडिट करें और पता करें कि आप ऐप्स पर कितना समय बिताते हैं।
इस समय को किसी और चीज़ में लगाएं।
सोशल मीडिया पर अगर आप हद से ज्यादा वक्त बिता रहे हैं, तो आपको डिजिटल डिटॉक्स की जरूरत है। इसे नजरअंदाज करना आपके मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
