हिंदी दिवस पर अपनों को साझा करें 10 महान विभूतियों के प्रेरणादायक विचार, दिलाते हैं भाषा को सम्मान
Hindi Motivational Quote : हिंदी की ताकत और महत्व को बताने के लिए महान विभूतियों ने हिंदी को पहचान दिलाने का प्रयास किया। किसी ने हिंदी में दमदार कविताएं लिखीं तो किसी ने हिंदी पर प्रभावी भाषण दिए।
- Written By: दीपिका पाल
हिंदी दिवस पर महान कवियों की कविताएं (सौ. डिजाइन फोटो)
Hindi Diwas 2025: हिंदी, हमारे देश की शान है तो वहीं पर इसकी दुनियाभर में अलग पहचान है। मातृभाषा कहें या मां द्वारा सिखाई गई भाषा, हिंदी हर पैमाने पर एक अलग ही गर्व महसूस कराती है। हिंदी है हम, हिंदी है हम वतन के, यह गीत के बोल आपने सुना होगा। यह हिंदी को अलग ही सम्मान दिलाता है। जैसा कि, हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है यह दिन हिंदी को अलग-अलग स्तर पर पहचान दिलाती है।
हम देश के किसी भी कोने में पहुंच जाएं हिंदी को मां की तरह महसूस कर पाएंगे। हिंदी, सिर्फ भाषा नहीं है बल्कि यह भारतीय संस्कृति की अनोखी धरोहर जिसे संजोकर रखना जरूरी है।
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महान कवियों ने बखान किए हिंदी की विशेषता
भारतीय साहित्य में कई महान कवियों के नाम शामिल है जिन्होंने अपने काव्य रचनाओं से हिंदी की विशेषता का बखान किया है। हिंदी की ताकत और महत्व को बताने के लिए महान विभूतियों ने हिंदी को पहचान दिलाने का प्रयास किया। किसी ने हिंदी में दमदार कविताएं लिखीं तो किसी ने हिंदी पर प्रभावी भाषण दिए। अटल बिहारी वाजपेई की भाषण शैली इसलिए भी प्रभावी थी, क्योंकि वह हिंदी थी। हिंदी को लेकर महात्मा गांधी ने भी जन आंदोलन किया। हिंदी की कविताओं या रचनाओं में वह भाव होते है जो भाषा का मान बढ़ाते है।
इन महान विभूतियों ने रची हिंदी पर रचनाएं
- हिंदी उन सभी गुणों से अलंकृत है, जिनके बल पर वह विश्व की साहित्यिक भाषा की अगली श्रेणी में समासीन हो सकती है। – मैथिलीशरण गुप्त
- निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।- भारतेंदु हरिश्चंद्र
- हिंदी हमारी आन-बान-शान –अंकित शुक्ला
- राष्ट्रीय एकता की कड़ी हिंदी ही जोड़ सकती है।-बालकृष्ण शर्मा नवीन
- मैं दुनिया की सभी भाषाओं की इज्जत करता हूं, पर मेरे देश में हिंदी की इज्जत न हो, ये मैं सह नहीं सकता।-आचार्य विनोबा भावे
- हिंदी का अलग ही रंग है।- डॉ. ओम निश्चल
- जिस देश को अपनी भाषा और साहित्य पर गर्व का अनुभव नहीं है, वह उन्नत नहीं हो सकता।-डॉ. राजेंद्र प्रसाद
- हिंदी पढ़ना और पढ़ाना हमारा कर्तव्य है। उसे हम सबको अपनाना है।- लाल बहादुर शास्त्री
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