

Pregnancy In Digital Age : आजकल की प्रेग्नेंसी और 20-30 साल पहले की प्रेग्नेंसी काफी फर्क है। पहले, ज्यादातर महिलाओं को उनकी माँ, दादी-नानी, पड़ोसियों और डॉक्टरों से सलाह मिलती थी। आज, जब कोई प्रेग्नेंसी टेस्ट करवाता है, तो वह सबसे आखिर में परिवार के सदस्यों से बात करता है।
जिससे सबसे पहले बात किया जाता है, वो गूगल (Google) है और Google के पास कहने के लिए बहुत कुछ है। हम बस एक लक्षण टाइप करते हैं और उससे संबंधित दस आर्टिकल, पाँच YouTube वीडियो, तीन Reddit डिस्कशन और दो Instagram रील्स सामने आ जाते हैं, जो आपके सवालों का जवाब दे देते हैं।
डॉक्टर भी मानते हैं कि आज के जमाने में अज्ञानता समस्या नहीं है बल्कि ज्ञान की अधिक उपलब्धता समस्या है। पहले महिलाओं को अधिक जानकारी नहीं होती थी और वे डरी हुई रहती थीं। अब महिलाओं को बहुत ज्यादा जानकारी है और वे अब भी डरी हुई हैं, बस वजह अलग हैं। इसका कारण है, हर छोटे लक्षण को गूगल पर सर्च करना। एक सर्च के बाद 5 और सर्च शुरु हो जाते हैं।
सिरदर्द? सर्च।
पीठ दर्द? सर्च।
बच्चा कुछ समय से हिल-डुल नहीं रहा? सर्च।
ऐंठन? सर्च।
नींद की समस्या? सर्च।
ऐसे में हम वास्तव में जो जानना चाहते हैं, उसका जवाब कम मिलता है और मन को अशांत करने वाले सवाल अधिक उठने लगते हैं।
रिसर्च बताते हैं, सेहत से जुड़ी समस्याओं के बारे में इंटरनेट पर बहुत ज्यादा सर्च करने से एंग्जायटी बढ़ सकती है, खासकर प्रेग्नेंसी के दौरान। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि लोग अक्सर ऐसी कॉम्प्लिकेशन्स के बारे में पढ़ते हैं और सोचने लगते हैं कि उन्हें भी वैसी ही दिक्कतें होंगी।
आजकल प्रेग्नेंसी के बारे में एक और दिलचस्प बात यह है कि महिलाएं हर चीज को ट्रैक कर रही हैं। ऐसे ऐप्स हैं, जो बताते हैं कि बच्चा किस फल के आकार का है, क्या खाना चाहिए, कितने कदम चलना चाहिए, नींद से लेकर बेबी के हलचल तक को ट्रैक करते हैं। मतलब प्रेग्नेंसी हर वक्त ट्रैक, मॉनिटर और मापा जा सकता है, लेकिन प्रेग्नेंसी अभी भी अनिश्चित है, हर किसी का अनुभव अलग होता है। बच्चे अलग-अलग होते हैं। अनुभव अलग-अलग होते हैं। कोई भी ऐप या वेबसाइट पूरी तरह से यह अनुमान नहीं लगा सकती कि किसी की प्रेग्नेंसी कैसी रहेगी। इन सबका परिणाम यह होता है कि डॉकटर द्वारा कही गई बात बहुत आसान और पुराने जमाने की लगती है। हर चीज के लिए गूगल न करें। अपने डॉक्टर से बात करें, लेकिन इंटरनेट के जमाने में, यह कहना तो आसान है पर करना मुश्किल।
एक्सपर्ट बताते हैं कि आज बहुत सी महिलाओं के लिए प्रेग्नेंसी टेस्ट पॉजिटिव आने का मतलब है कि वे इंटरनेट पर रिसर्च करेंगी और जानेंगी कि आगे क्या उम्मीद करनी है। हालांकि इससे कुछ महिलाओं को अपनी प्रेग्नेंसी के बारे में ज्यादा जानकारी मिलती है, लेकिन असल में इतनी सारी जानकारी और अलग-अलग तरह की सलाह मिलने से महिलाएं परेशान भी हो सकती हैं। इससे जवाबों के बजाय और ज़्यादा सवाल खड़े हो सकते हैं और बेवजह चिंता हो सकती है।
इससे प्रेग्नेंसी से जुड़ी चिंता बढ़ सकती है। होने वाली मांएं अपनी प्रेग्नेंसी के लक्षणों और सामान्य प्रेग्नेंसी के लक्षणों के बारे में बहुत ज्यादा सोचने लगती हैं। इसके अलावा अपनी प्रेग्नेंसी की तुलना दूसरी महिलाओं से करती हैं, जिससे आत्मविश्वास में कमी और घबराहट हो सकती है। इसके अलावा, बहुत ज़्यादा रिसर्च करने से नींद, मानसिक स्वास्थ्य और इमोशनल स्टेबिलिटी की समस्या उत्पन्न हो जाती है।