Moral Policing: दूसरों की जिंदगी में कब बढ़ने लगता है दखल? कपल ही नहीं, इन 7 चीजों पर भी होता है जजमेंट

Moral Policing Meaning: जमुई की घटना के बाद मोरल पुलिसिंग चर्चा में है। यह सिर्फ किसी की जिंदगी में ताक-झांक करने तक सीमित नहीं है। जानिए किन-किन मामलों में लोग दूसरों की जिंदगी में देते हैं दखल।
Moral policing 7 things people judge in daily life.
मोरल पुलिसिंग फोटो.एआई
Published on
Updated on

Moral Policing in India: बिहार के जमुई में दो नाबालिगों को कथित तौर पर रोककर उनके साथ बदसलूकी और दुर्व्यवहार का वीडियो सामने आया है, जिसके बाद मोरल पुलिसिंग शब्द चर्चा में है।

लेकिन क्या मोरल पुलिसिंग सिर्फ किसी लड़के और लड़की को साथ देखकर रोकने तक सीमित है। रोजमर्रा की जिंदगी में भी लोगों को उनके कपड़ों, दोस्तों, रिश्तों और निजी फैसलों को लेकर हमेशा जज किया जाता है। सवाल यह है कि कब किसी की राय सिर्फ राय रहती है और कब वह दूसरे की पर्सनल लाइफ में दखल बन जाती है?

कपड़ों को लेकर बार-बार टोका जाना

कपड़ों के बारे में जजमेंटल होने से संबंधित सवाल कई लोगों के लिए सामान्य हो सकते हैं। किसी के पहनावे को पसंद या नापसंद करना किसी की पर्सनल चॉइस हो सकती है, लेकिन कपड़ों के आधार पर किसी व्यक्ति के चरित्र पर सवाल करना और फैसला सुनाना गलत है। खासकर महिलाओं के कपड़ों को उनकी सुरक्षा, सम्मान या चरित्र से जोड़ना मोरल पुलिसिंग ही है।

दोस्तों पर नजर रखना

किसी महिला या पुरुष के दूसरे जेंडर के दोस्त होने पर सवाल उठाना भी रोजमर्रा के जीवन की घटना है। दोस्त होने पर सवाल उठाना भी मोरल पुलिसिंग का रूप है। इतनी देर तक उसके साथ क्यों घूमती हो? या लड़के/लड़की के साथ अकेले क्यों गए? जैसे सवाल अगर चिंतावश पूछी जाए, तो सही है, लेकिन यही चिंता जब आगे बढ़कर निगरानी और दबाव में बदल जाए तो फिर बाउंड्री तय करनी आवश्यक हो जाती है।

Moral Policing
मोरल पुलिसिंग फोटो.एआई

पार्टनर चुनने पर फैसला

किससे शादी करनी है, कब करनी है या शादी करनी भी है या नहीं- ये किसी भी लड़का या लड़की का बेहद निजी फैसला है। देश की सर्वोच्च अदालत ने भी कई फैसलों में पार्टनर चुनने की आजादी को आर्टिकल 21 से जुड़ा अधिकार बताया है। अदालत का भी मानना है कि पार्टनर चुनना व्यक्ति का निजी अधिकार है। इसके लिए किसी सोशल अप्रूवल की जरूरत नहीं है।

रात में बाहर निकलने पर सवाल

अकेले बाहर जाना या ट्रैवल करने जैसे विषयों पर सवाल अक्सर सुरक्षा की चिंता से पूछे जाते हैं। सुरक्षा की सलाह देना और किसी को नियंत्रित करना दो अलग-अलग बातें हैं। किसी व्यक्ति को बाहर जाने से रोकना या उसके चरित्र पर टिप्पणी करना भी मोरल पुलिसिंग का तरीका है।

Moral Policing
मोरल पुलिसिंग फोटो.एआई

सार्वजनिक जगहों पर दोस्तों के साथ बैठना

कैफे, पार्क या किसी भी पब्लिक प्लेस में दो व्यस्कों के साथ बैठने या बात करने पर आसपास के लोग या राह चलते लोग भी आपके रिश्ते के बारे में अनुमान लगाने लगते हैं। किसी पब्लिक प्लेस के नियमों का पालन करना जरूरी है, लेकिन सिर्फ साथ बैठना या बातचीत करना किसी भी अन्य को यह अधिकार नहीं देता है कि दूसरों की निजी जिंदगी पर फैसला सुनाया जाए।

सोशल मीडिया को लेकर जजमेंट होना

सोशल मीडिया आज की मोरल पुलिसिंग का मॉडर्न तरीका है। इंस्टाग्राम पर फोटो डालना, ट्रैवल वीडियोज बनाना, अपनी फैशन चॉइस को पब्लिक करना या अपनी लाइफस्टाइल को शेयर भी आज की जिंदगी का हिस्सा है। फिर भी कमेंट्स में अक्सर लोग पूछने लगते हैं-ऐसी फोटो क्यों डाली?, शादी के बाद भी ऐसा करोगी? किसी पोस्ट पर अपनी राय रखना अलग बात है, लेकिन किसी का चरित्र हनन करने के लिए धमकी या पर्सनल लाइफ में हस्तक्षेप करना नॉर्मल नहीं हो सकता है।

Moral Policing
मोरल पुलिसिंग फोटो.एआई

करियर के फैसलों पर ‘लोग क्या कहेंगे’

शादी के बाद नौकरी करना, देर से शादी करना, अकेले रहना, सोलो ट्रैवलिंग करना या अपनी कमाई अपनी पसंद से खर्च करना- इन फैसलों पर भी समाज की राय बिना मांगे मिलती रहती है। परिवार या करीबी लोगों की सलाह और किसी व्यक्ति पर सोशल प्रेशर बनाना अलग चीजें हैं। हर व्यक्ति की परिस्थितियां अलग होती हैं, इसलिए एक ही करियर को सभी के लिए सही या गलत मानना सही नहीं है।

Moral policing 7 things people judge in daily life.
Restless Legs Awareness Day: रात में पैरों को स्थिर रखना क्यों हो जाता है मुश्किल? जानें कारण और लक्षण

राय और दखल के बीच फर्क समझना जरूरी है

हर असहमति को मोरल पुलिसिंग नहीं कहा जा सकता है। परिवार का कोई सदस्य सुरक्षा को लेकर चिंता जताए या कोई व्यक्ति अपनी राय रखे, तो वह उनकी अपनों के प्रति चिंता को दर्शाती है। फर्क तब दिखाई देता है जब राय के साथ धमकी, जबरदस्ती, पीछा करना, अपमानित करना, हिंसा या किसी को उसकी इच्छा के बिना रोका जाए। ऐसे मामलों में बात केवल सोशल जजमेंट तक सीमित नहीं रह जाती है। यह एक कानूनी मामला बन जाता है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com