जानिए पेट का इंफेक्शन ( Social Media)
नवभारत हेल्थ डेस्क: अक्सर व्यस्त जीवनशैली के चलते हम खानपान पर कम ही ध्यान दे पाते है इसकी वजह से घर का खाना खाने के बजाय बाहर का खाना खाते है। इस वजह से इन दिनों एक प्रकार का संक्रमण हेलिकोबैक्टर यानी ए एच पायलोरी (Helicobacter pylori) होने का खतरा बढ़ रहा है जिसमें पेट दर्द की समस्या होती है और कई परेशानियां आती है। चलिए जानते है इस खबर में बीमारी का लक्षण और इलाज।
जानिए क्या है हेलिकोबैक्टर पायलोरी का खतरा
यहां पर इस बीमारी की बात की जाए तो, हेलिकोबैक्टर पायलोरी (एच. पायलोरी) एक प्रकार का बैक्टीरिया होता है जो इंसान के पेट को संक्रमित करने का काम करता है। इसमें आपके पेट की छोटी आंत के ऊपरी हिस्से (ड्यूडेनम) में घाव और सूजन की स्थिति बन जाती है जब आप कुछ अनहेल्दी सा खाते है तो आपको इसका खतरा बनता है। इस संक्रमण के बढ़ने से पेट के कैंसर का खतरा बढ़ता है। इस बीमारी को पेप्टिक अल्सर का कारण बताया जाता है जिसमें आपके पाचन तंत्र तक घाव फैल जाते है इसकी स्थिति गंभीर होने पर कैंसर जैसी बड़ी बीमारियां होती है। यह बीमारी एक इंसान से दूसरे इंसान को हो सकती है। .स्लाइवा, उल्टी और मल के जरिए इसके बैक्टीरिया फैलते है।
जानिए हेलिकोबैक्टर पाइलोरी के लक्षण
इस खास तरह की हेलिकोबैक्टर पाइलोरी बीमारी के कई सारे लक्षण देखने के लिए मिलते है जो इस प्रकार है..
1. पेट में दर्द या तकलीफ, विशेष रूप से पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द
2 . उल्टी होना या फिर उल्टी में खून आना
3 . पेट में गैस या ब्लोटिंग की तकलीफ
4 . भोजन को निगलने में परेशानी या दर्द
5 . भोजन के बाद भी तेजी से भूख लगना
6. वजन का कम होना
जानिए कैसे करें बीमारी की जांच
यहां पर हेलिकोबैक्टर पाइलोरी बीमारी की बात की जाए तो, इसकी जल्दी जांच करके इलाज खोजना जरूरी होता है तो जानिए कैसे होती है इसकी जांच।
1-गैस्ट्रोस्कोपी – इस बीमारी की जांच में सबसे पहले जांच यह टेस्ट में गैस्ट्रोस्कोपी आती है जिसे आपके पेट के अंदर देखने के लिए किया जाता है. डॉक्टर आपके पेट के अंदर एक फ्लेक्सिबल ट्यूब को डालकर आपकी पेट की इनर लाइनिंग को देखते हैं और उससे बायोप्सी लेते हैं।
2-हेलिकोबैक्टर पाइलोरी बायोप्सी: गैस्ट्रोस्कोपी के दौरान लिया गया बायोप्सी आपके पेट की इनर लाइनिंग से सैंपल लेता है, जिसमें हेलिकोबैक्टर पाइलोरी होने की पुष्टि होती है।
3- उपयुक्त एच. पाइलोरी के एंटीबॉडीज़ की जांच या हेलिकोबैक्टर पाइलोरी की ऑनलाइन पीसीआर (PCR) जांच।
कैसे इलाज संभव
इस बीमारी का इलाज जांच के साथ ही शुरु हो जाता है जिसमें शुरुआती समय में एंटीबायोटिक्स दी जाती है ताकि पेट में मौजूद बैक्टीरिया के विकास को रोका जा सकें। इसके बाद इलाज में पेट में बनें घावों और सूजन को कम करने के लिए दवा दी जाती है। वैसे इसका इलाज थोड़ा लंबा है लेकिन आराम मरीज को मिल जाता है। पूरे ट्रीटमेंट के जौरान दवाओं के डोज का ख्याल रखना जरूरी होता है।