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आज मनाया जा रहा है ‘विश्व मातृभाषा दिवस’ 2024, जानें भारत में बोली जाती हैं कितनी मातृभाषाएं

  • Written By: दीपिका पाल
Updated On: Feb 21, 2024 | 03:30 PM

अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 2024 (सोशल मीडिया)

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सीमा कुमारी 

नवभारत डिजिटल टीम: समूची विश्व में आज यानी 21 फरवरी को ‘अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस’ मनाया जाता (International Mother Language Day) हैं। भारत विविधताओं का देश है क्योंकि, यहां के लोग विभिन्न भाषाएँ बोलते हैं। अगर बात भाषा की जाए तो, मानव जीवन में भाषा की एक अहम भूमिका होती है। क्योंकि, भाषा के माध्यम से एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के विचारों का आदान-प्रदान करता है।

जानिए क्या है दिवस मनाने का उद्देश्य

इस दिन को मनाने के पीछे का उद्देश्य पूरे दुनिया भर में अपनी भाषा-संस्कृति के प्रति लोगों में रुझान पैदा करना और जागरूकता फैलाना है। अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस (International Mother Language Day) मनाने के विचार को साल 1999 में यूनेस्को के आम सम्मेलन में मंजूरी दी गई थी और यह दिन साल 2000 से दुनिया भर में मनाया जा रहा है। आइए जानें अंतरराष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस का इतिहास और उद्देश्य के बारे में–

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पीएम मोदी ने कही थी ये बात

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मातृभाषा पर कई दिल छू लेने वाली बातें बोली थीं। ‘मन की बात’ की 86वीं कड़ी में पीएम ने कहा था कि मां और मातृभाषा मिलकर जीवन को मजबूती देते हैं। कोई भी इंसान अपनी मां और मातृभाषा को न छोड़ सकता है। न ही इसके बगैर तरक्की कर सकता है।

जानिए हिंदी दिवस का इतिहास

विश्व मातृभाषा दिवस का इतिहास बेहद दिलचस्प है। बांग्लादेश में 21 फरवरी उस दिन की वर्षगांठ है जब बांग्लादेश के लोगों ने बांग्ला भाषा की मान्यता के लिए संघर्ष किया था। तब वह बांग्‍लादेश नहीं, बल्कि पूर्वी पाकिस्तान हुआ करता था। 1947 में जब पाकिस्तान बना तो भौगोलिक रूप से वह दो हिस्सों – पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान – में बंटा था। पूर्वी पाकिस्तान ही बाद में बांग्‍लादेश बन गया। ये दोनों हिस्से सांस्कृतिक और भाषाई रूप से बिल्कुल अलग थे। भारत इन दोनों को अलग करता था।

पहले ज्यादातर लोग बोलते थे बांग्ला

1948 में पाकिस्तान सरकार ने उर्दू को पाकिस्तान की राष्ट्रीय भाषा घोषित किया। इसके उलट पूर्वी पाकिस्तान में ज्यादातर लोग बांग्‍ला बोलते थे। बांग्ला के मातृभाषा होने कारण पूर्वी पाकिस्तान के लोगों ने विरोध किया। उनकी मांग थी कि उर्दू के अलावा बांग्‍ला को कम से कम एक और राष्‍ट्रीय भाषा का दर्जा मिले। इस मांग को सबसे पहले 23 फरवरी 1948 में धीरेंद्रनाथ दत्‍त ने उठाया था।

इस विरोध को पाकिस्तान सरकार ने पुरजोर तरीके से कुचलने की कोशिश की। 21 फरवरी 1952 को पुलिस ने इसकी मांग के समर्थन में जुटी रैलियों पर खुलेआम गोलियां बरसाई थीं। इसमें कई लोगों की मौत हो गई थी। सैकड़ों घायल हो गए थे। इतिहास में इससे पहले शायद ही हुआ था जब लोगों ने अपनी मातृभाषा के लिए जान गंवाई थी। बांग्लादेशियों की ओर से भाषा आंदोलन को श्रद्धांजलि देने के लिए ही यूनेस्‍को ने इसे मनाने का ऐलान किया था।

भारत में कितनी मात्र भाषाएं बोली जाती है, जानें-

साल 2011 में भारत सरकार द्वारा की गई जनगणना के अनुसार, भारत में कुल 121 भाषाएं और 270 मातृ भाषाएं बोली जाती हैं। अनुसूचित भाषाओं की श्रेणी में कुल 123 मातृभाषाएं हैं और 147 मातृभाषाओं को गैर-अनुसूचित भाषाओं के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है।

असमिया, बंगाली, गुजराती, अवधी, हिंदी, राजस्थानी, हरियाणवी, कन्‍नड़, कोंकणी, मणिपुरी, उड़िया, मलयालम, पंजाबी, संस्कृत, तमिल, सिंधी, उर्दू और तेलुगु कुछ व्यापक रूप से ज्ञात मातृभाषाएं हैं और इन्हें भारत के संविधान में आठवीं अनुसूची में भी निर्दिष्ट किया गया है।

अन्य अनुसूचित मातृभाषाओं में मराठी, गढ़वाली, छत्तीसगढ़ी, मैथिली, मारवाड़ी, डोगरी, पहाड़ी, संबलपुरी और भोजपुरी शामिल हैं. गैर-अनुसूचित मातृभाषा श्रेणी में अफगानी, अरबी, अंग्रेजी, बाउरी, खरिया, किन्‍नौरी, तुलु, शेरपा, माओ, मोनपा और गुजरी शामिल हैं।

International mother language day 2024 is being celebrated today

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Published On: Feb 21, 2024 | 03:20 PM

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