Hindi Diwas 2025: हिंदी राष्ट्रभाषा है या राजभाषा का कन्फ्यूजन होगा दूर, जाने संविधान की खास बातें
Importance of Hindi Diwas : भारत देश की संस्कृति और पहचान में हिंदी का गहरा महत्व है। यहां पर हिंदी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है और पूरे देश को एकता के सूत्र में पिरोने का काम करती है।
- Written By: दीपिका पाल
हिंदी राष्ट्रभाषा है या राजभाषा (सौ.सोशल मीडिया)
Hindi Official Language : हिंदी, हमारे देश की पहली और सबसे खास भाषा है। इस भाषा के महत्व और प्रसार के लिए भारत में हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाते है। भारत देश की संस्कृति और पहचान में हिंदी का गहरा महत्व है। यहां पर हिंदी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है और पूरे देश को एकता के सूत्र में पिरोने का काम करती है।
हिंदी भाषा हमारे कामकाज से लेकर सभी कार्यों में उपयोगी भूमिका निभाती है लेकिन हिंदी को लेकर विवाद भी देखने के लिए मिलता है। हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है या राजभाषा। भारत की भाषाई विविधता और संवैधानिक व्यवस्था को समझने के लिए बेहद जरूरी है हम दोनों के बीच के अंतर को समझें। इसके बारे में संविधान में उल्लेख किया गया है इसके बारे में चलिए जानते है।
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पहले जानिए राष्ट्रभाषा और राजभाषा के बीच का अंतर
हिंदी राष्ट्रभाषा है या राजभाषा इसके बारे में अंतर बताया गया है। यहां पर राष्ट्रभाषा की सरल व्याख्या देश की भाषा के रूप में है। एक ऐसी भाषा जो देश के सभी वर्गों के लोगों को एकसूत्रता में बांधकर रखें। यह जनता द्वारा स्वाभाविक रूप से अपनाई गई और राष्ट्रीय पहचान से जुड़ी भाषा होती है। कहा गया है कि, भारत के संविधान में किसी भी भाषा को ‘राष्ट्रभाषा’ का दर्जा नहीं दिया गया है इस तरह से हिंदी राजभाषा के रूप में स्वीकार की गई है। इसके अलावा राजभाषा शब्द की बात करें तो, वह भाषा है जिसका इस्तेमाल सरकारी कामों, प्रशासन, न्यायपालिका और संसद के कामकाज के लिए किया जाता है। यह एक आधिकारिक भाषा है।
कैसे स्वीकार की गई हिंदी राजभाषा के रूप में
हिंदी को भारत की राजभाषा के रूप में जाना जाता है। यह दर्जा हिंदी भाषा को 14 सितंबर, 1949 को मिला था। यह फैसला भारत की संविधान सभा में हुई एक लंबी बहस के बाद लिया गया। बताया जाता है कि, भारत की संविधान सभा में लंबी बहस के बाद हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार गया। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ही हिंदी को भाषा के रूप में काफी प्रोत्साहित किया जाने लगा था। महात्मा गांधी जैसे नेताओं ने इसे जनता की भाषा मानते हुए इसके प्रसार पर जोर दिया। उस दौरान हिंदी भाषा को स्वीकार तो लिया गया था लेकिन गहन विचार विमर्श किया गया। हिंदी को सभी राज्य और क्रेंद्रशासित प्रदेश अपना चुके थे लेकिन दक्षिण भारत द्वारा हिंदी को आसानी से स्वीकार नहीं किया। दरअसल तमिल, तेलुगु, कन्नड़ आदि के लिए खतरा बन सकती थी।
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अंग्रेजी को 15 सालों तक रखा जारी
बताया जा रहा है कि, सभी बातों को ध्यान में रखते हुए एक फैसला लिया गया और संविधान के अनुच्छेद 343(1) के तहत हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया। वहीं पर संविधान के अनुसार अंग्रेजी भाषा का इस्तेमाल 15 सालों तक जारी रहा ।26 जनवरी, 1950 को जब भारत का संविधान लागू हुआ, तब से हिंदी आधिकारिक रूप से भारत गणराज्य की राजभाषा बन गई।
