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-सीमा कुमारी
हिंदू धर्म में माघ महीने की’अमावस्या’ (Amavasya) को बहुत ही पवित्र और शुभ माना जाता है। ‘मौनी अमावस्या’ (Mauni Amavasya) के दिन मौन व्रत रखते हुए संयमपूर्वक व्रत का पालन किया जाता है। और इससे ‘मुनि’ पद की प्राप्ति होती है। ‘मौनी अमावस्या’ माघ माह के मुख्य स्नानों में माना जाता है।
पंचांग के अनुसार, इस साल ‘मौनी अमावस्या’ (Mauni Amavasya) का स्नान 01 फरवरी, दिन मंगलवार को किया जाएगा। हालांकि अमावस्या तिथि 31 जनवरी को शाम को 02 बजकर 20 मिनट पर लगेगी, लेकिन उदया तिथि 01 फरवरी को होने के कारण अमावस्या का स्नान 01 फरवरी को किया जाएगा। ‘मौनी अमावस्या’ पर ब्रह्म मुहूर्त में मौन रह कर स्नान का विधान है। आइए जानें इस दिन स्नान के क्या हैं नियम और क्या है इसका महत्व –
ज्योतिष-शास्त्र के मुताबिक, इस दिन विशेष रूप से गंगा नदी या फिर अन्य पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है। अगर नदियों में नहाना संभव न हो तो घर में ही नहाने के जल में गंगा जल मिला कर स्नान करना चाहिए।
कहते हैं कि, इस दिन स्नान के बाद तांबे के लोटे में गंगा जल और काले तिल मिला कर सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए। ऐसा करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है।
‘मौनी अमावस्या’ (Mauni Amavasya) के दिन ब्रह्म मुहूर्त में, मौन रह कर स्नान करने का विधान है। मान्यता है कि, इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में सभी देव गण पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। इस काल में स्नान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
पण्डितों के अनुसार, ‘मौनी अमावस्या’ के दिन दान करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। इस दिन तिल,गुड़, वस्त्र और कम्बल का दान करना बहुत शुभ माना जाता है।
‘मौनी अमावस्या’ के दिन ‘गायत्री मंत्र’ का जाप करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
इस दिन सात्विक आचार-विचार ही रखने चाहिए। इस दिन भोजन में मांस-मदिरा के सेवन से बचें।