100 साल से ज्यादा जीना होगा आसान! वैज्ञानिकों को मिली बड़ी सफलता, खून में खोजा लंबी उम्र का बड़ा राज

Healthy Aging Study: बोस्टन यूनिवर्सिटी ने एक रिसर्च में बड़ा दावा किया है। उनके अनुसार, इंसानी खून में एक खास केमिकल फिंगरप्रिंट होते हैं जो उम्र बढ़ने की रफ्तार धीमी कर सकते हैं।
Living beyond 100 years is set to become easier! Scientists achieve a major breakthrough, discovering a key secret to longevity in the blood.
इंसानों के बढ़ते उम्र पर वैज्ञानिक रिसर्च (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
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Blood Chemical Fingerprint: इंसानों में शुरू से ही ज्यादा समय तक जीवन जीने की इच्छा रही है। इसको लेकर वह हमेशा से ही पूरी तरह स्वस्थ रहने के तौर-तरीके की खोज भी करता आया है। वैज्ञानिकों को अब इस दिशा में बड़ी सफलता मिली है। इससे भविष्य में इंसानों के बूढ़ा होने की प्रक्रिया अब धीमा हो जाएगी। अमेरिका स्थित बोस्टन यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ मेडिसिन के रिसर्चर्स ने बड़ा दावा किया है।

वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि सौ वर्ष से अधिक समय तक जीवन जीने वाले व्यक्तियों के खून में एक खास रासायनिक फिंगरप्रिंट होता है। यह उन्हें अन्य वृद्ध लोगों की तुलना में सेहतमंद और एकदम अलग बनाए रखता है। हाल ही में बोस्टन यूनिवर्सिटी का यह अध्ययन जेरोसाइंस जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

213 लोगों के ब्लड सैंपल पर हुआ अध्ययन

उत्तरी अमेरिका के एक सबसे बड़े शोध प्रोजेक्ट्स में एक न्यू इंग्लैंड सेंटेरियन स्टडी में करीब 213 लोगों के खून के सैंपल लेकर वैज्ञनिकों ने उसका रिसर्च किया। इस प्रोजेक्ट में बच्चे, सामान्य उम्र के लोग और सौ साल के बुजुर्गों को शामिल किया गया था।

ब्लड में मौजूद 1,495 छोटे अणुओं की हुई जांच

जांच के दौरान वैज्ञानिकों ने लोगों के खून में मौजूद करीब 1,495 छोटे अणुओं की जांच की। इसमें वैज्ञनिकों ने पाया कि सौ साल से ज्यादा उम्र के लोगों के खून में एक खास प्रकार के स्टेरॉयड और बॉयल एसिड का स्तर संतुलित और बहुत अधिक मात्रा में है। बता दें, बायल एसिड्स इंसानी शरीर की पाचन प्रक्रिया को दुरुस्त रखते हैं और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रण में रखते हैं। यह खास रासायन का मिश्रण सामान्य रूप से वृद्ध हो रहे व्यक्तियों के के खून में नहीं होता।

जीन्स का अहम योगदान

वैज्ञानिकों के मुताबिक, 100 साल या उससे ज्यादा समय तक जीवित रहने में 50 फीसदी योगदान उसक व्यक्ति के प्रोटेक्टिव जीन्स का होता है, जबकि बाकी 50 प्रतिशत का व्यक्ति की जीवनशैली पर निर्भर होता है। इसमें व्यक्ति का शारीरिक रूप से सक्रिय रहना, संतुलित खान-पान, अच्छा पारिवारिक और सामाजिक रिश्ता शामिल हैं।

शोधकर्ताओं का मानना है कि लोगों की अच्छी आदतों के साथ-साथ व्यक्ति के शरीर में होने वाले ऐसे केमिकल चेंजेज बुजुर्ग लोगों को इन जानलेवा बीमारियों से बचाने में सहायक होते हैं। ये असामयिक मौत के खतरे को भी कम करता है।

वैज्ञनिकों ने किया दावा

वैज्ञनिकों ने बताया कि यह अध्ययन खून में मापने योग्य रासायनिक फिंगरप्रिंट्स की ओर इशारा करती है, जोकि स्वस्थ और लंबी जिंदगी जीने के लिए महत्वपूर्ण हैं। उनका कहना है कि यदि उन फिंगरप्रिंट्स को समझने में सफलता मिल जाए तो फिर उन जैविक तरीकों की पहचान करने में आसानी होगी, जो उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने में मददगार साबित हो सकते हैं।

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