Body Autonomy Trend: अंडरआर्म के बालों को गुलाबी-नीला रंग रही Gen Z, जिस को छिपाया उसी को दिखाने की जिद क्यों?

Body Autonomy: कभी अंडरआर्म हेयर दिखने पर लड़कियां असहज हो जाती थीं, लेकिन अब कुछ युवा महिलाएं इन्हें रंगकर सोशल मीडिया पर दिखा रही हैं। जानिए इस अजीब Gen-Z ब्यूटी ट्रेंड के बारे में सब कुछ।
Body autonomy trend gen-z dyed armpit hair body positivity india.
जेन जी ब्यूटी ट्रेंडफोटो.सोशल मीडिया
Published on: 
Updated on: 

Highlights:

  • अंडरआर्म हेयर को रंगने का ट्रेंड 2014 में अमेरिका से चर्चा में आया था, लेकिन इसकी जड़ें उससे भी पहले के बॉडी-हेयर से जुड़ी हैं।

  • Gen Z के लिए यह सिर्फ फैशन नहीं, बल्कि अपनी पसंद से शरीर को स्वीकारने और ब्यूटी स्टैंडर्ड्स पर सवाल उठाने का तरीका है।

  • भारत में बॉडी पॉजिटिविटी पर चर्चा बढ़ी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वैक्सिंग या शेविंग छोड़ना हर लड़की की पसंद हो।

Gen Z Beauty Trend: सोचिए, कोई लड़की स्लीवलेस टॉप पहने और उसके अंडरआर्म हेयर काले या सामान्य रंग में दिखने के बजाय नीले, गुलाबी या किसी दूसरे चमकीले रंग में नजर आएं। पहली नजर में यह आपको अजीब लग सकता है, लेकिन सोशल मीडिया पर कुछ जेन जी इसी अंदाज को अपना रही हैं।

चीन में हाल ही में यह ट्रेंड फिर चर्चा में आया है। वहां अपने अंडरआर्म हेयर को रंगकर तस्वीरें और वीडियो शेयर की जा रही हैं। वे इसे अपनी पसंद, शरीर को लेकर शर्म से बाहर निकलने और तय ब्यूटी स्टैंडर्ड को चुनौती देने का तरीका मानती हैं।

इस ट्रेंड को समझने के लिए एक बात जानना जरूरी है- यह सिर्फ बालों को रंगने का मामला नहीं है। यहां असली सवाल है कि किसी महिला के शरीर पर क्या दिखना चाहिए और इसका फैसला कौन करेगा?

dyeing armpit hair trends
जेन जी ब्यूटी ट्रेंडफोटो.सोशल मीडिया

चीन से नहीं, 2014 में अमेरिका में भी मचा था शोर

अंडरआर्म हेयर को कलर करने की शुरुआत चीन से नहीं हुई। साल 2014 में अमेरिका के सिएटल की हेयर स्टाइलिस्ट रॉक्सी हंट ने अपनी सहकर्मी के नीले बालों से मेल खाते हुए उसके अंडरआर्म हेयर को भी नीला रंग दिया था। उन्होंने इसकी तस्वीरें ऑनलाइन शेयर कीं और यह एक्सपेरिमेंट सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।

इसके बाद #dyedpits जैसे हैशटैग के साथ रंगे हुए अंडरआर्म हेयर की तस्वीरें सामने आने लगीं। इस चलन को महिलाओं के शरीर से जुड़े फैसलों पर अपना अधिकार जताने का तरीका समझा गया। इससे पहले साल 2011 में लेडी गागा हरे रंग के अंडरआर्म हेयर के साथ चर्चा में आई थीं।

आखिर Gen Z को इसमें दिलचस्पी क्यों?

जो छिपाते है, उसी को दिखाने का फैसला

लड़कियों को कम उम्र से ही शरीर के बाल हटाने, त्वचा को चिकना रखने और बिना बालों वाले अंडरआर्म को साफ-सुथरा दिखने से जोड़ा जाता है। ऐसे में जेन जी ब्यूटी ट्रेंड अंडरआर्म हेयर को कलर करके आउट ऑफ द बॉक्स दिखने का तरीका है।

dyeing armpit hair trends
जेन जी ब्यूटी ट्रेंडफोटो.सोशल मीडिया

खूबसूरती के नियमों पर सवाल

पहले ब्यूटी ट्रेंडस का मतलब अक्सर किसी खास लुक को अपनाना होता था। अब सोशल मीडिया पर कुछ युवा यह भी पूछ रहे हैं कि क्या हर व्यक्ति को एक ही तरह से सुंदर दिखना जरूरी है? यहीं बॉडी ऑटोनॉमी यानी अपने शरीर से जुड़े फैसले खुद लेने का विचार सामने आता है। अंडरआर्म हेयर कलरिंग इसी सोच को मजबूत करता है।

सोशल मीडिया पर अलग दिखने की चाह

रंगीन अंडरआर्म हेयर एक ऐसा लुक है, जिसे देखते ही लोग रुकते हैं, रिएक्शन देते हैं। यह अनोखापन तस्वीरों और वीडियो में अधिक व्यूज लाने का काम करता है। किसी ट्रेंड का वायरल होना और बड़ी संख्या में लोगों का उसे अपनी जिंदगी में अपनाना अलग-अलग बातें हैं। ऑनलाइन तस्वीरों से यह नहीं कहा जा सकता कि ज्यादातर युवा महिलाएं अब वैक्सिंग या शेविंग छोड़ रही हैं।

Body autonomy trend gen-z dyed armpit hair body positivity india.
Navratri Short Hairstyles: छोटे बालों में गरबा के लिए ट्राई करें ये 5 आसान और खूबसूरत हेयरस्टाइल

भारत में बॉडी पॉजिटिविटी की चर्चा क्यों बढ़ी?

भारत में महिलाओं के लिए कई ब्यूटी स्टैंडर्ड तय है, जिससे अब वे खुद भी तंग आ गई हैं। क्यों कि महिलाओं के लिए नियम महिलाओं ने नहीं बनाए हैं। स्लीवलेस ब्लाउज, पार्टी वियर, स्विमवियर या त्योहारों के कपड़े पहनते समय अंडरआर्म को लेकर कई लड़कियां असहज महसूस करती हैं। वैक्सिंग या शेविंग का फैसला उनकी अपनी पसंद भी हो सकता है, लेकिन कभी-कभी इसके पीछे परिवार, दोस्तों या समाज की टिप्पणियों का डर भी होता है।

बॉडी पॉजिटिविटी की चर्चा बढ़ने के पीछे सोशल मीडिया पर अलग-अलग आकार, त्वचा के रंग और शरीर की बनावट वाले लोगों का दिखाई देना भी है। इससे उन अनुभवों पर बात करने की जगह मिल गई है, जिन्हें पहले टैबू समझकर इग्नोर किया जाता था।

बॉडी पॉजिटिविटी का मतलब

इस ट्रेंड पर लोगों की प्रतिक्रिया अलग-अलग हो सकती हैं। किसी को यह क्रिएटिव और सेल्फ कॉन्फिडेंस लग सकता है, तो किसी को यह पसंद नहीं भी आ सकता है, लेकिन बॉडी पॉजिटिविटी का अर्थ किसी एक चुनाव को सही और दूसरे को गलत ठहराना नहीं है।

Navbharat Live
navbharatlive.com