नवरात्रि में बोए गए जौ अगर समय पर अंकुरित न हों, तो जानिए इसके आपके जीवन के लिए संकेत
- Written By: वैष्णवी वंजारी
सीमा कुमारी
नवभारत डिजिटल टीम: हिंदू धर्म में नवरात्रि (Navratri 2023) पर ज्वारे या जौ का बहुत अधिक महत्व होता है। नवरात्रि के पहले दिन ही घट स्थापना के साथ ही जौ बोए जाते है। कहा जाता है कि, इसके बिना मां अंबे की पूजा अधूरी रह जाती है। कलश स्थापना के साथ जौ बोने की परंपरा बहुत पहले से चली आ रही है। जो आज भी कायम है। ज्योतिष शास्त्र की मानें तो नवरात्रि में जौ बोने का खास महत्व होता है। तो आइए जानें नवरात्रि में जौ क्यों बोए जाते हैं।
धार्मिक ग्रंथों की मानें तो, जब ब्रह्मा जी ने इस सृष्टि की रचना की थी तब वनस्पतियों में सबसे पहले विकसित होने वाली जौ थी। इसे सृष्टि का पहली फसल माना गया है। जौ मां अन्नपूर्णा देवी का प्रतीक मानी जाती है। नवरात्रि का पर्व बहुत ही पवित्र होता है ऐसे में जौ बोने से देवी दुर्गा, मां अन्नपूर्णा और ब्रह्मा जी का आशीर्वाद मिलता है। यह प्रथा कई सालों से चल रही है इस मिट्टी के पात्र में नवरात्रि के पहले दिन बोया जाता है। माना जाता है कि जैसे-जैसे यह उगती है वैसे ही घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है।
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कहते है यदि पूरी विधि-विधान के साथ जौ को घर में बोया जाए तो शुभ संकेत मिलते हैं। माना जाता है कि यदि यह नवरात्रि की शुरुआत में अंकुरित होने लगे तो शुभ संकेत होता है। वहीं यदि यह सफेद या फिर हरे रंग की उगे तो यह घर में सुख-सौभाग्य बढ़ने का संकेत माना जाता है।
नवरात्रि में कलश स्थापना के दौरान बोए गए जौ दो-तीन दिन में ही अंकुरित हो जाते हैं, लेकिन यदि ये न उगे तो भविष्य में आपके लिए अच्छे संकेत नहीं है। ऐसी मान्यता है कि दो-तीन दिन बाद भी अंकुरित नहीं होते तो इसका मतलब ये है कि आपको कड़ी मेहनत के बाद ही उसका फल मिलेगा।
इसके अलावा, यदि जौ उग गए हैं लेकिन उनका रंग नीचे से आधा पीला और ऊपर से आधा हरा हो इसका मतलब आने वाले साल का आधा समय आपके लिए ठीक रहेगा, लेकिन बाद में आपको परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। वहीं यदि आपका बोया हुआ जौ सफेद या हरे रंग में उग रहा है, तो ये बहुत ही शुभ माना जाता है। इसका मतलब ये होता है कि आपके द्वारा की गई पूजा सफल हो गई। आने वाला पूरा साल आपके लिए खुशियों से भरा होगा।
नवरात्रि के समापन पर इनको किसी नदी या तालाब में प्रवाहित करना चाहिए। मान्यता के अनुसार मां दुर्गा की पूजा स्थल पर ज्वारे इसलिए बोए जाते हैं क्योंकि, धार्मिक ग्रंथों में इस सृष्टि की पहली फसल के रूप में जौ को ही बताया गया है। एक अन्य मान्यता के अनुसार जौ ही भगवान ब्रह्मा है। इसलिए हमेशा अन्न का सम्मान करना चाहिए, इन्हीं सब कारणों से जौ का इस्तेमाल पूजा में किया जाता है।
