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-सीमा कुमारी
सनातन धर्म में ‘गोवर्धन पूजा’ (Govardhan Puja) का विशेष महत्व होता है। यूं तो हर साल ‘गोवर्धन पूजा’ दीपावली के दूसरे दिन मनाई जाती है। लेकिन इस साल ऐसा नहीं है। इस बार दीपावली 24 अक्टूबर, 2022 को है। लेकिन, दीपावली के अगले दिन सूर्य ग्रहण लगा।इसलिए ‘गोवर्धन पूजा’ 25 अक्टूबर नहीं, बल्कि 26 अक्टूबर को मनाई जाएगी। गोवर्धन पूजा भगवना श्रीकृष्ण से जुड़ी आइए जानें आखिर क्यों महत्वपूर्ण है गोवर्धन पूजा। इसकी पूजा की विधि और इसके लाभ के बारे में विस्तार से।
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 25 अक्टूबर की शाम 4 बजकर 18 मिनट से शुरू हो रही है और यह तिथि 26 अक्टूबर को 2 बजकर 42 मिनट पर खत्म होगी। इस साल 26 अक्टूबर को सुबह 6.29 बजे से 8.43 बजे तक गोवर्धन पूजा मुहूर्त है।
इस दिन शरीर पर तेल मलकर स्नान करने का प्राचीन परंपरा है। स्नान-ध्यान करने के बाद पूजा स्थल पर बैठकर कुल देवी-देवताओं का ध्यान किया जाता है। सबसे पहले गाय, बैल आदि पशुओं को स्नान कराकर फूल, माला, धूप, चंदन आदि से पूजा की जाती है। गायों को मिठाई खिलाकर आरती उतारी जाती है और प्रदक्षिणा की जाती है। गोवर्धन पूजा में घर के आगंन में गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाई जाती है।
इसके बाद शुभ मुहूर्त में जल, मौली, रोली, चावल, फूल, दही तथा तेल का दीपक जलाकर पूजा करने के बाद सात परिक्रमा करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति रखकर धूप दीप से आरती कर फूल अर्पित किए जाते हैं और फिर छप्पन या 108 प्रकार के व्यंजनों भोग लगाने की परंपरा है। साथ ही दूध, घी, शक्कर, दही और शहद से बनाकर पंचामृत चढ़ाया जाता है। इसके बाद गोवर्धन महाराज की आरती की जाती है और जयकारे लगाए जाते हैं।
गोवर्धन पूजा दिवाली के अगले दिन और पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाया जाता है। इसी दिन भगवान कृष्ण ने इंद्रदेव के घमंड को चूरकर उन्हें पराजित किया था। इंद्रदेव क्रोध में अपना प्रकोप दिखाते हुए बृज में भारी वर्षा करवा रहे थे। तभी भगवान कृष्ण ने बृजवासियों को बारिश और बाढ़ से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपने बाएं हाथ के कनिष्ठ उंगली से उठाकर पूरे बृज के ऊपर छावनी की तरह खड़ा कर दिया।
तभी से बृजवासी भगवान कृष्ण और गोवर्धन पर्वत की पूजा करने लगे। इस घटना के बाद में प्रत्येक वर्ष गोवर्धन पूजा का पर्व पूरे देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन भगवान कृष्ण की विशेष पूजा की जाती है। उन्हें कई तरह के पकवानों के भोग अर्पित किए जाते हैं। कृष्ण के बाल रूप प्रतिमा का श्रृंगार कर उसकी पूजा भी की जाती है। इस दिन गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर पूजा करने का विधान है।