रेलवे तत्काल टिकट घोटाला: राउरकेला और चक्रधरपुर में दलालों का राज, यात्रियों की जेब पर सरेआम डाका

Railway Tatkal Fraud: राउरकेला और चक्रधरपुर रेलमंडल में तत्काल टिकटों पर दलालों का कब्जा है। आरपीएफ और क्लर्कों की मिलीभगत से आम यात्रियों को तीन गुना महंगे दाम पर टिकट खरीदने को मजबूर किया जा रहा है।
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झारखंड रेलवे तत्काल टिकट घोटाला (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Illegal Railway Ticket Booking Syndicate: झारखंड के चक्रधरपुर रेलमंडल के विभिन्न स्टेशनों पर इन दिनों तत्काल टिकटों को लेकर एक बहुत बड़ा कालाबाजारी का खेल चल रहा है। राउरकेला, चाईबासा और आसपास के स्टेशनों पर दलालों ने रिजर्वेशन काउंटरों पर पूरी तरह से अपना अवैध कब्जा जमा लिया है। आरोप है कि रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और कमर्शियल क्लर्कों की मिलीभगत से यह सिंडिकेट आम जनता की गाढ़ी कमाई लूट रहा है। अवैध रेलवे टिकट बुकिंग सिंडिकेट के इस नेटवर्क के कारण जरूरतमंद यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

दलालों का कब्जा

राउरकेला स्टेशन के रिजर्वेशन काउंटरों पर पिछले कई महीनों से दलालों का नेटवर्क सक्रिय है जो रात से ही लाइन लगा लेते हैं। हैरानी की बात यह है कि लाइन में हर दिन वही पुराने चेहरे नजर आते हैं जो दलालों के इशारे पर जगह घेरते हैं। इसके कारण आम यात्रियों को काउंटर खुलने पर भी कंफर्म तत्काल टिकट नहीं मिल पाता और वे खाली हाथ लौट जाते हैं।

मिलीभगत के आरोप

इस पूरे अवैध धंधे में आरपीएफ और रेलवे के कमर्शियल क्लर्कों की कथित संलिप्तता की बात सामने आ रही है जो बहुत गंभीर है। कहा जा रहा है कि क्लर्क एक टिकट निकालने के बदले दलालों से प्रति यात्री 500 से 1000 रुपये तक की अवैध वसूली करते हैं। आरपीएफ के जवान भी दलालों को संरक्षण देते हैं और उन्हें किसी भी कानूनी कार्रवाई से बचाने का काम करते हैं ताकि धंधा चलता रहे।

अवैध वसूली का खेल

सूत्रों के अनुसार राउरकेला के चार काउंटरों से आरपीएफ द्वारा रोजाना करीब 4,000 रुपये की कथित वसूली की जा रही है। पानपोश, कलूंगा और बीरमित्रपुर जैसे अन्य स्टेशनों से भी हर महीने हजारों रुपये की उगाही कर आपस में बांटी  जाती है। कुल मिलाकर यह अवैध कमाई प्रति माह लगभग 1,70,000 रुपये तक पहुंच जाती है जिसमें सिस्टम के कई लोग शामिल हैं।

यात्रियों की परेशानी

मजबूरी में यात्रियों को अपनी यात्रा के लिए दलालों से तीन गुना अधिक दाम चुकाकर टिकट खरीदने को विवश होना पड़ता है। सिस्टम की इस लाचारी के कारण आम जनता की जेब पर सरेआम डाका डाला जा रहा है और कोई सुनने वाला नहीं है। स्थानीय लोग अक्सर सोशल मीडिया पर फोटो और वीडियो साझा करते हैं लेकिन अब तक प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

मास्टरमाइंड की पहचान

बीरमित्रपुर में चल रहे टिकटों के इस काले खेल का मास्टरमाइंड कथित तौर पर रेलवे विभाग का ही एक कर्मचारी बताया गया है। इससे यह आशंका और भी गहरी हो जाती है कि पूरा सिस्टम अंदरूनी तौर पर इस सिंडिकेट को चलाने में मदद कर रहा है। क्लर्क इस अवैध काम से रोजाना 5,000 से 10,000 रुपये तक की काली कमाई कर रहे हैं जो ऊपर तक पहुंचता है।

अधिकारियों का जवाब

सीनियर डीसीएम आदित्य चौधरी ने स्वीकार किया है कि स्टेशनों के टिकट काउंटरों पर दलाल सक्रिय हैं और यह एक समस्या है। उन्होंने बताया कि इस बारे में आरपीएफ को समय-समय पर जानकारी दी जाती है लेकिन उनकी ओर से कोई सख्त कार्रवाई नहीं होती। कार्रवाई की जिम्मेदारी से बचने और एक-दूसरे पर दोष मढ़ने के कारण दलालों का हौसला दिन-प्रतिदिन और भी बढ़ता जा रहा है।

जांच पर सवाल

विजिलेंस अधिकारी समय-समय पर कोलकाता मुख्यालय से जांच के लिए आते हैं लेकिन उनकी कार्रवाई केवल खानापूर्ति लगती है। आरोप है कि दलाल इन अधिकारियों को भी मैनेज कर लेते हैं जिससे स्टेशन पर लगा सीसीटीवी कैमरा भी बेअसर साबित होता है। इतने बड़े भ्रष्टाचार के बावजूद आरपीएफ का नेतृत्व करने वाले उच्च अधिकारी इस मामले में पूरी तरह से मौन साधे हुए हैं।

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