

Ranchi JPSC Student Protest News: झारखंड की राजधानी रांची इन दिनों एक बड़े छात्र आंदोलन का केंद्र बनी हुई है। दिल्ली के जंतर-मंतर की तर्ज पर रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में अभ्यर्थी जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में हुई कथित गड़बड़ियों के खिलाफ डटे हुए हैं। यहां का माहौल किसी बड़े राजनीतिक आंदोलन से कम नहीं दिख रहा है।
सैकड़ों की संख्या में छात्र पिछले एक हफ्ते से अनिश्चितकालीन सत्याग्रह पर बैठे हैं। रविवार की शाम को इन अभ्यर्थियों ने हाथों में जलती मशालें लेकर एक विशाल मार्च निकाला, जिसमें सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। छात्रों का जोश इस कदर हाई है कि वे कड़कती बिजली और बरसात की भी परवाह नहीं कर रहे हैं।
इस पूरे विरोध प्रदर्शन की मुख्य वजह 14वीं सिविल सर्विसेज परीक्षा के प्रीलिम्स रिजल्ट में सामने आई बड़ी खामियां हैं। छात्रों का गंभीर आरोप है कि पासिंग मार्क्स यानी कट-ऑफ तय करने में भारी गड़बड़ी की गई है। इतना ही नहीं, मेरिट लिस्ट पर जिम्मेदार अधिकारियों के हस्ताक्षर तक नहीं थे। सबसे हैरान करने वाला मामला ओएमआर (OMR) शीट में हेरफेर का है।
छात्रों का दावा है कि जिस 'TDPL' कंपनी को परीक्षा कराने का ठेका दिया गया, उसे सरकार ने महज एक महीने पहले ही ब्लैकलिस्ट किया था । अब छात्र मांग कर रहे हैं कि ओएमआर शीट में 'Not Attempted' का पांचवां विकल्प जोड़ा जाए ताकि भविष्य में छेड़छाड़ न हो सके।
इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो अब आमरण अनशन पर बैठ चुके हैं। प्रदर्शनकारी उन्हें 'सोनम वांगचुक पार्ट-2' कह रहे हैं। महतो का कहना है कि जब तक 14वीं जेपीएससी रद्द नहीं होती और दोषियों को जेल नहीं भेजा जाता, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा।
आंदोलन स्थल पर रात के वक्त भी छात्रों का जमावड़ा कम नहीं हो रहा है। छात्रों का कहना है कि बेरोजगारी ने उनकी रातों की नींद और दिन का चैन पहले ही छीन लिया है, इसलिए अब वे रात में जगकर सोती हुई सरकार को जगाने की कोशिश कर रहे हैं । उन्हें कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का भी समर्थन मिल चुका है।
छात्रों के इस बढ़ते आंदोलन ने झारखंड की राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। जहां एक तरफ 'इंडिया' गठबंधन के विधायक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में एकजुट दिख रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बाबूलाल मरांडी ने छात्रों का खुला समर्थन किया है। मरांडी ने सरकार से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) से कराने की मांग की है। छात्रों का भी यही कहना है कि सीआईडी (CID) जांच पर उन्हें भरोसा नहीं है क्योंकि पहले भी ऐसी जांचों का कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है।