तेजस्वी ने लिया बदला…झारखंड राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ कैसे हुआ खेला? इनसाइड स्टोरी
Jharkhand Rajya Sabha Election: झारखंड राज्यसभा चुनाव में बहुमत होने के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा हार गए। भाजपा समर्थित निर्दलीय परिमल नाथवाणी की जीत के बाद क्रॉस वोटिंग की चर्चा तेज है।
- Written By: अर्पित शुक्ला
राहुल गांधी, तेजस्वी यादव
Jharkhand Rajya Sabha Poll Result: झारखंड के राज्यसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। विधानसभा में पर्याप्त संख्या बल होने के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा जीत दर्ज नहीं कर सके। वहीं भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवाणी ने चुनाव में जीत ने सभी को चौंका दिया है। नाथवाणी को जीत के लिए 28 वोट मिले, जबकि प्रणव झा के खाते में महज 20 वोट आए। दूसरी तरफ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के उम्मीदवार बैजनाथ राम ने 30 वोटों के साथ जीत दर्ज की।
मालूम हो कि झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए 18 जून को मतदान कराया गया था। चुनावी मैदान में इंडिया गठबंधन की ओर से दो उम्मीदवार उतारे गए थे, वहीं परिमल नाथवाणी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में एनडीए समर्थित थे। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 28 विधायकों के समर्थन की जरूरत थी। विधानसभा में इंडिया गठबंधन के पास कुल 56 विधायक होने के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार की हार ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
आखिर समीकरण कैसे बदला?
झारखंड विधानसभा की कुल 81 सीटों में से JMM के पास 34 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के 16 विधायक हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के 4 और माले के 2 विधायक गठबंधन का हिस्सा हैं। इस तरह सत्तारूढ़ गठबंधन की कुल ताकत 56 विधायकों की है।
वहीं विपक्ष में भाजपा के 21 विधायक हैं। इसके अलावा जेडीयू, लोजपा और आजसू के एक-एक विधायक हैं। जेएलकेएम के जयराम महतो भी विधानसभा में प्रतिनिधित्व करते हैं।
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बैजनाथ राम को मिले अपेक्षा से अधिक वोट
जानकारी के मुताबिक JMM उम्मीदवार बैजनाथ राम को 30 वोट मिले। जबकि जीत के लिए उन्हें केवल 28 मतों की जरूरत थी। माना जा रहा है कि सीट को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए पार्टी ने अतिरिक्त विधायकों से भी उनके पक्ष में मतदान कराया। चर्चा है कि कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को कांग्रेस के 16 विधायकों के अलावा JMM के 4 विधायकों का समर्थन मिला।
नाथवाणी के पक्ष में हुआ अतिरिक्त समर्थन
दूसरी सीट पर परिमल नाथवाणी के समर्थन में विपक्षी खेमे के सभी विधायक एकजुट दिखाई दिए। उन्हें जयराम महतो का भी समर्थन मिला। इस तरह उनके पक्ष में पहले से 25 वोट माने जा रहे थे। जीत के लिए उन्हें तीन और वोटों की जरूरत थी, लेकिन वह अपेक्षा से अधिक समर्थन जुटाने में सफल रहे।
कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने आरोप लगाया है कि आरजेडी और माले ने गठबंधन के साथ विश्वासघात किया है।
क्रॉस वोटिंग की चर्चा तेज
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि राष्ट्रीय जनता दल और माले के कुछ विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की। बताया जा रहा है कि नाथवाणी को अपेक्षा से पांच वोट अधिक मिले। इनमें से दो वोट अमान्य घोषित कर दिए गए। वहीं प्रणव झा के पक्ष में पड़े एक वोट के भी निरस्त होने की जानकारी सामने आई है।
JMM ने साधी चुप्पी
JMM के राष्ट्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने इस पूरे घटनाक्रम पर तत्काल टिप्पणी करने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि पार्टी पहले अपने शीर्ष नेतृत्व से चर्चा करेगी, उसके बाद ही कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी जाएगी।
आरजेडी पर्यवेक्षक का बयान
वोटिंग के बाद आरजेडी की ओर से पर्यवेक्षक बनाए गए भोला यादव ने रांची में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि पार्टी विधायकों ने शीर्ष नेतृत्व के निर्देशों के अनुरूप मतदान किया है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि पार्टी हाईकमान की ओर से क्या निर्देश दिए गए थे।
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क्या बिहार की नाराजगी बनी वजह?
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि झारखंड में हुई क्रॉस वोटिंग के पीछे बिहार की राजनीति का असर हो सकता है। बताया जा रहा है कि अप्रैल 2026 में बिहार में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान आरजेडी उम्मीदवार अमरेंद्र सिंह धारी को कांग्रेस विधायकों के अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने के कारण हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में कुछ राजनीतिक विश्लेषक झारखंड के नतीजों को उसी घटनाक्रम की प्रतिक्रिया के रूप में देख रहे हैं।
