झारखंड में आज हो सकते हैं अहम फैसले, कैबिनेट की बैठक में हेमंत सरकार पेश करेगी यह एक्ट
Hemant Soren Government: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में सोहराय पर्व पर दो दिनों के अवकाश पर निर्णय की संभावना है। इससे पहले सरहुल और करम पर्व पर दो दिवसीय अवकाश घोषित हुआ था
- Written By: रंजन कुमार
सीएम हेमंत सोरेन। इमेज-सोशल मीडिया
Jharkhand Cabinet Meeting: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में कैबिनेट सोमवार को जनजातीय समुदाय को एक और तोहफा देते हुए सोहराय पर्व पर भी दो दिनों के अवकाश को लेकर निर्णय कर सकता है।
इससे पहले इसी सरकार के कार्यकाल में सरहुल और करम पर्व पर भी दो दिवसीय अवकाश की घोषणा हुई थी। इसके साथ ही सोमवार को कैबिनेट की बैठक में पेसा एक्ट को लेकर प्रस्ताव पेश हो सकता है। एक दर्जन से अधिक अन्य प्रस्तावों पर भी कैबिनेट विचार करेगा।
एक दर्जन से अधिक प्रस्तावों पर होगी चर्चा
राज्य कैबिनेट की बैठक में सोमवार को एक दर्जन से अधिक प्रस्तावों पर चर्चा होगी। प्रस्तावों में सबसे अहम सोहराय पर्व पर दो दिनों के अवकाश को स्वीकृत करने से जुड़ा प्रस्ताव है। जनजातीय समुदाय के लिए यह पर्व अत्यधिक महत्वपूर्ण है। दूसरी ओर झारखंड पंचायती राज अधिनियम 2001 के तहत पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम 1996, पेसा एक्ट को लेकर भी नियमावली को कैबिनेट से मंजूरी मिल सकती है।
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पेसा के तहत होंगे यह बदलाव
- ग्राम सभा को शक्तियां मिलेगी। साधारणतया हर राजस्व ग्राम के लिए एक ग्राम सभा होगी। छोटे गांवों या आवासों के समूह में समाविष्ट समुदाय परंपराओं और रूढ़ियों के अनुसार कार्यकलापों का प्रबंध करते हैं।
- ग्राम सभा से उच्चतर स्तर (बहुस्तरीय) की सभा, चाहे वह जिस नाम से जाना जाता हो भी इस व्यवस्था का अभिन्न अंग रहेगा।
- ग्राम सभा की बैठक माह में एक बार जरूर होगी। ग्राम सभा के सदस्यों की कुल संख्या के 1/10 सदस्यों या 50 सदस्यों जो कम हो, के लिखित अपेक्षा किए जाने पर उपायुक्त की ओर से ग्राम सभा की बैठक ऐसी अपेक्षा के 7 दिनों के अंदर बुलाई जा सकेगी।
- ग्राम सभा के कुल सदस्यों की संख्या के एक तिहाई सदस्यों की संख्या कोरम के लिए अनिवार्य है। मगर, इन एक तिहाई सदस्यों की संख्या में भी एक तिहाई महिला सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य रहेगी।
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झामुमो लंबे समय से यह कानून लाना चाह रहा
यह एक्ट पेशा कानून से जुड़ा हुआ है। झामुमो लंबे समय से इस कानून के लागू होने का समर्थन कर रहा है। माना जा रहा कि इस बैठक में इस पर फैसला लिया जा सकता है। पेशा कानून के लागू होने से आदिवासी क्षेत्रों में स्वशासन को मजबूती मिलने की उम्मीद है। ग्राम सभाओं को अधिक अधिकार भी प्राप्त होंगे। यह जनजातीय नीति के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है।
