कर्ज लेकर एयर एंबुलेंस किराए पर लिया, साथ में मिली मौत, झारखंड हादसे के बाद सामने आई दर्दनाक कहानी
Chatra Plane Crash: जान बचाने के लिए संजय के परिवार ने करीब 8 लाख रुपये का कर्ज लेकर एयर एंबुलेंस का इंतजाम किया था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। चतरा में हुए हादसे ने सब कुछ खत्म कर दिया।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
झारखंड में क्रैश एयर एंबुलेंस, फोटो- सोशल मीडिया
Jharkhand Air Ambulance Crash: झारखंड के चतरा में सोमवार शाम हुआ एयर एंबुलेंस क्रैश केवल एक तकनीकी हादसा नहीं, बल्कि एक परिवार की उम्मीदों का सामूहिक अंत बन गया। रांची से दिल्ली जा रहे विमान में सवार झुलसे हुए मरीज, उनकी पत्नी और मेडिकल टीम सहित सभी 7 लोगों की मौत ने कई घर उजाड़ दिए हैं।
लातेहार के चंदवा निवासी संजय साव पलामू के बकोरिया में एक ढाबा चलाते थे। चार दिन पहले उनके ढाबे में भीषण आग लग गई थी, जिसमें वे गंभीर रूप से झुलस गए थे। रांची के देवकमल अस्पताल में इलाज के बाद उनकी नाजुक हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल रेफर कर दिया था। परिवार के पास इतने पैसे नहीं थे कि वे तुरंत एयर एंबुलेंस का खर्च उठा सकें।
आठ लाख कर्ज लेकर बुक की थी एयर एंबुलेंस
उन्होंने अपनी जमीन बेचने का फैसला किया, लेकिन तुरंत ग्राहक न मिलने पर रिश्तेदारों, दोस्तों और भारी ब्याज पर पैसा लेकर करीब 8 लाख रुपये का इंतजाम किया था। उन्हें उम्मीद थी कि दिल्ली में बेहतर इलाज से संजय ठीक हो जाएंगे, लेकिन यह कोशिश उनके पूरे परिवार के लिए काल बन गई।
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उड़ान के 24 मिनट बाद टूटा संपर्क
रेड बर्ड एविएशन की एयर एंबुलेंस (बीचक्राफ्ट C-90) ने सोमवार शाम 7:10 बजे रांची से दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी。 सब कुछ योजना के अनुसार चल रहा था, लेकिन रात करीब 7:34 बजे अचानक इस फ्लाइट का एटीसी से संपर्क टूट गया। इसके कुछ ही समय बाद चतरा जिले की कसारी पंचायत के करमटांड़ जंगल में विमान क्रैश होने की खबर आई। सूचना मिलते ही चतरा एसपी सुमित अग्रवाल के निर्देश पर जिला प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक विमान में सवार सातों लोगों की जान जा चुकी थी।
दो मासूम हुए अनाथ
इस हादसे ने 13 वर्षीय शिवम और 17 वर्षीय शुभम के सिर से माता-पिता का साया हमेशा के लिए छीन लिया है। संजय साव के परिवार का संघर्ष काफी पुराना और दर्दनाक रहा है। वर्ष 2004 में नक्सलियों ने उनके पिता की हत्या कर दी थी, जिसके बाद परिवार भय के माहौल में चंदवा आकर बस गया था। संजय ने कड़ी मेहनत से ढाबा चलाकर अपनी नई दुनिया बसाई थी और वे अपने मिलनसार स्वभाव के लिए जाने जाते थे। आज उसी घर के आंगन में सन्नाटा है। हादसे में संजय की पत्नी अर्चना देवी और 17 साल के ध्रुव कुमार की भी मौत हो गई।
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संजय साव पांच भाइयों में दूसरे स्थान पर थे और उनके एक छोटे भाई की मौत पहले ही गलत इलाज के कारण हो चुकी थी। अब उनकी मां चिंता देवी और दो बेटे इस दोहरे दुख और भारी कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं।
