पहलगाम हमले की पहली बरसी पर छावनी बनी कश्मीर घाटी, मंजर याद कर आज भी सिहर उठता है भावनगर का ये परिवार

Pahalgam Terror Attack Anniversary: पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी पर जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। घाटी में हाई अलर्ट के बीच सेना चप्पे-चप्पे पर कड़ी निगरानी रख रही है।
Pahalgam terror attack anniversary
प्रतीकात्मक फोटो, सोर्स- सोशल मीडिया
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High Alert in J&K: जम्मू-कश्मीर की शांत वादियों में आज एक बार फिर सतर्कता का माहौल दिखा है। पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम की खूबसूरत बैसरन घाटी में जो खौफनाक मंजर देखा गया था, उसकी आज पहली बरसी है। उस हमले ने न केवल कश्मीर बल्कि पूरे हिंदुस्तान को हिलाकर रख दिया था।

आज जब देश उन मासूमों को याद कर रहा है जिन्होंने अपनी जान गंवाई, तब पूरी घाटी को एक अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है। खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट के बाद सुरक्षा बल किसी भी तरह की लापरवाही बरतने के मूड में नहीं हैं और चप्पे-चप्पे पर जवानों की तैनाती कर दी गई है।

चप्पे-चप्पे पर कड़ी निगरानी

आतंकी हमले की पहली बरसी को देखते हुए पूरे केंद्र शासित प्रदेश में हाई अलर्ट घोषित किया गया है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, धार्मिक स्थलों, पर्यटन केंद्रों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा काफी बढ़ा दी गई है। विशेष रूप से उन पर्यटन स्थलों पर कड़ी नजर रखी जा रही है जिन्हें पिछले साल के हमले के बाद अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा था।

नियंत्रण रेखा से लेकर आंतरिक इलाकों तक तलाशी अभियान चलाए जा रहे हैं। सीमा पार से घुसपैठ की आशंका को देखते हुए एंटी-इनफिल्ट्रेशन ग्रिड को भी पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है। जंगलों और संदिग्ध इलाकों में ड्रोन के जरिए आसमान से नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत पकड़ा जा सके। नेशनल हाईवे पर आने-जाने वाली हर गाड़ी की सघन तलाशी ली जा रही है ताकि सुरक्षा व्यवस्था में कोई सेंध न लगा पाए।

बैसरन घाटी का वो खौफनाक मंजर

पिछले साल 22 अप्रैल 2025 को आतंकियों ने मानवता की सारी हदें पार कर दी थीं। उस दिन बैसरन घाटी में आतंकियों ने पहली बार पर्यटकों से उनका धर्म पूछकर उन्हें अपना निशाना बनाया था। इस कायराना हमले में कुल 26 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें से 25 निर्दोष पर्यटक थे। गुजरात के भावनगर से आया एक हंसता-खेलता परिवार इस त्रासदी का सबसे बड़ा शिकार बना। यतीश भाई परमार और उनके बेटे स्मित परमार ने आतंकियों की गोलियों के सामने अपनी जान गंवा दी।

आज एक साल बीत जाने के बाद भी उस परिवार के जख्म हरे हैं। यतीश की पत्नी काजलबेन आज भी उस गहरे सदमे से उबर नहीं पाई हैं और मानसिक अवसाद के कारण अस्पताल में भर्ती हैं। उनके परिवार के लिए यह एक साल किसी बुरे सपने जैसा रहा है, जहां हर दिन अपनों को खोने का गम और वह खौफनाक मंजर आंखों के सामने रहता है।

ऑपरेशन सिंदूर और आतंकियों के सफाए की पूरी कहानी

पहलगाम हमले के बाद भारतीय सेना ने निर्णायक कार्रवाई करने का फैसला किया। सेना ने आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर छेड़ा और पिछले एक साल में पूरे जम्मू-कश्मीर में 46 आतंकवादियों को मिट्टी में मिला दिया। इस सफलता में सबसे बड़ी उपलब्धि ऑपरेशन महादेव थी, जिसके दौरान सुरक्षा बलों ने उन तीनों आतंकियों को मार गिराया जो सीधे तौर पर पहलगाम हमले में शामिल थे। मारे गए आतंकी लश्कर-ए-तैयबा के 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' से जुड़े थे। इसके अलावा जैश-ए-मोहम्मद के कई खतरनाक कमांडरों को भी किश्तवाड़, उधमपुर और कठुआ के जंगलों में ढेर किया गया है।

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