राज्य का दर्जा बहाली की बात रुकी नहीं, CM बोले- बस विधानसभा में चर्चा नहीं करना चाहता
जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे की बहाली पर असर की बात हो रही है, लेकिन CM अब्दुल्ला ने साफ किया कि बातचीत जारी है। उन्होंने यह मुद्दा नीति आयोग की बैठक में भी उठाया और विधानसभा में चर्चा न करना यह उनका निजी फैसला था।
- Written By: सौरभ शर्मा
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (फोटो- सोशल मीडिया)
श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद यह चर्चा जोरों पर है कि क्या इसका असर राज्य के विशेष दर्जे की बहाली से जुड़ी बातचीत पर पड़ा है। इस बीच, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने साफ किया है कि इस हमले के बावजूद राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर बातचीत पूरी तरह जारी है और इसमें कोई रुकावट नहीं आई है। उनका कहना है कि नीति आयोग की बैठक में भी उन्होंने यह मुद्दा मजबूती से उठाया है। बस, विधानसभा के विशेष सत्र में इस विषय पर चर्चा न करने का निर्णय उनका निजी था।
पर्यटन को लेकर भी मुख्यमंत्री ने अहम बात रखी। उन्होंने कहा कि घाटी की सुंदरता का अनुभव सबसे पहले कश्मीरियों को ही लेना चाहिए। उन्होंने स्थानीय लोगों को प्रेरित किया कि वे अपने परिवारों के साथ पर्यटन स्थलों की सैर करें, जिससे इन जगहों को लेकर जागरूकता बढ़े और पर्यटन गतिविधियों को मजबूती मिले। उन्होंने कहा कि सिर्फ प्रचार से नहीं, बल्कि स्थानीय भागीदारी से पर्यटन को असली मजबूती मिलती है।
राज्य का दर्जा बहाली की प्रक्रिया जारी है
उमर अब्दुल्ला ने गुलमर्ग में मीडिया से बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि राज्य का दर्जा बहाल करने की प्रक्रिया पर आतंकी हमले का कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने हाल ही में नीति आयोग की बैठक में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने कहा कि केवल एकमात्र बात जो उन्होंने नहीं की, वह थी विधानसभा के विशेष सत्र में इस मुद्दे पर चर्चा करना, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि बहाली की बातचीत थम गई है।
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घाटी में पर्यटन को लेकर दिया अहम संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि कश्मीर के टूरिस्ट प्लेस को लेकर सबसे पहले कश्मीरियों को जागरूक होना चाहिए। उन्होंने स्थानीय लोगों से अपील की कि वे घाटी के पर्यटन स्थलों की सैर करें और इन जगहों को प्रचार-प्रसार के साथ-साथ अपनी उपस्थिति से भी जीवंत करें। उन्होंने माना कि पर्यटन का असली विकास तभी होगा जब स्थानीय लोग स्वयं इसमें भागीदारी निभाएंगे।
