20 फरवरी को है ‘विश्व सामाजिक न्याय दिवस’, जानिए इस विशेष दिन को मनाने का उद्देश्य और इसका इतिहास
- Written By: दीपिका पाल
विश्व 'सामाजिक न्याय दिवस' 2024 (सोशल मीडिया)
सीमा कुमारी
नवभारत डिजिटल डेस्क: 20 फरवरी को दुनियाभर में विश्व ‘सामाजिक न्याय दिवस’ (World Day of Social Justice) के रूप में मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य सामाजिक अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना और विभिन्न समुदायों को एक साथ लाना है। यह दिन गरीबी, लिंग, शारीरिक भेदभाव, निरक्षरता और धार्मिक भेदभाव को खत्म करने के लिए जागरूकता भी बढ़ाता है। इस प्रकार, इस पहल के परिणामस्वरूप सामाजिक रूप से एकीकृत समाज का निर्माण हो सकता है।
सच तो यह है कि अभी भी हम इस लक्ष्य उद्देश्य से कोसों दूर हैं। सामाजिक न्याय की परिकल्पना यथार्थ में तब तब्दील होगी जब समाज के हर वर्ग का व्यक्ति भय, शोषण, अन्याय और भेदभाव मुक्त होगा। उसके पास बेहतर आजीविका और सामाजिक सुरक्षा होगी। ऐसा तभी संभव है जब हम अपने ऐसे सामूहिक और अकेले प्रयासों में तेजी लाएंगे जो समाज को प्रेरित करते हैं। आइए जानें विश्व सामाजिक न्याय दिवस का इतिहास और उद्देश्य के बारे में-
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इतिहास
जानकारों के अनुसार, ‘विश्व सामाजिक न्याय दिवस’, दुनिया भर में मनाए जाने वाला एक ऐसा दिन है जो सामाजिक न्याय के विषयों पर प्रकाश डालने के साथ-साथ, समाज में इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है।यह दिन दुनिया में बढ़ते भेदभाव जैसे गरीबी, लिंग, शारीरिक भेदभाव और धार्मिक भेदभाव को खत्म करने का प्रयास करता है। हर वर्ष इस दिन को 20 फरवरी को मनाया जाता है।
विश्व सामाजिक न्याय दिवस के इतिहास पर प्रकाश डाला जाए तो आप पाएंगे कि वर्ष 1995 में कोपेनहेगन, डेनमार्क में आयोजित विश्व शिखर सम्मेलन में 100 से अधिक राजनीतिक नेताओं ने गरीबी और पूर्ण रोजगार के खिलाफ लड़ने और सुरक्षित समाज के लिए भी काम करने का संकल्प लिया था। जिसके 10 साल बाद, संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों ने फरवरी 2005 में न्यूयॉर्क में कोपेनहेगन की घोषणा और सामाजिक विकास के लिए कार्रवाई के कार्यक्रम की समीक्षा की गई थी।
‘विश्व सामाजिक न्याय दिवस’ का क्या है, उद्देश्य
फिर 26 नवंबर 2007 को, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 20 फरवरी को वार्षिक विश्व सामाजिक न्याय दिवस के रूप में घोषित किया गया था, जिसके बाद 2009 में विश्व सामाजिक न्याय दिवस पहली बार मनाया गया था। इस दिन का स्पष्ट उद्देश्य दुनिया भर के विभिन्न समुदायों को एक साथ लाना और आपसी मतभेद मिटाकर, सामाजिक न्याय के प्रति समाज को जागरूक करना है।
दुनिया भर में इस दिन लोग कई तरह का कार्यक्रम कर लोगों को जागरूक किया जाता है। इस दिवस को कई तरह के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए भी बनाया गया है। इस दिन नस्ल, लिंग, धर्म, जाति इत्यादि के आधार पर बांटे लोगों को एकजुट किया जाता है। इसके अलावा, लोगों के बीच बढ़ रही सामाजिक दूरी को कम करने के लिए उनसे विभिन्न मुद्दों पर बातचीत भी की जाती है।
भारत सरकार भी उठा रही है प्रभावी कदम
हर साल दुनिया के कई देशों में लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य इस दिन को अवसर के रूप में मनाया जाता है। वहीं, भारत ने भी इस ओर कई प्रभावी कदम उठाया है। भारतीय संविधान बनाने के दौरान देश में सामाजिक न्याय का प्रमुखता से ध्यान रखा गया था। वहीं, हमारे संविधान में सामाजिक दूरी को खत्म करने के लिए भी कई प्रावधान मौजूद हैं। आपको बता दें कि भारत सरकार भी संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर इन सामाजिक मुद्दों को खत्म करने की ओर प्रभावी कदम उठा रही है।
