परिसीमन के बाद दक्षिण भारत की सीटें घटेंगी नहीं बल्कि बढ़ेंगी...लोकसभा में अमित शाह ने समझाया पूरा गणित

Amit Shah Statement: अमित शाह ने संसद में खत्म किया दक्षिण भारत का डर। बताया कैसे परिसीमन के बाद 129 से बढ़कर 195 हो जाएंगी दक्षिणी राज्यों की सीटें, जानिए पूरा गणित।
Amit Shah Statement In Loksabha
अमित शाह (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Amit Shah On Delimitation In Lok Sabha: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में परिसीमन को लेकर उठ रही आशंकाओं पर स्पष्ट जवाब देते हुए कहा कि दक्षिण भारत के राज्यों का प्रतिनिधित्व कम नहीं होगा बल्कि बढ़ेगा। उन्होंने विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे सियासी भ्रम को खारिज करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य सभी राज्यों को संतुलित प्रतिनिधित्व देना है।

लोकसभा में संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक 2026 पर चर्चा के दौरान शाह ने कहा कि कुछ विपक्षी दल यह धारणा बना रहे हैं कि इन विधेयकों से दक्षिणी राज्यों की सीटें घट जाएंगी। उन्होंने साफ किया कि यह पूरी तरह गलत है और वास्तविक आंकड़े इसके विपरीत हैं।

राज्यों के आंकड़ों से समझाया पूरा गणित

अमित शाह ने उदाहरण देते हुए बताया कि कर्नाटक में वर्तमान में 28 लोकसभा सीटें हैं, जो परिसीमन के बाद बढ़कर 42 हो जाएंगी। इसी तरह आंध्र प्रदेश की सीटें 25 से बढ़कर 38 और तेलंगाना की 17 से बढ़कर 26 हो जाएंगी। तमिलनाडु के लिए उन्होंने कहा कि मौजूदा 39 सीटें बढ़कर 59 हो जाएंगी, जिससे राज्य का प्रतिनिधित्व और मजबूत होगा। केरल की सीटें भी बढ़कर 30 हो जाएंगी। शाह के अनुसार, दक्षिणी राज्यों का कुल प्रतिनिधित्व 129 से बढ़कर 195 सीटों तक पहुंच जाएगा।

कुल प्रतिनिधित्व में भी होगा इजाफा

अमित शाह ने बताया कि कुल मिलाकर अभी दक्षिणी राज्यों से 129 लोकसभा सदस्य आते हैं और उनका प्रतिनिधित्व 23.76 प्रतिशत है, जो 50 प्रतिशत वृद्धि के बाद 195 सीट और 23.97 प्रतिशत यानी 24 प्रतिशत हो जाएगा। अमित शाह ने आगे कहा कि इसलिए प्रतिनिधित्व कम नहीं हो रहा, बढ़ रहा है।

परिसीमन आयोग पर उठे सवालों पर सफाई

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी द्वारा परिसीमन आयोग में संभावित पक्षपात की आशंका पर शाह ने कहा कि सरकार ने कानून में कोई बदलाव नहीं किया है। उन्होंने कहा कि वही प्रावधान लागू किए गए हैं जो पहले से मौजूद थे। साथ ही उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि यदि पहले किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई होगी तो वर्तमान सरकार ऐसा नहीं करेगी। कुल मिलाकर, सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि परिसीमन का उद्देश्य क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करना है, न कि किसी राज्य का प्रतिनिधित्व कम करना।

2029 से पहले नहीं होगा लागू

विपक्ष द्वारा यह आरोप लगाए जाने पर कि इन विधेयकों को आगामी चुनावों को प्रभावित करने के लिए लाया गया है, शाह ने साफ किया कि परिसीमन आयोग की रिपोर्ट संसद और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही लागू होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि 2029 के लोकसभा चुनाव तक सभी चुनाव वर्तमान व्यवस्था के तहत ही कराए जाएंगे।

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