पहली महिला डाॅक्टर आनंदीबाई जोशी (डिजाइन फोटो)
नवभारत डेस्क: आज पूरी दुनिया में कई महिलाएं कड़ी मेहनत और पढ़ाई के बाद अच्छी और उच्च रैंकिंग वाली नौकरियां कर रही हैं। महिलाओं की स्थिति में बदलाव लाने में इतिहास की कई नायिकाओं की भूमिका अहम है। भले ही आज महिलाएं मेडिकल की पढ़ाई कर रही हैं और मेडिकल की डिग्री हासिल कर रही हैं, इंजीनियर बन रही हैं, लेकिन इन क्षेत्रों से जुड़कर भविष्य में महिलाओं के लिए रास्ता खोलने वाली और प्रेरणा बनने वाली महिलाओं की भूमिका अहम रहेगी।
जिस दौर में महिलाओं को घर से बाहर निकलने की भी इजाजत नहीं थी, उस दौर में विदेश जाकर मेडिकल की पढ़ाई करने और भारत की पहली महिला डॉक्टर बनने का श्रेय आनंदीबाई गोपालराव जोशी को जाता है।
8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है। ऐसे में हम आपको कुछ ऐसी महिलाओं के कहानी बता रहे हैं जिन्होंने महिलाओं के उत्थान के लिए काम किया और आदर्श बनीं। आइए जानते हैं देश की पहली महिला डॉक्टर आनंदी बेन गोपालराव जोशी के बारे में…
आनंदी बेन जोशी का जन्म 31 मार्च 1865 को पुणे के एक जमींदार परिवार में हुआ था। आनंदी का असली नाम यमुना था, जो उनके माता-पिता ने रखा था, लेकिन शादी के बाद उनके ससुराल वालों ने उन्हें आनंदी कहना शुरू कर दिया। उन दिनों शादी के बाद लड़कियों का सरनेम ही नहीं बल्कि नाम भी बदल जाता था।
ब्रिटिश शासकों ने महाराष्ट्र में जमींदारी प्रथा को खत्म कर दिया था। जिसके बाद आनंदी के परिवार की हालत खराब हो गई। आर्थिक तंगी से गुजर रहे परिवार ने आनंदी की शादी महज 9 साल की उम्र में गोपालराव से कर दी। गोपाल राव की उम्र 25 साल थी और उनकी पहली पत्नी की मौत हो चुकी थी। गोपाल राव आनंदी से 16 साल बड़े थे।
हालांकि, उनके पति और ससुराल वालों ने आनंदी को बहुत प्यार से रखा। आनंदी 14 साल की उम्र में मां बन गई। लेकिन उनका नवजात बच्चा एक गंभीर बीमारी से पीड़ित था, जिसके कारण जन्म के 10 दिन बाद ही उसकी मौत हो गई। बच्चे को खोने का दर्द आनंदी के लिए असहनीय था, लेकिन उन्होंने ठान लिया था कि किसी भी बच्चे को बीमारी से नहीं मरने देंगी।
इस लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए आनंदी ने डॉक्टर बनने का फैसला किया और अपने पति को अपनी इच्छा बताई। उनके पति ने आनंदी का साथ दिया। लेकिन समाज और उनके अपने परिवार ने आनंदी की आलोचना शुरू कर दी। इन सबके बावजूद गोपालराव ने आनंदी को शिक्षा के लिए मिशनरी स्कूल में भेजा। फिर उन्होंने कलकत्ता से संस्कृत और अंग्रेजी की पढ़ाई की।
पहली महिला डाॅक्टर आनंदीबाई जोशी (सोर्स: एक्स@Vinod_r108)
1880 में गोपालराव ने एक मशहूर अमेरिकी मिशनरी को पत्र लिखकर अमेरिका में मेडिकल की पढ़ाई के बारे में सारी जानकारी जुटाई। उनका परिवार और समाज उनकी पढ़ाई से सहमत नहीं था, इसलिए उनके विदेश जाकर पढ़ाई करने का काफी विरोध होना लाजिमी था। लेकिन आनंदी की जिद और पति के सहयोग ने किसी को भी उनके लक्ष्य के आड़े नहीं आने दिया।
आनंदी ने पेंसिलवेनिया के महिला मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया। इसके लिए उन्होंने अपने सारे गहने बेच दिए। इस कदम में कुछ लोगों ने आनंदी का साथ दिया और उन्हें 200 रुपये की मदद की।
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आनंदी ने महज 19 साल की उम्र में एमडी की डिग्री हासिल की। यह डिग्री पाने वाली वह पहली भारतीय महिला थीं। बाद में आनंदी बाई भारत लौट आईं और कोल्हापुर स्टेट के अल्बर्ट एडवर्ड अस्पताल के महिला वार्ड की प्रभारी डॉक्टर नियुक्त हुईं। लेकिन अपनी मेडिकल प्रैक्टिस के दौरान वह टीबी की शिकार हो गईं। 26 फरवरी 1887 को महज 22 साल की उम्र में आनंदीबाई की इस बीमारी के कारण मौत हो गई।