-
शुक्र, 24 जुलाई 2026 ई-पेपर
Top News
- Hindi News »
- India »
- Why Sir Row In West Bengal Mamata Banerjee Political Crisis Explained
SIR पर सवाल क्यों…पश्चिम बंगाल में बवाल क्यों? 2002 में ममता ने किया था समर्थन अब डोल रहा सिंहासन!
- Written By: अभिषेक सिंह
SIR Row in West Bengal: चुनाव आयोग द्वारा 12 राज्यों में शुरू किए गए मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण कार्यक्रम (Special Intensive Revision) को लेकर हो रहे बवाल के पीछे एक नहीं बल्कि कई कारण हैं।

ममता बनर्जी (कॉन्सेप्ट फोटो-डिजाइन)
Protest Against SIR: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण कार्यक्रम यानी SIR को लेकर जमकर बवाल मचा हुआ है। राज्य में सत्ताधारी पार्टी के सियासी विरोध के बीच अब बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) भी सड़क पर उतर आए हैं। सोमवार को राजधानी कोलकाता में बीएलओ ने निर्वाचन आयोग का कार्यालय घेर लिया। हालात ऐसे हो गए कि उन्हें संभालने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती करनी पड़ी। इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि SIR पर सवाल क्यों है और पश्चिम बंगाल में इतना बवाल क्यों है?
चुनाव आयोग द्वारा शुरू किए गए मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण कार्यक्रम (Special Intensive Revision) को लेकर हो रहे बवाल के पीछे एक नहीं बल्कि कई कारण हैं। वो कारण क्या हैं? पश्चिम बंगाल में बवाल ज्यादा क्यों मचा हुआ है? एसआईआर का सियासी नफा-नुकसान किसे होने वाला है? इन सभी सवालों के जवाब हम आपको इस रिपोर्ट में देने का प्रयास करेंगे। तो चलिए जानते हैं…
1 करोड़ से ज्यादा फर्जी वोटर बाहर होंगे!
विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि SIR मुख्य रूप से मुसलमानों को टारगेट करता है। बिहार में, SIR से 60 लाख नाम हटा दिए गए, जिनमें से ज्यादातर मुस्लिम थे, जिससे बंगाल में डर का माहौल बन गया। वेरिफिकेशन से मुर्शिदाबाद (70% मुस्लिम आबादी), मालदा (55%), और उत्तरी दिनाजपुर जैसे मुस्लिम-बहुल ज़िलों में माइग्रेशन बढ़ा है। बीजेपी का दावा है कि इससे 10 मिलियन नकली वोटर (मुस्लिम घुसपैठिए भी शामिल) हटेंगे।
सम्बंधित ख़बरें
पेपर लीक के खिलाफ खुद आंदोलन कर चुके हैं धर्मेंद्र प्रधान, लाठीचार्ज में हुए थे घायल; क्या है वो 1997 की घटना?
खंडवा : ओंकारेश्वर में भारतीय जनता पार्टी को लगा बड़ा झटका, कई कार्यकर्ताओं ने थामा कांग्रेस का हाथ
छात्रों पर पुलिसिया बर्बरता के खिलाफ BJP के वरिष्ठ नेता, मुरली मनोहर ने युवतियों पर बल प्रयोग को बताया गलत
भाजपा विधायकों पर फेंके गए अंडे! कर्नाटक राज्यपाल से BJP ने लगाई सुरक्षा की गुहार, कांग्रेस पर साधा निशाना
TMC के मुस्लिम वोटबैंक पर असर तय
बिहार में राहुल गांधी ने SIR को मुद्दा बनाने की कोशिश की, लेकिन तेजस्वी यादव ने कभी इस पर ध्यान नहीं दिया। हालांकि, बंगाल के हालात बिहार से अलग हैं। बंगाल में 70 मिलियन से ज़्यादा वोटर हैं, और 5-10% नाम हटाने से टीएमसी के मुस्लिम वोट बैंक पर गहरा असर पड़ना तय है।
पिछले चुनाव में क्या कुछ हुआ था?
जिस तरह से बीजपी बंगाल में लगातार मज़बूत हो रही है, उससे लगता है कि इस बार कुछ परसेंट वोट भी टीएमसी की सरकार गिरा सकते हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने “खेला होबे” का नारा लगाकर बीजेपी को 77 सीटों (38 परसेंट वोट) पर रोक दिया, जबकि टीएमसी 48 फीसदी वोट के साथ 215 सीटें जीतने में कामयाब रही।
मतदाता सत्यापन करते हुए BLO (सोर्स- सोशल मीडिया)
हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 12 सीटें जीतीं और 38.7% वोट शेयर हासिल किया, जो साफ तौर पर हिंदू वोटरों में बढ़ती नाराज़गी का संकेत है। अब, अगर SIR की वजह से गैर-कानूनी बांग्लादेशी घुसपैठियों को टारगेट किया जाता है, तो यह पक्का है कि टीएमसी के वोट बैंक को नुकसान होगा।
अगर यह मुद्दा 2026 के विधानसभा चुनाव का बड़ा फोकस बन जाता है, तो टीएमसी को कमजोर होने से कोई नहीं रोक पाएगा। SIR का दूसरा फेज 4 नवंबर, 2025 को शुरू हो गया है, जिसमें बूथ लेवल ऑफिसर वोटर लिस्ट को वेरिफाई करने के लिए घर-घर पहुंच रहे हैं। बंगाल में 7 करोड़ से ज्यादा वोटर हैं, और अगर 5-10% नाम हटा दिए जाते हैं (जैसा बिहार में हुआ), तो इसका टीएमसी के मुस्लिम वोट बैंक पर गहरा असर पड़ना तय है।
2002 में ममता ने किया था समर्थन
बंगाल में वोटर लिस्ट हमेशा से विवादित रही है। पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट की समस्या 1970 के दशक से है, जब बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के बाद लाखों शरणार्थी गैर-कानूनी तरीके से राज्य में बस गए थे। CPM सरकार (1977-2011) ने यह वोट बैंक बनाया था। 2002 के आखिर में, SIR के तहत 2.8 मिलियन नाम हटाए गए थे। बीजेपी नेताओं का कहना है कि उस समय ममता बनर्जी ने इसका स्वागत किया था। साफ है, ममता बनर्जी ने धीरे-धीरे सीपीएम के वोटरों पर कब्ज़ा कर लिया है। जो लोग पहले सीपीएम के लिए काम करते थे, वे अब ममता बनर्जी के लिए काम करने लगे हैं।
2026 चुनाव में BJP को होगा फायदा!
बीजेपी अब चाहती है कि SIR के तहत गैर-कानूनी वोटरों के नाम हटाए जाएं, जबकि ममता बनर्जी बिल्कुल नहीं चाहतीं कि ऐसा हो। SIR अब बंगाल में बीजेपी के लिए एक हथियार है। लेकिन जैसे 2002 में गैर-कानूनी वोटर्स को हटाने का सपोर्ट करने पर ममता बनर्जी को हमदर्दी मिली थी, वैसा ही इस बार बीजेपी के साथ भी हो सकता है। यह मुद्दा इतना सेंसिटिव है कि कोई भी नागरिक इस पर समझौता नहीं करना चाहता।
अगर SIR से 20-30 लाख नाम हटा दिए जाते हैं, तो टीएमसी के 85-90% मुस्लिम वोटों पर असर पड़ेगा। 2011 की जनगणना में बंगाल में 27% मुस्लिम थे, लेकिन अब उनके 31-33% होने का अनुमान है। टीएमसी को मुस्लिम-बहुल जिलों (मुर्शिदाबाद 70%, मालदा 55%) में 90% वोट मिलते हैं। SIR इन इलाकों से गैर-कानूनी नाम हटा देगा, जो टीएमसी के लिए नुकसानदायक है।
बीजेपी की तरफ शिफ्ट हुआ ‘मतुआ’
CAA की वजह से मतुआ समुदाय (बांग्लादेशी हिंदू शरणार्थी) बीजेपी की तरफ शिफ्ट हो गया है, क्योंकि ममता बनर्जी बार-बार कह चुकी हैं कि वह राज्य में CAA लागू नहीं होने देंगी। साफ है, SIR मतुआ वोटर्स को लेजिटिमेटाइज़ करेगा, लेकिन गैर-कानूनी मुस्लिम नाम हटाने से टीएमसी को नुकसान होगा।
यह भी पढ़ें: कोलकाता में चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर BLO का हंगामा, जमकर किया विरोध प्रदर्शन
यदि ऐसा होता है तो सीमावर्ती जिलों में टीएमसी को कम से कम 100 सीटों पर इस बार काफी मुश्किल आने वाली है। यही वजह है ममता बनर्जी और उनकी पार्टी लगातार इसका विरोध कर रही है। अन्य राज्यों में भी विपक्षी वोटबैंक पर अस पड़ने की संभावना है, यहीं वजह कि वहां भी कमोबेस विरोध देखने को मिल रहा है।
बीएलओ क्यों कर रहे हैं विरोध प्रदर्शन?
इसके अलावा SIR प्रक्रिया को लेकर BLO के विरोध के पीछे समय सीमा और वर्क प्रेशर बताया जा रहा है। जिन राज्यों में SIR हो रहा है, वहां बीएलओ की आत्महत्या के मामले लगातार प्रकाश में आ रहे हैं। सभी मामलों में चुनाव आयोग की तरफ से कम समय सीमा में अधिक काम करवाने की बात सामने आई। जिसके बाद चुनाव आयोग ने SIR के लिए निर्धारित समयसीमा में सात दिन का इजाफा भी किया है।
Why sir row in west bengal mamata banerjee political crisis explained
Get Latest Hindi News , Maharashtra News , Entertainment News , Election News , Business News , Tech , Auto , Career and Religion News only on Navbharatlive.com
लेटेस्ट न्यूज़
इराक में अमेरिकी सैन्य बेस पर ताबड़तोड़ हमला, कई धमाकों से कांपा इरबिल; पूरे खाड़ी क्षेत्र में बढ़ी टेंशन
Jul 24, 2026 | 02:34 PMप्यार पर किया भरोसा, गंवाई 31 करोड़ पाउंड की दौलत; जानिए टेनिस चैंपियन अरांत्सा सांचेज की दर्दनाक कहानी
Jul 24, 2026 | 02:31 PMकूटनीति के इतिहास में महिलाओं की कहानी, क्यों कहा जाता है ‘अच्छा व्यवहार करने वाली महिलाएं इतिहास नहीं रचती’
Jul 24, 2026 | 02:31 PMहम ऐसे नहीं देख सकते, जल्द कुछ करो; उग्र प्रदर्शन के बीच सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को लगाई फटकार
Jul 24, 2026 | 02:28 PMFlipkart Food Delivery: जोमैटो-स्विगी की बढ़ेगी टेंशन! फूड डिलीवरी मार्केट में एंट्री कर रहा है फ्लिपकार्ट
Jul 24, 2026 | 02:27 PMGadchiroli News: गडचिरोली में महाराष्ट्र बंद का व्यापक असर, छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन और रैलियां
Jul 24, 2026 | 02:23 PMपुणे में फर्जी रजिस्ट्री का बड़ा खुलासा: 22 अवैध पंजीयन, 19 बिल्डर और जमीन मालिकों पर कार्रवाई
Jul 24, 2026 | 02:14 PMवीडियो गैलरी

कौन है ADCP संदीप लांबा, जिसने CJP प्रोटेस्ट के दौरान महिला को जड़ा थप्पड़? वायरल VIDEO में देखें पूरा मामला
Jul 24, 2026 | 02:12 PM
1975 की तरह बर्बाद न करें करियर…BJP की छात्रों को नसीहत, बोली- जंतर-मंतर छोड़ पढ़ाई पर ध्यान दो; देखें VIDEO
Jul 23, 2026 | 10:48 PM
छोड़ना है तो अभी छोड़ो…मुंबई की सड़कों पर पुलिस से अकेले भिड़ गई ये एक्ट्रेस, Video वायरल
Jul 23, 2026 | 10:16 PM
भगत सिंह की राह पर युवा! पेपर लीक पर भड़का छात्र, कलेक्ट्रेट में फोड़ा बम, VIDEO वायरल
Jul 23, 2026 | 09:52 PM
29 साल पहले पेपर लीक के खिलाफ थे धर्मेंद्र प्रधान फिर आज उन्हीं पर सवाल क्यों? VIDEO
Jul 23, 2026 | 07:51 PM
200% तक टैरिफ, डोनाल्ड ट्रंप का सख्त ऐलान, क्या अमेरिका में महंगी होंगी भारतीय दवाएं- VIDEO
Jul 23, 2026 | 02:40 PM














