Explainer: कांग्रेस के प्रदर्शन के जवाब में BJP का काउंटर अटैक, देशभर में सड़कों पर उतरे कार्यकर्ता, आगे क्या?
BJP Protest: भाजपा ने कांग्रेस के विरोध प्रदर्शनों का जवाब देशव्यापी प्रदर्शन से दिया। जानिए सरकार की रणनीति, नैरेटिव बदलने की कोशिश, विपक्ष पर काउंटर अटैक और आगे क्या हो सकता है।
- Written By: अक्षय साहू
राहुल गांधी के खिलाफ सड़कों पर उतरी बीजेपी (AI जेनरेटेड इमेज)
BJP Protest Against Congress: भारतीय राजनीति के लिए बीते कुछ दिन काफी उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। राजधानी दिल्ली में पहले 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने हजारों छात्रों के साथ जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाला, इसके अगले ही दिन कांग्रेस समेत कई प्रमुख विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास के बाहर धरना-प्रदर्शन कर केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश की।
पिछले 12 सालों में मोदी सरकार ने अपनी पहचान एक ऐसी सरकार के रूप में बनाई है जो किसी भी राजनीतिक दबाव के सामने झुकती नहीं है। लेकिन हाल के घटनाक्रम को देखते हुए साफ नजर आ रहा है कि सरकार पहली बार दबाव में नजर आ रही है। वहीं आज भाजपा आज देशभर में कांग्रेस और राहुल गांधी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही है। आइए आपको बताते हैं कि भाजपा कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन करके क्या करना चाहती है? सरकार का अगला कदम क्या होगा?
कांग्रेस के खिलाफ भाजपा का काउंटर अटैक
भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार को दिल्ली, लखनऊ, भोपाल, पटना, जयपुर, हैदराबाद, बेंगलुरु समेत देश के कई बड़े शहरों में कांग्रेस और राहुल गांधी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए। भाजपा नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर हुए विपक्षी प्रदर्शन की आलोचना करते हुए इसे लोकतांत्रिक विरोध की सीमा से आगे बढ़कर ‘अराजकता’ बताया। बीजेपी का कहना है कि पीएम आवास जैसे संवेदनशील क्षेत्र के बाहर प्रदर्शन करना सुरक्षा व्यवस्था और संवैधानिक मर्यादाओं के खिलाफ है। इसी मुद्दे को आधार बनाकर पार्टी कांग्रेस को जनता के बीच घेरने की कोशिश कर रही है।
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पटना में कांग्रेस और बीजेपी नेताओं के बीच झड़प,खूब चलें लाठी-डंडे!#Bihar #BJP #Congress pic.twitter.com/fiunXzpi5c — SOURAV RAJ (@souravreporter2) July 22, 2026
हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा का यह प्रदर्शन केवल विरोध दर्ज कराने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे एक व्यापक राजनीतिक रणनीति भी है। उनका कहना है कि भाजपा विपक्ष के आंदोलन का जवाब उसी की भाषा में देने की कोशिश कर रही है ताकि राजनीतिक संदेश यह जाए कि केवल विपक्ष ही सड़क पर उतरकर सरकार पर दबाव नहीं बना सकता।
सरकार पर बढ़ते दबाव को कम करने का प्रयास
विश्लेषकों के मुताबिक सरकार भारी दबाव का सामना कर रही है। ऐसे में बीजेपी कांग्रेस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करके दो बड़े राजनीतिक लक्ष्य हासिल करना चाहती है।
- पहला, विपक्ष के प्रदर्शनों को ‘अराजक’ और ‘राजनीतिक स्टंट’ के रूप में पेश करना। यदि जनता के बीच यह धारणा बनती है कि विपक्ष का आंदोलन लोकतांत्रिक विरोध नहीं बल्कि राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने का प्रयास है, तो सरकार पर बन रहा दबाव काफी हद तक कम किया जा सकता है।
- दूसरा, भाजपा अपने कार्यकर्ताओं को भी सक्रिय संदेश देना चाहती है कि पार्टी केवल रक्षात्मक राजनीति नहीं करेगी बल्कि हर राजनीतिक हमले का जवाब मैदान में उतरकर देगी। यही कारण है कि विरोध प्रदर्शन केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहे बल्कि देशभर में आयोजित किए गए।
क्या भाजपा नैरेटिव बदलने की कोशिश कर रही है?
भारतीय राजनीति में पिछले कुछ सालों से यह देखा गया है कि चुनावी मुकाबले जितने संसद के भीतर लड़े जाते हैं, उससे कहीं अधिक राजनीतिक नैरेटिव के स्तर पर लड़े जाते हैं। ऐसे में भाजपा की कोशिश यह भी मानी जा रही है कि चर्चा का केंद्र विपक्ष के आरोपों से हटाकर कांग्रेस के प्रदर्शन और उसकी रणनीति पर ले जाया जाए।
राहुल गांधी को मनाने पहुंचे थे केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह (सोर्स- सोशल मीडिया)
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जब विपक्ष लगातार सरकार को घेरने की कोशिश करता है तो सत्ता पक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि वह बहस का विषय बदल दे। भाजपा का देशव्यापी प्रदर्शन इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। यदि सार्वजनिक चर्चा का केंद्र यह बन जाता है कि प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन उचित था या नहीं, तो विपक्ष जिन मुद्दों को प्रमुखता से उठाना चाहता है, वे पीछे छूट सकते हैं। इसलिए भाजपा इस पूरे विवाद को कानून-व्यवस्था और संवैधानिक मर्यादा से जोड़कर पेश कर रही है।
आगे भाजपा क्या कदम उठा सकती है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में भाजपा केवल सड़क पर प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगी। पार्टी अपने सांसदों, प्रवक्ताओं और सोशल मीडिया नेटवर्क के जरिए भी कांग्रेस के खिलाफ आक्रामक अभियान चला सकती है। माना जा रहा है कि भाजपा विभिन्न राज्यों में प्रेस कॉन्फ्रेंस, जनसभाएं और स्थानीय स्तर पर विरोध कार्यक्रम आयोजित कर विपक्ष के आंदोलन को राजनीतिक लाभ मिलने से रोकने की कोशिश करेगी। इसके अलावा संसद के भीतर भी कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठाए जा सकते हैं।
विपक्ष के खिलाफ देशव्यापी अभियान चला सकती है बीजेपी (सोर्स- सोशल मीडिया)
इसके अलावा छात्रों और विपक्षी दलों का आंदोलन आगे बढ़ता है, तो सरकार बातचीत और राजनीतिक जवाब-दोनों रास्तों पर साथ-साथ चल सकती है। एक ओर संवाद बनाए रखने की कोशिश होगी तो दूसरी ओर विपक्ष के आरोपों का राजनीतिक जवाब भी दिया जाएगा।
धर्मेंद्र प्रधान का क्या होगा?
सरकार की ओर से फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि वो केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ले सकते हैं। इसके अलावा मोदी सरकार हमेशा से ही खुद को एक मजबूत सरकार के तौर पर पेश करती आई है। इसके अलावा मोदी सरकार अब तक दबाव में इस्तीफा लेने से बचती आई है। ऐसे में इस बात की बहुत ही कम उम्मीद है कि सरकार उनसे इस्तीफा ले। हालांकि माना जा रहा है कि सरकार उनका मंत्रालय जरूर बदल सकती है।
आने वाले दिनों में और गरमा सकती है राजनीति
फिलहाल इतना साफ है कि देश की राजनीति एक नए टकराव के दौर में प्रवेश करती दिखाई दे रही है। एक तरफ विपक्ष सरकार पर लगातार दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, वहीं भाजपा भी अब खुलकर जवाबी रणनीति पर काम करती नजर आ रही है।
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आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष अपने आंदोलन को कितना आगे ले जा पाता है और भाजपा अपने काउंटर कैंपेन के जरिए राजनीतिक नैरेटिव को किस हद तक बदलने में सफल होती है। फिलहाल दोनों पक्ष सड़क से लेकर संसद तक एक-दूसरे पर बढ़त हासिल करने की कोशिश में जुटे हुए हैं, जिससे आने वाले दिनों में राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म होने की संभावना है।
