कैबिनेट मंत्री और राज्य मंत्री में क्या है अंतर? किसे मिलती है सबसे ज्यादा तनख्वाह
लोकसभा चुनाव के बाद मोदी सरकार के मंत्रिमंडल का गठन हो चुका है। विभागों की भी जिम्मेदारी सौंप दी गई है। अब सभी मंत्री अपनी जिम्मेदारियों को उठाने के लिए तैयार हैं। ऐसे में हमारे लिए यह जानना जरुरी है कि किस मंत्री की क्या जिम्मेदारी होती है
- Written By: शानू शर्मा
मोदी कैबिनेट (सौजन्यः सोशल मीडिया)
नवभारत डेस्क: लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद रविवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नरेंद्र मोदी को तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई है। उनके साथ-साथ 72 मंत्रियों को मंत्री पद का शपथ दिलाया गया। पीएम मोदी के अबतक के कार्यकाल में ये सबसे बड़ा मंत्रिमंडल है। पहली बार चुनाव जीतने के बाद पीएम मोदी ने 46 मंत्रियों के साथ शपथ ली थी। वहीं इसके बाद 2019 में 59 मंत्री को मौका मिला था। इस बार एनडीए गठबंधन के साथ सरकार बना रहे पीएम मोदी ने अपने मंत्रिमंडल में 30 कैबिनेट, 36 राज्य मंत्री और 5 राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के साथ शपथ लिए।
मंत्रिमंडल में कितने तरह के मंत्री
मंत्रिमंडल में तीन तरह के मंत्री होते हैं। जिसमें कैबिनेट, राज्य और राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) शामिल होते हैं। इनमें सबसे ज्यादा पावर कैबिनेट मंत्री को होता है। उसके बाद राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सबसे आखिरी में राज्य मंत्री आते हैं। राष्ट्रपति इस पूरे मंत्रिमंडल का गठन प्रधानमंत्री की सलाह पर करते हैं। कैबिनेट मंत्री वो मंत्री होते हैं जिन्हें प्रधानमंत्री को सीधा रिपोर्ट करना होता है। इनके ऊपर उन्हें सौंपा गया समूचे मंत्रालय की जिम्मेदारी होती है। एक कैबिनेट मंत्री को दो या उससे भी अधिक मंत्रालय दिए जा सकते हैं। उन्हें कैबिनेट की हर बैठक में आनी ही पड़ती है। किसी भी फैसले को कैबिनेट में ही फाइल किया जाता है।
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कैबिनेट मंत्री के बाद राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आते हैं। ये भी प्रधानमंत्री को सीधा रिपोर्ट करते हैं। उन्हें कैबिनेट मंत्री को रिपोर्ट नहीं करना होता है। उनके पास खुद का मंत्रालय होता है। राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों को कैबिनेट की बैठक में शामलि नहीं होना पड़ता है। वहीं कैबिनेट मंत्री के लिए राज्य मंत्री बनाया जाता है। ये सभी राज्य मंत्री कैबिनेट मंत्री को रिपोर्ट करते है। इन्हें एक से ज्यादा मंत्रालय की भी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। कैबिनेट मंत्री के ना रहने पर मंत्रालय की पूरी जिम्मेदारी राज्य मंत्री की होती है।
किसकी कितनी सैलरी
बता दें कि लोकसभा में हर सदस्य का वेतन तय होता है। इसके अलावा कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और राज्य मंत्रियों को बाकी सांसदों के मुकाबले अलग से एक भत्ता दिया जाता है। यह सबकुछ सैलरी एक्ट में लिखित होती है। लोकसभा सदस्यों को हर महीने 1 लाख रुपए बेसिक वेतन, 70 हजार निर्वाचन भत्ता और 60 हजार रुपे ऑफिस खर्च के लिए दिए जाते हैं। इसके अलावा संसद सत्र के दौरान हर दिन दो हजार रुपए डेली अलाउंस के रुप में दिया जाता है। इसके अलावा सत्कार भत्ता के रुप में प्रधानमंत्री को 3 हजार, कैबिनेट मंत्री को 2 हजार और राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) को 1 हजार दिया जाता है। वहीं राज्य मंत्री को 600 रुपए सत्तकार भत्ता के रुप में मिलते हैं। कुल मिलाकर देश के प्रधानमंत्री को दो लाख 33 हजार, वहीं एक लोकसभा सांसद को हर महीने दो लाख तीस हजार, कैबिनेट मंत्री को दो लाख 32 हजार और राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) को दो लाख 31 हजार और राज्य मंत्री को दो लाख तीस हजार और छह सौ रुपए मिलते हैं।
