सरकारी नौकरी का सपना देखने वाले लालू कैसे बने 'सरकार', पुलिस बहाली के दौर में हो गए थे फेल

लालू यादव अपने परिवार की गरीबी मिटाने के लिए सरकारी नौकरी का सपना देखते थे। हालांकि उनकी किस्मत उन्हें खुद सरकार बनाना चाहती थी।
Lalu Yadav
लालू यादव (सौजन्य सोशल मीडिया)
Published on: 
Updated on: 

बिहार: राजद सुप्रीमों और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव का आज 77 वां जन्मदिन है। अपने बेबाक अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले लालू यादव के जन्म दिन पर हम आपको उनसे जुड़ी खास कहानी बताएंगे। आज हम आपको बताएंगे कि आखिर लालू का नाम लालू कैसे और क्यों पड़ा। इससे पहले उन्हें किस नाम से बुलाया जाता था। साथ ही यह भी बताएंगे कि उनकी राजनीति में एंट्री कैसे हुई।

इस पूरी कहानी को लालू यादव की बहन गंगोत्री देवी ने एक इंटरव्यू के दौरान बताई थी। गंगोत्री बताती हैं कि हम सभी भाईयों में लालू सबसे छोटा और सबसे तेज बच्चा था। बचपन में वह थोड़ा गोलू सा दिखता था। वो कहती हैं कि उस समय हमारे घर में कई सारे भैंसे थी। जिसे चराने के लिए लालू कड़ी धूप में बाहर जाता था। जब लालू भैंस पर बैठकर वापस घर आता था तो उसका चेहरा बिल्कुल लाल हो जाता था। ऐसा चेहरा एक दिन उनके पिता कुंदन राय को दिखा था। जिसके बाद वो अपने बेटे को लालू नाम से बुलाने लगें। इससे पहले घर में सभी लोग उन्हें प्रसाद बुलाते थे।

गंगोत्री बताती हैं कि उनका लालू यादव के साथ सभी भाई-बहनों में सबसे ज्यादा बनता था। वो कहती है कि अगर हमें कोई परेशान करता था तो हम दोनों मिलकर उसकी पिटाई कर देते थे। जिसकी वजह से सभी भाई उन्हे बहन नहीं भाई मानते थे। वो कहते थे कि हम 6 नहीं सात भाई थे। लालू यादव भाईयों में सबसे छोटा और निडर बच्चा था। पिता के मना करने के बाद भी बाबू साहबों के खेत में चला जाता था।

राजनीति में नहीं आना चाहते थें लालू 

गोपालगंज के फुलवरिया में जन्म लेने वाले लालू कॉलेज के समय से ही राजनीति में काफी सक्रिय थे। हालांकि लालू कहते हैं कि उन्हें राजनीति कभी भी  उस तरीके समझ नहीं आई। वो बस अपने अलग अंदाज में बोलते थे और लोग उसके दिवाने हो जाते थे। लोग उनकी बातों को सुनना चाहते थें क्योंकि उनकी बातों में कभी कोई झिझक और डर नजर नहीं आता था।

फुलवरिया से पटना आए लालू यादव का एक ही सपना था कि कैसे भी उन्हें सरकारी नौकरी मिल जाए। जिससे की वो अपने परिवार की मदद कर पाएं। जिसके लिए उन्होंने पुलिस परीक्षा में दौर भी लगाई हालांकि उन्हें वहां कामयाबी नहीं मिली। इसके बाद उन्हें पटना पशु चिकित्सा महाविधालय के निचले दरजे के एक कलर्क का पद पाने में सफलता मिली। लालू अपनी नौकरी से खुश थे लेकिन उनकी किस्मत उन्हें कहीं और ले जाना चाहती थी। लालू यादव जेपी आंदोलन के समय से राजनीति में जम गएं। उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com