

Why Questions on PM Cares Fund: साल 2020 में जिस पीएम केयर्स फंड की शुरुआत केवल 2.25 लाख करोड़ रुपये से हुई थी, 31 मार्च 2025 तक उसमें 8,452 करोड़ रुपये जमा हो चुके थे। पीएम केयर्स फंड की ऑफिशियल वेबसाइट पर ये आंकड़े जारी किए गए हैं। हालांकि, 8,452 करोड़ रुपये जमा होने के बावजूद भी साल 2024-25 में इस फंड से सिर्फ 87.85 लाख रुपये ही खर्च हो सके हैं।
केंद्र सरकार ने मंगलवार, 18 अगस्त को पीएम केयर्स फंड के 2024-25 के ऑडिट किए गए अकाउंट को सार्वजनिक किए। आंकड़े सामने आते ही कई पुराने और नए सवाल फिर खड़े कर दिए हैं।
कोविड-19 जैसी महामारी से उत्पन्न किसी आपातकालीन या संकट की स्थिति से निपटने और प्रभावित लोगों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से 'पीएम केयर्स फंड' स्थापना की गई है। पीएम केयर्स फंड को एक सार्वजनिक सहयोग ट्रस्ट के रूप में पंजीकृत किया गया है।
इसका मकसद किसी पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी या किसी अन्य तरह की आपातकाल स्थिति, प्राकृतिक आपदा या संकट में किसी प्रकार की राहत या सहायता देना और सहयोग करना है। प्रधानमंत्री पीएम केयर्स फंड के पदेन अध्यक्ष हैं और रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री, भारत सरकार फंड के पदेन ट्रस्टी हैं।
विपक्षी दलों के नेताओं का आरोप है कि पिछले कुछ सालों में देश के कई इलाकों में बाढ़, चक्रवात, भूस्खलन और अन्य बड़ी प्रॉकृतिक आपदाएं आईं, फिर भी इस फंड का जरूरत से बेहद कम राशि का खर्च हुआ। डेटा के मुताबिक, फंड की आय और उसमें जमा राशि लगातार बढ़ती जा रही है। वहीं, खर्च काफी सीमित रहा है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब यह फंड खास तौर पर आपदा राहत के लिए बना है, तो जरूरत के वक्त इसका इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा लोगों को राहत पहुंचाने के लिए क्यों नहीं किया जा रहा है?
पीएम केयर्स फंड के ताजा ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024-25 में मिले कुल डोनेशन में से 479.04 करोड़ रुपये देश के भीतर से मिले, जबकि विदेशों से लगभग 92 लाख रुपये का दान मिला। इस फंड को दान के अलावा 475.14 करोड़ रुपये ब्याज के रूप में भी मिले, जिसमें से 469.37 करोड़ रुपये फिक्सड डिपॉजिट (FD) से और 5.76 करोड़ रुपये बैंक अकाउंट से आए। इके साथ ही इस फंड में 324.65 करोड़ रुपये उन एजेंसियों से रिटर्न में मिले, जिन्हें पहले किसी प्रोजेक्ट के लिए पैसा दिया गया था।
हालांकि, पैसा वापस करने वाली ये एजेंसियां कौन थीं और उन्होंने पैसे क्यों वापस किए, इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई है। इसके अलावा 13.49 लाख रुपये टीडीएस रिफंड के रूप में भी इस फंड में जुड़े। लेटेस्ट ऑडिट के अनुसार, फंड की कुल राशि में 93 प्रतिशत (7,846 करोड़ रुपये) फिक्सड डिपॉजिट में रखा गया है। लेकिन जहां इस फंड से पैसा खर्च करने की बात है, तो साल 2024-25 में महज 87.85 लाख रुपये ही खर्च किए गए।
इसमें 87.84 लाख रुपये पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन स्कीम और 451 रुपए 'बैंक चार्जे और एसएमएस चार्जे' पर खर्च हुए। पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन स्कीम के तहत किन कामों के लिए पैसा दिया गया इसकी जानकारी ऑडिट में नहीं दी गई है। लेकिन आज तक ये जानकारी सार्वजानिक नहीं की गई है कि इस फंड में अब तक पैसा कहां से आया है या किस-किस ने इस फंड को पैसा दान किया।
आईआईटी दिल्ली में कार्यरत प्रोफेसर रीतिका खेरा के हवाले से बीबीसी हिंदी ने लिखा कि पीएम केयर्स फंड पर्दानशीं पारदर्शिता है। सरकार फंड की ऑडिट की गई रिपोर्ट को सार्वजनिक करती है, लेकिन इसमें काफी देरी होती है और इसमें वास्तविक जानकारी भी नहीं होती। वहीं, आरटीआई कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज के मुताबिक, पीएम केयर्स फंड में पारदर्शिता सबसे बड़ी चिंता है। वे कहती हैं कि ये फंड आपदा के समय लोगों की मदद के लिए बनाया गया था। लेकिन फंड में पैसे कहां से आ रहे हैं और कहां खर्च हो रहे हैं इसकी कोई जानकारी लोगों को नहीं दी जा रही है।
अंजली भारद्वाज आगे कहती हैं कि हमारे देश में सूचना का अधिकार (RTI) कानून है, जिसकी मदद से लोग ऐसी तमाम जगहों से जानकारी ले सकते हैं, जिन्हें बड़े पैमाने पर जनता के पैसे से वित्तीय सहायता मिलती है। लेकिन पीएम केयर्स फंड को आरटीआई के दायरे से बाहर रखा गया है।
साल 2024-25 में पीएम केयर्स फंड में कुल 8,452 करोड़ रुपए जमा थे, लेकिन फंड से खर्च के लिए महज 87.85 लाख रुपये ही निकले। साल 2024-25 मुकाबले 2023-24 में 15.59 करोड़ रुपये, 2022-23 में 437.87 करोड़ रुपये, 2021-22 में 3,716.29 करोड़ रुपये और 2020-21 में 3,976.17 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
इन आंकड़ों से साफ पता चल रहा है कि फंड से खर्च की जा रही राशि में लगातार गिरावट आई है, जो कि उठ रहे सवालों के पीछे की मुख्य वजह है।