Explainer: दो दशक बाद मनरेगा का अंत, अब नए कलेवर में VB-G RAM G की शुरुआत; नए कानून में क्या-क्या खास?

VB-G RAM G Explained: केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए VB-G RAM G स्कीम के लिए कुल 95,692.31 करोड़ रुपये का बजट आवंटन किया है। राज्यों पर 40% सैलरी का बोझ एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
vb-g ram g vs mgnrega
वीबी-जी राम और मनरेगा में क्या अंतर, (AI जेनरेटेड इमेज)
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VB-G RAM G vs MGNREGA: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने करीब दो दशक पुरानी महात्मा गांधी नेशनल रोजगार गांरटी योजना (मनरेगा) को खत्म करते हुए नई रोजगार स्कीम 'वीबी-जी राम जी' की शुरुआत की है। ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरी आधारित रोजगार की गारंटी देने वाला यह नया कानून पूरे देश में आज 1 जुलाई 2026 से लागू हो गया। महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट 2005 एक भारतीय सामाजिक कल्याण उपाय था जिसका मकसद 'काम के अधिकार' की गारंटी देना था।

यह एक्ट 23 अगस्त 2005 को पास हुआ था और फरवरी 2006 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की UPA सरकार के तहत ग्रामीण विकास मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह द्वारा संसद में बिल पेश किए जाने के बाद इसे लागू किया गया था। इस बिल को मूल रूप से नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट (NREGA) के नाम से जाना जाता था।

 मनरेगा की जगह अब 'वीबी-जी राम जी'

विपक्ष के शोर-शराबे और हंगामे के बीच 2025 में लोकसभा और राज्यसभा द्वारा विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) एक्ट (VB-G RAM G) पास होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने इस मनरेगा योजना को रद्द कर दिया। नए कानून ने MGNREGA की जगह ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत एक अपडेटेड ग्रामीण रोजगार और आजीविका गारंटी फ्रेमवर्क लाया, जो 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू हो गया। हालांकि, मनरेगा की जगह लेने वाले वीबी-जी राम जो की लेकर आज भी लोगों के मन में सवाल है कि आखिर सरकार ने ऐसा क्यों किया...यह नया कानून पुराने मनरेगा से कैसे और कितना अलग है? आइए इस एक्सप्लेनर के जरिए सबकुछ आसान भाषा में समझते हैं।

1. फिक्स्ड न्यूनतम दिहाड़ी

मनरेगा के तहत अलग-अलग राज्यों में काम करने वाले मजदूरों के लिए अलग-अलग दिहाड़ी का प्रावधान था। कई राज्यों में यह 250 रुपये से भी कम थी और यह उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-AL) के आधार पर तय किया जाता था, जो कि बहुत ही जटिल और लंबी प्रक्रिया होती थी।

वीबी-जी राम जी कानून के तहत देशभर में काम करने वाले मजदूरों के लिए एक न्यूनतम बेस रेट का प्रावधान है। नए संशोधन के तहत देश के किसी भी राज्य में काम करने वाले मजदूरों की न्यूनतम दिहाड़ी 300 से कम नहीं होगी, जबकि हरियाणा, गोवा, केरल और सिक्कम जैसे राज्यों में यह 400 रुपये के पार तक जाएगी। नए कानून के तहत नेशनल लेवल पर औसत दिहाड़ी में सीधे 28 से 30 रुपये तक का इजाफा हुआ है।

2. रोजगार के दिनों की गारंटी

  • मनरेगा में कानूनी तौर पर एक वित्तीय वर्ष में सिर्फ 100 दिनों के अकुशल श्रम की गारंटी मिलती थी। सूखा या आपदा प्रभावित क्षेत्रों में ही इसे 150 दिन किया जाता था।
  • वीबी-जी राम जी में रोजगार के दिनों की सीमा को मनरेगा के 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। यानी अब ग्रामीण परिवारों को साल में 25 दिन अधिक काम और अधिक कमाई का मौका मिलेगा।

3. बजट और वित्तीय ढांचा

  • मनरेगा डिमांड ड्रिवेन (मांग-आधारित) स्कीम होने के बावजूद अक्सर फंड की कमी और राज्यों को बजट जारी होने में देरी की शिकायतें रहती थीं, जिससे मजदूरों का पेमेंट महीनों तक अटका रह जाता था।
  • वीबी-जी राम जी को केंद्रीय बजट के एक स्पेशल 'सेफ फंड' से जोड़ा गया है। इसके तहत जियो-फेंसिंग और आधार-लिंक्ड पेमेंट को अधिक मजबूत किया गया है, ताकि काम पूरा होने के 7 दिनों के भीतर श्रमिकों के बैंक खातों में सीधा पैसा ट्रांसफर किया जा सके।

4. काम की प्रकृति में बदलाव

  • मनरेगा योजना में मुख्य रूप से पारंपरिक जल संरक्षण, तालाबों की खुदाई, और कच्चे रास्तों के निर्माण जैसे कामों पर फोकस करता था।
  • वीबी-जी राम जी नए कलेवर में 'स्मार्ट रूरल इन्फ्रास्ट्रक्चर' पर जोर है। इसमें अब पारंपरिक कार्यों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट फाइबर बिछाने, सौर ऊर्जा पैनल लगाने, आधुनिक कोल्ड स्टोरेज और कंक्रीट के गोदाम बनाने जैसे तकनीकी रूप से उन्नत और टिकाऊ कार्यों को शामिल किया गया है।

5. महिलाओं के लिए विशेष सुरक्षा

  • मनरेगा योजना में कुल काम में महिलाओं के लिए सिर्फ एक-तिहाई यानी की 33% प्रतिशत भागीदारी का प्रावधान था।
  • वीबी-जी राम जी में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके साथ ही काम वाले जगहों पर बच्चों के लिए क्रैच (शिशुगृह) और महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल के सख्त नियम और सजा के प्रावधान को जोड़ा गया है।

मनरेगा और VB-G RAM G में अंतर

विशेषता / नियम पुरानी मनरेगा (MGNREGA) नई वीबी-जी राम जी (VB-G RAM G)
रोजगार की गारंटी साल में अधिकतम 100 दिन साल में अधिकतम 125 दिन
न्यूनतम दिहाड़ी सीमा कोई निश्चित केंद्रीय बेस नहीं न्यूनतम ₹300 तय (राज्यों के अनुसार ₹400 तक संभव)
महिलाओं के लिए आरक्षण 33 प्रतिशत 40 प्रतिशत
काम की प्रकृति ज्यादातर पारंपरिक (कच्चा काम/तालाब खुदाई) आधुनिक और टिकाऊ संपत्तियां (इंटरनेट, सोलर, कोल्ड स्टोरेज)
भुगतान की समय-सीमा 15 दिन (अक्सर देरी की संभावना) सख्त डिजिटल निगरानी के साथ अधिकतम 7 कार्यदिवस

राज्यों पर 40% का अतिरिक्त बोझ

केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए VB-G RAM G स्कीम के लिए कुल 95,692.31 करोड़ रुपये का बजट आवंटन किया है। राज्यों पर 40% सैलरी का बोझ डालना एक बड़ी फिस्कल चुनौती है, खासकर राजस्थान, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे ज्यादा मांग वाले राज्यों के लिए, जिन्हें नए कानून के तहत कम एलोकेशन भी मिल सकता है। कमजोर राजकोषीय हालत वाले राज्यों को मांग बढ़ने पर फंड जुटाने में मुश्किल हो सकती है। जहां मनरेगा का मकसद 'भुखमरी और पलायन रोकना' था, वहीं वीबी-जी राम जी लक्ष्य 'मजदूरों की आय बढ़ाना और गांवों का आधुनिक विकास करना' है।

https://youtu.be/fmp8CDcOREs?si=1Ft3k-fwBdEDrml0

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