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यूजीसी नियमों का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा पर जताई गई आपत्ति

Equality Regulations 2026: याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि अधिकारियों को नियम 3(सी) को उसके मौजूदा स्वरूप में लागू करने से रोका जाए।

  • Written By: अर्पित शुक्ला
Updated On: Jan 27, 2026 | 02:17 PM

सुप्रीम कोर्ट (Image- Social Media)

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UGC Rules Controversy: हाल ही में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा जारी किए गए नियमों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन नियमों में जाति आधारित भेदभाव की एकतरफा परिभाषा अपनाई गई है, और कुछ श्रेणियों को संस्थागत सुरक्षा से बाहर कर दिया गया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि यूजीसी के ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026’ के नियम 3(सी) को “गैर-समावेशी” बताया गया है, जो केवल अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) के छात्रों और शिक्षकों को ही सुरक्षा प्रदान करता है, जबकि सामान्य या गैर-आरक्षित श्रेणी के लोगों को इससे बाहर किया गया है।

याचिकाकर्ता विनीत जिंदल ने इन नियमों की आलोचना करते हुए कहा कि जाति आधारित भेदभाव को केवल एससी, एसटी और ओबीसी के खिलाफ परिभाषित करना अनुचित है। इसके कारण, सामान्य श्रेणी के लोग भी जिनका उत्पीड़न जाति के आधार पर हो सकता है, उन्हें कोई सुरक्षा या शिकायत निवारण सुविधा नहीं मिल रही है।

मौलिक अधिकारों का उल्लंघन

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि ये नियम संविधान के अनुच्छेद 14 (बराबरी का अधिकार) और अनुच्छेद 15(1) (धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर राज्य द्वारा भेदभाव पर रोक) का उल्लंघन करते हैं। इसके अलावा, याचिका में यह भी कहा गया है कि यह विनियम संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का भी उल्लंघन करता है, जिसमें सम्मान के साथ जीने का अधिकार शामिल है।

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सुप्रीम कोर्ट से क्या है मांग?

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह अनुरोध किया गया है कि वह नियम 3(सी) को उसके मौजूदा स्वरूप में लागू करने से रोकें और जाति आधारित भेदभाव को जाति-तटस्थ और संविधान अनुरूप तरीके से फिर से परिभाषित किया जाए। याचिका में यह भी कहा गया है कि जाति के आधार पर भेदभाव को इस तरह से परिभाषित किया जाए कि सभी लोगों को, चाहे उनकी जाति कोई भी हो, सुरक्षा मिले।

यह भी पढ़ें- दिल्ली में यूजीसी हेडक्वार्टर के बाहर प्रदर्शन, लोगों ने किया घेराव, नए कानून को वापस लेने की मांग

इसके अलावा, याचिका में केंद्र सरकार और यूजीसी को अंतरिम निर्देश देने की मांग की गई है, ताकि ‘समान अवसर केंद्र’ और ‘समानता हेल्पलाइन’ जैसी सुविधाएं बिना किसी भेदभाव के सभी के लिए उपलब्ध कराई जा सकें।

Ugc rules case reaches supreme court definition of caste based discrimination challenged

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Published On: Jan 27, 2026 | 02:17 PM

Topics:  

  • Supreme Court
  • UGC

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