आज है विश्वविख्यात कवि ‘रवींद्रनाथ टैगोर’ की जयंती, गुरुदेव के ये 10 अनमोल विचार देंगे जीवन को नई दिशा
- Written By: नवभारत डेस्क
सीमा कुमारी
नई दिल्ली: आज 7 मई को भारत के राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ के रचयिता विश्वविख्यात कवि ‘रवींद्रनाथ टैगोर’ (Rabindranath Tagore Jayanti) की जयंती है। आज पूरा देश गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर का स्मरण कर रहा है। महान संगीतकार, दार्शनिक, समाज सुधारक, नोबल पुरस्कार विजेता का जन्म 7 मई 1861 को कोलकाता (कलकत्ता) में हुआ था।
एक बहुमुखी व्यक्तित्व, टैगोर ने केवल 8 वर्ष की उम्र में कविता लिखना शुरू कर दिया था बल्कि जब वह 16 साल के थे तब उन्होंने छद्म नाम ‘भानु सिम्हा’ के तहत कविताओं का अपना पहला संग्रह जारी किया। ऐसे में उनके विचार और कथन आज भी भारत समेत पूरे विश्व के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।
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रबीन्द्रनाथ टैगोर ने सिर्फ भारत का राष्ट्रगान ही नहीं बल्कि बांग्लादेश का भी राष्ट्रगान ‘आमार सोनार बांग्ला’ लिखा था। आज रवीन्द्रनाथ टैगोर की जयंती के शुभ अवसर पर आइए जानें उनके कुछ ऐसे उपदेश और अनमोल विचार जिन्हें पढ़कर आपके जीवन में भी बदलाव आ सकता है।
रविंद्रनाथ टैगोर के कुछ अनमोल वचन
1. आप समुद्र के किनारे खड़े होकर और उसके जल को घूरकर पार नहीं कर सकते हैं।
2. यदि आप अपनी सभी गलतियों के लिए दरवाजे बंद कर देंगे, तो सच्चाई भी आप तक आनी बंद हो जाएगी।
3. हमें जीवन की चुनौतियों से बचने की प्रार्थना नहीं करनी चाहिए, बल्कि उनका निडर होकर सामना करने की हिम्मत मिले, इसकी प्रार्थना करनी चाहिए।
4. मैंने स्वप्न देखा कि जीवन आनंद है। मैं जागा और पाया कि जीवन सेवा है। मैंने सेवा की और पाया कि सेवा में ही आनंद है।
5. यदि आप इसलिए रोते हैं कि सूर्य आपके जीवन से बाहर चला गया है, तो आपके आंसू आसमान के सितारों को देखने से रोक देंगे।
6. तितली महीने की नहीं, बल्कि प्रत्येक क्षण की गिनती करती है। उसके पास पर्याप्त समय होता है।
7. जो कुछ हमारा है, वह हम तक तभी पहुचता है, जब हम उसे ग्रहण करने की क्षमता अपने अंदर विकसित कर लेते हैं।
8. सच्चा प्रेम व्यक्ति को स्वतंत्रता देता है। अधिकार का दावा नहीं करता है।
9. जो लोग अच्छाई करने में स्वयं को ज्यादा व्यस्त रखते हैं, वह स्वंय को अच्छा बनने के लिए समय नहीं निकाल पाते हैं।
10. प्रत्येक बच्चा इस संसार में इस संदेश के साथ आता है कि ईश्वर अभी तक मनुष्यों से हतोत्साहित नहीं है।
