टॉरनेडो या कुछ और? तमिलनाडु के थूथुकुडी में दिखा कुदरत का दुर्लभ नजारा; 6 लोग घायल

Thoothukudi Tornado: तमिलनाडु के थूथुकुडी में रविवार शाम आए एक शक्तिशाली बवंडर ने तबाही मचा दी। मौसम विभाग ने बताया है कि यह असली टॉरनेडो नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली 'थंडरस्टॉर्म अपड्राफ्ट' था।
Tornado or something else? Rare natural phenomenon spotted in Tamil Nadu's Thoothukudi; 6 people injured.
तमिलनाडु के आसमान में उठा विशाल बवंडर, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Tamil Nadu Thoothukudi Tornado News In Hindi: तमिलनाडु के थूथुकुडी जिले में रविवार शाम को प्रकृति का एक ऐसा डरावना रूप देखने को मिला, जिसने स्थानीय लोगों के होश उड़ा दिए। आसमान में धूल और बादलों का एक विशाल घुमावदार खंभा जमीन से उठकर बादलों की ओर जाता दिखाई दिया, जिसे देखकर लोग इसे 'टॉरनेडो' समझने लगे। इस डरावनी घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसमें लोग हैरानी और खौफ के साथ इस दृश्य को देख रहे हैं।

हादसे में 6 लोग घायल

इस बवंडर की चपेट में आने से थूथुकुडी में काफी नुकसान हुआ है। इसके रास्ते में आने वाले कई घरों और दुकानों की छतें उड़ गईं, बिजली के खंभे झुक गए और एक टोल प्लाजा को भी नुकसान पहुंचा है। एक प्राइवेट थीम पार्क में भी भारी क्षति की खबर है। अधिकारियों के अनुसार, इस घटना में कम से कम छह लोग घायल हुए हैं जिन्हें तत्काल उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

टॉरनेडो नहीं, बल्कि 'शक्तिशाली अपड्राफ्ट' था

हालांकि सोशल मीडिया पर इसे टॉरनेडो कहा जा रहा है, लेकिन भारतीय मौसम विभाग (IMD) के विशेषज्ञों ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। मौसम विभाग के अनुसार, यह असली टॉरनेडो नहीं था, बल्कि क्यूमुलोनिम्बस बादलों का एक शक्तिशाली 'अपड्राफ्ट' था।

IMD अधिकारी वीआर दुरई ने बताया कि क्षेत्र में साइक्लोनिक सर्कुलेशन और स्थानीय गर्मी के कारण बहुत तेज थंडरस्टॉर्म पैदा हुआ, जिससे 3 से 18 किलोमीटर की ऊंचाई तक बादल बने। इसी शक्तिशाली अपड्राफ्ट ने जमीन से ढीली मिट्टी और धूल को उठाकर एक घुमावदार खंभे जैसी आकृति बना दी, जिसे 'डस्ट डेविल' या 'सैंड स्पाउट' भी कहा जा सकता है।\

टॉरनेडो और अपड्राफ्ट में क्या है अंतर?

विशेषज्ञों के अनुसार, असली टॉरनेडो एक घूमने वाला हवा का खंभा होता है जिसमें हवा की गति 300 किलोमीटर प्रति घंटे से भी अधिक हो सकती है और वह भारी नुकसान पहुंचाते हुए लंबी दूरी तय करता है। इसके विपरीत, थंडरस्टॉर्म अपड्राफ्ट आमतौर पर कमजोर होता है, इसकी दूरी सीमित होती है और इसमें टॉरनेडो जैसा मजबूत रोटेशन नहीं होता। थूथुकुडी की घटना में संरचनात्मक नुकसान टॉरनेडो के मुकाबले काफी कम था।

बढ़ती तीव्रता और जलवायु परिवर्तन

मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि वैश्विक तापमान बढ़ने के कारण थंडरस्टॉर्म की तीव्रता बढ़ रही है। गर्म हवा ज्यादा नमी सोखती है, जिससे क्यूमुलोनिम्बस बादल अधिक शक्तिशाली बनते हैं। थूथुकुडी जैसी दुर्लभ घटनाएं यह याद दिलाती हैं कि मॉनसून के दौरान स्थानीय तूफानों और मौसम की चेतावनियों को गंभीरता से लेना अनिवार्य है।

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