

High Court On CM Thalapathy Vijay: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) प्रमुख सी. जोसेफ विजय को मद्रास हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उन्हें करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र वितरित करने की अंतरिम अनुमति दे दी है। मुख्यमंत्री विजय शुक्रवार को करूर पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात करेंगे और 32 परिवारों को नियुक्ति पत्र सौंपेंगे।
जस्टिस सी.वी. कार्तिकेयन और जस्टिस आर. शक्तिवेल की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि ये नियुक्तियां फिलहाल अंतरिम रहेंगी। अदालत ने अगली सुनवाई तक नियुक्त कर्मचारियों के पहले वेतन के भुगतान पर रोक लगाई है।
साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया गया है कि वह नियुक्तियों से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करे और बताए कि पूरी प्रक्रिया में सभी कानूनी नियमों और पात्रता मानकों का पालन किया गया है या नहीं।
27 सितंबर 2025 को तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) की एक रैली के दौरान करूर में भगदड़ मच गई थी, जिसमें कम से कम 41 लोगों की मौत हो गई थी। मुख्यमंत्री विजय उस कार्यक्रम में मौजूद थे। अपने दौरे के दौरान वह मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना भी देंगे।
सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे दो वामपंथी दलों ने पीड़ित परिवारों को सरकारी नौकरी देने के फैसले का विरोध किया है। उनका कहना है कि किसी राजनीतिक कार्यक्रम में हुई दुर्घटना की जिम्मेदारी आयोजन करने वाली पार्टी की होनी चाहिए और सरकारी संसाधनों का उपयोग इस उद्देश्य के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
करूर दौरे के दौरान मुख्यमंत्री विजय लगभग 1,700 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले एक निजी गैर-चमड़ा जूता-चप्पल निर्माण कारखाने की आधारशिला भी रखेंगे। इस परियोजना से राज्य में करीब 13,500 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। मुख्यमंत्री के दौरे को देखते हुए पूरे करूर जिले में लगभग 6,500 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।
करूर भगदड़ मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही है। जांच एजेंसी इस मामले में मुख्यमंत्री विजय से कई बार पूछताछ भी कर चुकी है। इससे पहले विजय मृतकों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दे चुके हैं और उनसे निजी तौर पर मुलाकात भी कर चुके हैं।
मुख्यमंत्री के दौरे से पहले द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर विजय और उनके मंत्रियों को पीड़ित परिवारों से मिलने से रोकने की मांग की थी। पार्टी का तर्क था कि इससे चल रही जांच के गवाह प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि अदालत से इस संबंध में राहत नहीं मिलने के बाद विजय का कार्यक्रम तय समय के अनुसार जारी है।
वहीं, TVK का आरोप है कि इस पूरी घटना के लिए तत्कालीन DMK सरकार जिम्मेदार थी, जबकि विपक्षी दल इस हादसे की जिम्मेदारी सीधे कार्यक्रम के आयोजकों पर डाल रहे हैं।