वक्फ संशोधन कानून पर आया ‘सुप्रीम’ फैसला, “इस्लाम के अनुयायी” वाली शर्त पर रोक, जानिए SC ने क्या कहा
Supreme Court ने वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने अधिनियम की कुछ धाराओं पर रोक लगा दी है। जानिए कोर्ट ने क्या कहा।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो- सोशल मीडिया
Supreme Court Waqf Law Verdict: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 पर अंतरिम फैसला सुनाया। धारा 3(ग), 3(घ), 3(ङ) पर लगी रोक; कोर्ट ने कहा कि पूरे अधिनियम को रोका नहीं जा सकता, CEO मुस्लिम हो यह कोशिश होनी चाहिए। इसके साथ ही कई अहम बातें कही गईं।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 पर अंतरिम फैसला सुनाया। अदालत ने कुछ विवादित प्रावधानों पर अस्थायी रोक लगाई है, जिनमें से एक यह शर्त थी कि वक्फ बनाने वाला व्यक्ति कम से कम 5 वर्षों तक इस्लाम का अनुयायी रहा हो। यह फैसला तब तक प्रभावी रहेगा जब तक राज्य सरकारें यह तय करने के लिए नियम नहीं बना लेतीं कि कोई व्यक्ति वास्तव में इस्लाम का अनुयायी है या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट का वक्फ कानून पर रोक से इनकार
प्रधान न्यायाधीश बी आर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले में केंद्र सरकार और याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनने के बाद 22 मई को आदेश सुरक्षित रख लिया था। सोमवार को सुनाए गए फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया कि पूरे वक्फ संशोधन अधिनियम पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं है, लेकिन जिन धाराओं पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है, उन्हें फिलहाल के लिए निलंबित किया जा रहा है।
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सुप्रीम कोर्ट ने धारा 3(ग), 3(घ), और 3(ङ) पर अंतरिम रोक लगा दी है। वहीं, वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति को लेकर कोर्ट ने कहा कि जहां तक संभव हो, यह पद मुस्लिम व्यक्ति को ही दिया जाना चाहिए। हालांकि कोर्ट ने उस संशोधन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया जिसमें गैर-मुस्लिम को भी सीईओ बनाया जा सकता है।
क्या थी याचिकाकर्ताओं की आपत्तियां
याचिकाकर्ताओं ने संशोधित अधिनियम की कई धाराओं को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि:
- वक्फ से संपत्ति हटाने का प्रावधान बहुत व्यापक है और इसका दुरुपयोग संभव है
- जिला कलेक्टर को यह अधिकार देना कि वह वक्फ संपत्ति को सरकारी जमीन घोषित कर सके, संविधान के खिलाफ है
- वक्फ बोर्ड और वक्फ काउंसिल की सदस्यता केवल मुस्लिमों तक सीमित रहनी चाहिए
- सीईओ पद पर गैर-मुस्लिम की नियुक्ति इस्लामी सिद्धांतों और परंपराओं के खिलाफ है
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि यह कानून इतिहास और संविधान दोनों से विपरीत दिशा में है। उन्होंने इसे गैर-न्यायिक प्रक्रिया के जरिए वक्फ संपत्तियों को नियंत्रण में लेने की कोशिश बताया।
सरकार का पक्ष
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि वक्फ एक धर्मनिरपेक्ष अवधारणा है और यह संविधान के अनुरूप है। सरकार ने यह भी कहा कि वक्फ इस्लामी परंपरा से जुड़ा है लेकिन यह धर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं है, इसलिए इसे धार्मिक अधिकार की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।
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एआईएमपीएलबी की प्रतिक्रिया
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि कोर्ट कुछ विवादास्पद प्रावधानों पर रोक लगाएगा, और वैसा ही हुआ। उन्होंने कहा कि हमें राहत मिली है, आगे की प्रक्रिया का भी स्वागत करेंगे। वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 को अप्रैल में संसद से पारित किया गया था और 8 अप्रैल को इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिली थी। इसके तुरंत बाद इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गईं थीं। कोर्ट ने लगातार तीन दिन सुनवाई की और अब अंतरिम आदेश दिया है।
