सावधान! नाबालिग बेटे को दी गाड़ी तो बाप को होगी जेल, श्रीनगर कोर्ट ने सुनाया 3 साल की सजा का ऐतिहासिक फैसला
Srinagar Court News: श्रीनगर में कोर्ट ने नाबालिग बेटे को गाड़ी देने पर पिता को 3 साल जेल की सजा सुनाई है। अगर आप अपने बच्चों को बिना लाइसेंस गाड़ी सौंपते हैं, तो इस जरूरी फैसले को एक बार जरूर पढ़ें।
- Written By: स्निग्धा श्रीवास्तव
अदालत का फ़ैसला (सोर्स- AI)
Srinagar Court Latest Verdict: अगर आप भी अपने नाबालिग बच्चों को शौक-शौक में गाड़ी की चाबी सौंप देते हैं, तो अब संभल जाइए। जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर से एक ऐसी खबर आई है जो हर माता-पिता की आंखें खोल देगी। यहाँ की एक अदालत ने एक पिता को सिर्फ इसलिए दोषी ठहराया और तीन साल जेल की सजा का प्रस्ताव दे दिया, क्योंकि उन्होंने अपने नाबालिग बेटे को गाड़ी चलाने की इजाजत दी थी। सड़क सुरक्षा कानूनों को कड़ाई से लागू करने के लिए कोर्ट का यह फैसला बहुत बड़ा सबक है।
क्या है पूरा मामला?
पूरा मामला श्रीनगर के फतेह कदल इलाके का है। यहाँ रहने वाले हारून खान की गाड़ी को एक नाबालिग लड़का सड़क पर दौड़ाते हुए पकड़ा गया था। ट्रैफिक अधिकारियों ने जब इस मामले का चालान कोर्ट में पेश किया, तो गाड़ी के असली मालिक यानी हारून खान ने माना कि गाड़ी उन्हीं की है। कश्मीर के स्पेशल मोबाइल मजिस्ट्रेट (ट्रैफिक) शब्बीर अहमद मलिक की कोर्ट ने इस लापरवाही पर सख्त रुख अपनाते हुए हारून खान को मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 199-ए और 180 के तहत दोषी करार दिया।
क्या कहता है कानून
मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 199-ए के मुताबिक, अगर कोई नाबालिग गाड़ी चलाते हुए पकड़ा जाता है या कोई अपराध करता है, तो उसके लिए गाड़ी के मालिक या बच्चे के माता-पिता (अभिभावक) को ही पूरी तरह जिम्मेदार माना जाता है। इस नियम के तहत जेल, भारी जुर्माना और गाड़ी का रजिस्ट्रेशन रद्द होने तक की सख्त सजा मिलती है।
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कोर्ट ने सुनाई सख्त सजा
अदालत में सुनवाई के दौरान आरोपी पिता ने अपनी गलती मान ली और केस आगे नहीं लड़ा। इसके बाद कोर्ट ने धारा 199-ए के तहत उन्हें 3 साल की जेल और 25,000 रुपये का जुर्माना सुनाया। साथ ही धारा 180 के तहत 3 महीने की जेल और 1,000 रुपये का अलग से जुर्माना लगाया। इतना ही नहीं, कोर्ट ने उनकी गाड़ी का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) भी पूरे एक साल के लिए रद्द करने का कड़ा आदेश जारी कर दिया।
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उम्र और अच्छे रिकॉर्ड पर मिली थोड़ी राहत
हालांकि, इस मामले में कोर्ट ने थोड़ी नरमी भी दिखाई। यह देखते हुए कि इस गलती में कोई आपराधिक नीयत नहीं थी, आरोपी का पुराना रिकॉर्ड साफ था और उसने खुद अपनी गलती मान ली थी, इसलिए कोर्ट ने उसे ‘प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट’ का फायदा दिया। कोर्ट ने आरोपी को जेल भेजने के बजाय 2 साल तक शांति और अच्छा व्यवहार बनाए रखने के लिए 2 लाख रुपये का बॉन्ड भरने का आदेश दिया।
शर्त टूटी तो सीधे जाना होगा जेल
मजिस्ट्रेट शब्बीर अहमद मलिक ने साफ चेतावनी दी है कि अगर अगले दो साल के भीतर इस बॉन्ड की किसी भी शर्त का उल्लंघन हुआ, तो आरोपी पिता को यह 3 साल की जेल काटनी ही होगी। राहत की बात बस यह रही कि कोर्ट ने गाड़ी के दस्तावेज मालिक को लौटाने का आदेश दिया और साफ किया कि इस सजा की वजह से उनकी सरकारी या प्राइवेट नौकरी, पासपोर्ट वेरिफिकेशन या अन्य किसी काम में कोई रुकावट नहीं आएगी।
